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    कानपुर के कई इलाकों में 48 घंटे से बिजली-पानी नहीं:दो दिन पहले आई आंधी-बारिश के बाद हालत नहीं सुधरे, 600 रुपये में पानी की टंकी

    3 hours ago

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    दो दिन पहले शनिवार शाम आई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने औद्योगिक नगरी कानपुर की कमर तोड़ दी है। यह सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि नगर निगम और केस्को (KESCO) की व्यवस्थाओं की पोल खोलने वाली घटना साबित हुई है। शहर के अलग-अलग इलाकों में 100 से ज्यादा पेड़ धराशायी हो गए। बिजली के दर्जनों पोल उखड़कर गिर गए। इस तबाही के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी कई इलाके पूरी तरह अंधेरे में डूबे हैं। लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। शहर में बिजली गुल होने से घरों की टंकियां खाली हो गई हैं, जिसके कारण पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पहले यह तस्वीरें देखें… आपदा में अवसर, मजबूरी का फायदा उठा रहे जनरेटर मालिक इस मजबूरी का फायदा उठाने में जनरेटर मालिक पीछे नहीं हैं। स्थानीय निवासी शिवेश सिंह ने बताया कि,जो जनरेटर पहले 300-400रु में मिल जाता था, अब उसके लिए 600 रु प्रति आधा घंटा वसूला जा रहा है। इसके अलावा डीजल का खर्च भी जनता को ही उठाना पड़ रहा है। मोहम्मद का कहना है, कि एक टंकी पानी भरने के नाम पर खुलेआम 600 रुपये की वसूली की जा रही है। इससे आम आदमी की जेब पर भारी बोझ पड़ रहा है। जर्जर खंभों ने बढ़ाई मुसीबत, केस्को के दावों की खुली पोल स्थानीय नागरिकों का मानना है,कि यह नुकसान इतना बड़ा नहीं होता यदि विभाग ने समय रहते तैयारी की होती। अक्षय चतुर्वेदी ने कहा कि, केस्को के खंभे इतने जर्जर और पुराने हो चुके हैं कि वे तेज हवा का दबाव नहीं झेल पाए। आकादेऊ इलाके में तो एक ऑटो पर खंभा गिरने से दो लोगों की जान तक चली गई। लोगों का सीधा आरोप है कि सरकार की योजनाओं को जमीन पर उतारने वाले जेई और निचले स्तर के अधिकारी पूरी तरह लापरवाह बने हुए हैं। यदि इन जर्जर खंभों और पुराने ट्रांसफार्मर को समय पर बदल दिया जाता, तो शहर को यह दिन न देखना पड़ता। 40 घंटे बाद टूटी प्रशासन की नींद, सड़कों पर शुरू हुई मरम्मत ​ग्राउंड जीरो पर स्थिति यह है कि जनता गर्मी और उमस से बेहाल है, लेकिन शुरुआती 40 घंटों तक प्रशासन का कोई भी अधिकारी सुध लेने नहीं पहुँचा। जब मीडिया में मामला उछला और स्थानीय लोगों ने केस्को एमडी को वीडियो भेजकर शिकायत की, तब जाकर कहीं सरकारी मशीनरी हरकत में आई। फिलहाल गोपाला टॉवर और नवाबगंज जैसे इलाकों में मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है। नगर निगम की टीमें सड़कों पर गिरे पेड़ों को काटकर रास्ता साफ करने में जुटी हैं, वहीं बिजली विभाग के कर्मचारी नए पोल खड़े करने का प्रयास कर रहे हैं। ​ठप्प पड़ा कारोबार, बस आश्वासन के भरोसे जनता ​बिजली न होने से शहर का छोटा-बड़ा कारोबार पूरी तरह ठप्प पड़ा है। मध्यम वर्गीय परिवारों के पास अब हैंडपंप से पानी ढोने या भारी कीमत पर जनरेटर किराए पर लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अधिकारियों की ओर से लगातार आश्वासन दिया जा रहा है कि कुछ ही घंटों में सप्लाई बहाल कर दी जाएगी, लेकिन पिछले दो दिनों से मिलते आ रहे इन आश्वासनों से जनता का भरोसा टूट चुका है। सवाल अब भी वही खड़ा है कि क्या नगर निगम और बिजली विभाग की इस लापरवाही की सजा कानपुर की जनता यूं ही भुगतती रहेगी?
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