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    कानपुर में बना प्रदेश का पहला मित्र कीट पार्क:आईआईपीआर में मॉडल तैयार, कीट करेंगे फसलों की सुरक्षा; पेस्टीसाइड से मिलेगी राहत

    2 hours ago

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    कानपुर में प्रदेश का पहला मित्र कीट पार्क (एंटोमोफेज पार्क) बना है। आईसीएआर के इंडियन इंस्टीट्यूट आफ पल्स एंड रिसर्च (आईआईपीआर) कैंपस में डीएसटी से मिले फंड से इस पार्क को बनाया गया है। इस पार्क में फूल और औषधीय पौधों को लगाया गया है। इस पार्क में रोपे गए पौधों की खासियत यह है कि इनमें उन कीटों का घर है, जो कि फसल को खराब करने वाले शत्रु कीटों को अपना भोजन बनाते हैं। फिलहाल आईआईपीआर कैंपस में मॉडल के तौर पर पार्क को डेवलप किया गया है। पेस्टीसाइड रहित फसल उद्देश्य आईआईपीआर की कीट वैज्ञानिक डॉ. नीलम यादव ने बताया- मित्र कीट पार्क का उद्देश्य आमजन को केमिकल युक्त पेस्टीसाइड रहित दलहनी फसलों को मुहैया कराना है। हालांकि यह मित्र कीट हर फसल पर शत्रु कीट का हमला रोकेंगे। इस पार्क में फसल के साथ कुछ पौधों को रोपना है। यह पौधे फूल, औषधीय गुणों व सुगंध के जरिए वातावरण को भी बेहतर बनाएंगे इसके अलावा फसलों पर हमला करने वाले शत्रु कीटों का खात्मा करेंगे। खेत में ही बना सकते हैं पार्क आईआईपीआर के निदेशक डॉ. जीपी दीक्षित ने इस तकनीक को किसानों और पर्यावरण के लिए सुरक्षित भविष्य बताया। इस पार्क को बनाने के लिए किसान को अपने एक हेक्टेयर खेत 0.35 हेक्टेयर जगह को मित्र कीट पार्क के रुप में विकसित करना होगा। इसके अलावा अपनी फसल में किसी भी प्रकार के केमिकल युक्त पेस्टीसाइड का उपयोग नहीं करना है। इसके अलावा ऐसे स्थान पर इस पार्क को बनाना है जो कि आपकी फसल वाले स्थान से जुड़ा हुआ हो। ऋतु के हिसाब से चुनने हैं पौधे हालांकि इस मित्र कीट पार्क को बनाने मे पौधों के चयन की एक वैज्ञानिक नीति बनाई गई है। मौसम के अनुसार पौधों को रोपा जाना है, जिससे समय समय पर आने वाले कीटों को अपना भोजन बनाने वाले मित्र कीट आपके पार्क में अपना बसेरा बनाएं। तो आइए हम आपको बताते हैं कि किस मौसम में किस पौधों को रोपने से आप पार्क मित्र कीटों के रहने का स्थान बन जाएगा। शीत ऋतु (अक्टूबर से मार्च) सौंफ और धनिया - इनके पीले व सफेद फूल परजीवी ततैया को आकर्षित करते हैं जो कि इल्लियों का सफाया करती है। गेंदा - यह लेडीबग को बुलाता है जो कि मिट्‌टी के हानिकारक नेमाटोड्स को रोकता है। सरसों - इसके फूल होवरफ्लाई और मधुमक्खियों के लिए बेहतर हैं। सफेद मूसली व एलिसम - यह जमीन पर फैलने वाला छोटा पौधा है जो कि शिकारी कीटों को कालीन जैसा घर देता है। ग्रीष्म व वर्षा ऋतु (अप्रैल से सितंबर) तुलसी - इसकी महक और फूल कई तरह के शिकारी कीटों को आकर्षित करते हैं। सूरजमुखी - यह बड़े कीटों के लिए छिपने की बेहतर जगह है। कॉसमॉस - यह पौधा गर्मी झेल लेता है और लेसविंग्स का पसंदीदा है। ग्वार पाठा - इसके फूल मधुमक्खियों व पक्षियों को आकर्षित करते हैं। कैंसर, जल व वायु प्रदूषण से मिलेगी निजात डॉ. नीलम ने बताया कि अभी तक किसान फसलों पर कीटों का प्रभाव रोकने के लिए केमिकल युक्त पेस्टीसाइड को डालते हैं, जिसके कारण से फसल में कहीं न कहीं केमिकल का असर रह जाता है। जो कि थाली में आने के बाद पेट में जाकर कैंसर व कई रोगों का कारण बनता है। इसके अलावा केमिकल वाले पेस्टीसाइड वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण का कारक बनने के साथ साथ पर्यावरण को प्रदूषित करते हैं। खर्च कम व मिट्‌टी भी रहेगी दुरुस्त इस मित्र कीट पार्क को खेत में विकसित करने के बाद किसानों का पेस्टीसाइड में होने वाला खर्च बचेगा। इसके अलावा मिट्‌टी की सेहत भी दुरुस्त रहेगी। किसान इस पार्क का मॉडल देखने के लिए आईआईपीआर कैंपस में विजिट कर सकते हैं।
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