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    कानपुर मेट्रो का 'सेफ्टी रन':मेनलाइन पर आने से पहले 570 मीटर के ट्रैक पर होगी अग्नि-परीक्षा, ब्रेक-सिग्नल फेल न हों

    6 hours ago

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    शहर की रफ्तार को नया विस्तार देने वाले कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 (सीएसए से बर्रा-8) का सपना अब हकीकत के और करीब पहुंच गया है। सीएसए परिसर में बन रहे निर्माणाधीन डिपो में अब वह हलचल शुरू हो गई है, जिसका सीधा असर भविष्य की सुगम यात्रा पर पड़ेगा। ट्रेनों के रखरखाव और उनकी तकनीकी बारीकियों को परखने के लिए डिपो के भीतर 570 मीटर लंबे विशेष 'टेस्ट ट्रैक' का निर्माण कार्य मंगलवार से शुरू कर दिया गया है। यह ट्रैक उस प्रयोगशाला की तरह काम करेगा, जहां से गुजरने के बाद ही कोई मेट्रो ट्रेन शहर की सड़कों के ऊपर बनी मेनलाइन पर यात्रियों को लेकर दौड़ने का सर्टिफिकेट हासिल कर सकेगी। हूबहू मेनलाइन जैसा होगा सेटअप इस टेस्ट ट्रैक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह महज लोहे की पटरियां भर नहीं हैं। इसे तकनीकी रूप से बिल्कुल वैसा ही तैयार किया जा रहा है, जैसा सेटअप यात्रियों के लिए बनी मुख्य लाइन पर होता है। मेट्रो प्रशासन यहाँ मेनलाइन जैसा ही सॉफ्टवेयर और सिग्नलिंग सिस्टम इंस्टॉल कर रहा है। सुरक्षा और संचार को पुख्ता करने के लिए यहां 4 ट्रेन रेडियो एक्सेस एंटीना, 4 सिग्नल और 4 एक्सल काउंटर हेड लगाए जाएंगे। इसके अलावा, डिपो के भीतर ही 2 प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जा रहे हैं, ताकि टेस्टिंग के दौरान ट्रेन का स्टेशनों पर ठहराव और तालमेल पूरी तरह परखा जा सके। ब्रेक से लेकर स्पीड तक,हर सिस्टम की होगी जांच मेट्रो को ट्रैक पर उतारने से पहले यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम पायदान है। इस निर्माणाधीन टेस्ट ट्रैक पर ट्रेनों के ब्रेक सिस्टम, उनकी रफ्तार, सिग्नल के प्रति रिस्पॉन्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की गहन जांच की जाएगी। विशेषज्ञ टीम यहां मूल्यांकन करेगी कि अलग-अलग परिचालन परिस्थितियों में ट्रेन की स्थिरता और कार्यक्षमता कैसी है। जब ट्रेन यहाँ के कड़े मापदंडों पर खरी उतरेगी, तभी उसे डिपो से बाहर निकाला जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहा है कॉरिडोर-2 डिपो सीएसए परिसर में बन रहा यह डिपो आधुनिक इंजीनियरिंग का नमूना होगा। यहां कुल 15 अलग-अलग ट्रैकों का जाल बिछाया जा रहा है, जिनमें से 4 ट्रैक ट्रेनों को खड़ा करने (स्टेबलिंग), 2 लाइनें वर्कशॉप और 2 लाइनें निरीक्षण के लिए समर्पित होंगी। वर्तमान में, कॉरिडोर-2 के लिए प्रस्तावित 10 ट्रेनों में से 5 ट्रेनें पहले ही डिपो पहुंच चुकी हैं। ट्रेनों की मरम्मत के लिए यहाँ 15 मीटर ऊंचा एक विशाल वर्कशॉप भी बनाया जा रहा है। पर्यावरण का ख्याल रखते हुए इस वर्कशॉप की छतों पर सोलर पैनल लगाए जाएंगे और वेंटिलेशन के लिए अत्याधुनिक एचवीएलएस पंखे व टर्बो वेंटिलेटर का उपयोग होगा। शहर में मेट्रो विस्तार की मौजूदा स्थिति कानपुर में फिलहाल कॉरिडोर-1 (आईआईटी से कानपुर सेंट्रल) के 16 किमी लंबे हिस्से पर यात्री सेवाएं सफलतापूर्वक चल रही हैं। अब यूपीएमआरसी का पूरा ध्यान कॉरिडोर-1 के बाकी हिस्से (कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता) और कॉरिडोर-2 (8.60 किमी) के सिविल निर्माण को जल्द पूरा करने पर है। टेस्ट ट्रैक का काम शुरू होना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में कॉरिडोर-2 की राह और आसान होने वाली है।
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