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    'कर्ज देने वाले मेरी जान ले लेंगे':एग्जामपुर के विवेक बोले- मुझे जेल में डाल दो, लेकिन कोचिंग बंद मत करो; 150 परिवारों का घर चलता है

    4 hours ago

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    ‘मेरे कोचिंग सेंटर से करीब 150-200 परिवारों का खर्च चलता है। आप मुझसे नफरत कर लीजिए। मुझे जेल में डाल दीजिए, लेकिन मेरे कोचिंग सेंटर को बंद मत करिए।’ यह कहना है एग्जामपुर के संस्थापक और शिक्षक विवेक यादव का। उन्होंने ये बातें यूट्यूब पर लाइव क्लास के दौरान कहीं। विवेक यादव ने कहा- आप कह दीजिए कि यहां ऑफलाइन क्लॉस नहीं चलानी है। मैं ऑफलाइन क्लास नहीं चलाऊंगा और बच्चों को बिल्डिंग में नहीं बुलाऊंगा। मेरे ऊपर काफी कर्ज है। अगर कोचिंग बंद हो गई तो जिन लोगों से मैंने कर्ज लिया है, वे मेरी जान ले लेंगे। दरअसल, 31 मई को पीडीए (प्रयागराज विकास प्राधिकरण) और अग्निशमन विभाग ने 3 कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया था। इनमें एग्जामपुर, टारगेट ऑन और सुपर क्लाइमेक्स कोचिंग शामिल हैं। कार्रवाई के बाद छात्रों और शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। छात्र और शिक्षक इस फैसले का विरोध कर रहे हैं और कोचिंग को फिर से खोलने की मांग कर रहे हैं। इसी को लेकर दैनिक भास्कर ने छात्रों से बातचीत की। देखिए 2 तस्वीरें… पहले पढ़िए लाइव क्लॉसेज में विवेक ने क्या कहा? एग्जामपुर के संस्थापक विवेक यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। सोमवार सुबह लाइव क्लास के दौरान विवेक यादव ने कहा- मैं एक बार फिर सरकार से मांग करूंगा कि मेरे कोचिंग सेंटर को खोल दिया जाए। अगर आपको लगता है कि 100, 150, 200 या 300 लोगों की रोजी-रोटी आपके लिए मायने रखती है, तो बंद कर दीजिए। आप मुझसे नफरत कर लीजिए, मुझे जेल में डाल दीजिए। आप कह दीजिए कि यहां से ऑफलाइन क्लास मत चलाइए, तो मैं बच्चों को उस बिल्डिंग में नहीं लाऊंगा। मैं हाथ जोड़कर कह रहा हूं, मेरा काम मत बंद कराइए, क्योंकि मुझे रोज कमाना है। मुझ पर बहुत सारा कर्ज हैं। मैं पढ़ाऊंगा, तभी रिटर्न कर पाऊंगा। मतलब आप समझिए, कर्ज देने वाले मेरी जान ले लेंगे। इसलिए मुझे काम करना होगा। मेरी टीम काम करती है, लोग यहां आते हैं। मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। मैं तीन-तीन, चार-चार साल तक घर नहीं जाता, क्योंकि मैं इसी से निपटने में लगा रहता हूं। हम लोग परेशान हैं। हम रोज सड़क पर नहीं आते। आप शायद नहीं समझ पाएंगे कि मेहनत करके चीजों को कैसे खड़ा किया जाता है। अब पढ़िए छात्रों की बातचीत… टेस्ट सीरीज के बिना यूपीपी की परीक्षा देना मुश्किल छात्र हर्ष तिवारी ने कहा- सील की गई तीनों कोचिंग सेंटर यूपी पुलिस की तैयारियां कराती थीं। हम लोगों के कई साथियों ने वहां टेस्ट सीरीज जॉइन की थी। यूपी पुलिस की परीक्षा 8, 9 और 10 तारीख को है। ऐसे में टेस्ट सीरीज के बिना परीक्षा देना हमारे लिए काफी मुश्किल हो रहा है, क्योंकि परीक्षा ऑफलाइन है। हम सरकार से मांग करते हैं कि यदि अभी तक पीडीए की जांच पूरी नहीं हुई है, तो कम से कम 10 तारीख तक कोचिंगों को खुलवा दिया जाए। उसके बाद आप जांच कराइए, जो भी कार्रवाई करनी हो कीजिए, लेकिन टेस्ट सीरीज के लिए हम योगी जी से हाथ जोड़कर निवेदन करते हैं। साथ ही प्रयागराज के डीएम मनीष कुमार वर्मा से भी अनुरोध है कि कृपया कोचिंगों को खुलवा दीजिए। टेस्ट सीरीज के बिना किसी का एग्जाम निकलना मुश्किल हो सकता है। इसके बिना अपनी तैयारी का सही आकलन भी नहीं हो पाएगा। इसलिए जो कोचिंग ऑफलाइन सील की गई हैं, उन्हें कम से कम टेस्ट सीरीज के लिए खोलने की अनुमति दी जाए, ताकि हम लोग अपनी टेस्ट सीरीज़ पूरी कर सकें। कोचिंग बंद होने से मानसिक प्रताड़ना जैसा हो गया छात्र पुष्पराज पटेल ने कहा- हाल ही में यूपी पुलिस की परीक्षा होने वाली है। कोचिंग में मैराथन क्लॉस और अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते थे। लेकिन अब वे भी बंद हो गए हैं। ऑफलाइन पढ़ाई के दौरान हम बच्चे आपस में चर्चा कर पाते थे और शिक्षकों से सीधे अपनी समस्याओं का समाधान कर लेते थे। लेकिन अब जब सब कुछ बंद कर दिया गया है, तो यह हमारे लिए मानसिक प्रताड़ना जैसा हो गया है। हम लोग एक तरह से कुंठित महसूस कर रहे हैं। अब न हम टेस्ट सीरीज दे पा रहे हैं और न ही शिक्षकों से मिल पा रहे हैं। अगर कोई समस्या होती है, तो उसका समाधान भी नहीं मिल पा रहा है। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि यह कार्रवाई उसी समय क्यों की गई, जब हम लोग प्रदर्शन में गए? अगर कार्रवाई करनी थी, तो पहले कर लेते या कम से कम परीक्षा के बाद करते। बीच में इस तरह की कार्रवाई क्यों की जा रही है? हमारी उत्तर प्रदेश सरकार से गुजारिश है कि फिलहाल इस कार्रवाई को स्थगित कर दिया जाए। बाद में जो कार्रवाई करनी हो कीजिए, लेकिन अभी बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखा जाए। सरकार 10 तारीक तक कोचिंग खुला दीजिए छात्र अभिषेक सिंह ने कहा- कोचिंग बंद होने से हमारी टेस्ट सीरीज भी बाधित हो गई है। हम वहां टेस्ट सीरीज़ देने जाते थे, लेकिन अब वह संभव नहीं हो पा रहा है। मैराथन क्लासें भी चलती थीं, वे भी बंद हो गई हैं। कोचिंग में बच्चे सिर्फ पढ़ने नहीं जाते थे, बल्कि वहां फेस-टू-फेस प्रतियोगिता का माहौल मिलता था। जो भी समस्याएं होती थीं, उन्हें शिक्षक से बात करके सुलझा लेते थे। लेकिन कोचिंग बंद होने के बाद वे समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं। हम उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि कोचिंग संस्थानों को दोबारा खोला जाए और टेस्ट सीरीज जैसी सुविधाएं फिर से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि हमारी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी बेहतर तरीके से हो सके। 31 मई को 3 कोचिंग सेंटर को सील किया गया जानकारी के अनुसार, 29 मई को पेपर लीक और विभिन्न परीक्षाओं में धांधली के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया था। इस प्रदर्शन में कई कोचिंग संस्थानों के शिक्षक भी शामिल हुए थे। इसके अगले दिन 31 मई को पीडीए और अग्निशमन विभाग की टीम ने कार्रवाई करते हुए शहर की तीन प्रमुख कोचिंग संस्थाओं को सीज कर दिया। सीज की गई कोचिंग संस्थाओं में एग्जामपुर कोचिंग, सुपर क्लाइमेक्स कोचिंग और टारगेट ऑन कोचिंग शामिल हैं। इन संस्थानों से जुड़े शिक्षक विवेक यादव, मारूफ खान और प्रदीप तिवारी भी छात्रों के आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे। अधिकारी बोले- जांच के बाद संस्थानों को सीज किया गया वहीं, पीडीए और अग्निशमन विभाग की ओर से बताया गया कि यह कार्रवाई भवन और अग्नि सुरक्षा से जुड़े विभिन्न नियमों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। नियमानुसार जांच के बाद ही इन संस्थानों को सीज किया गया है। हजारों छात्र सड़कों पर उतरे थे 29 मई को ही प्रयागराज में 2 हजार से ज्यादा प्रतियोगी छात्र सड़कों पर उतरे थे। करीब ढाई घंटे तक प्रदर्शन किया था। छात्रों ने NEET पेपर लीक और अन्य भर्ती परीक्षाओं में धांधली का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की थी। इस दौरान छात्रों ने कहा था- आज कॉकरोच प्रयागराज की सड़कों पर हैं। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें, क्योंकि उनके कार्यकाल में सबसे ज्यादा धांधली हो रही है। पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा था। मेहनत करने वाले छात्रों का भरोसा संस्थाओं और परीक्षा व्यवस्था से उठता जा रहा था। छात्रों ने कहा था कि उनका विरोध किसी एक परीक्षा को लेकर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम के खिलाफ था। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर विरोध जताया था। उनका कहना था कि यह हमारी अपनी लड़ाई है और हमें खुद ही इसे लड़ना पड़ेगा। संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच ने 12 जून को "लखनऊ चलो" आंदोलन का ऐलान किया था। छात्रों की 4 मांगें रही- छात्रों के प्रदर्शन की 4 तस्वीरें देखिए… यह प्रदर्शन संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच के नेतृत्व में हुआ था। संयोजक पंकज पांडेय ने कहा था - हमारा उद्देश्य युवाओं की आवाज शासन-प्रशासन तक पहुंचाना है। हमारा विरोध किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग के लिए है। मेहनत कर रहे विद्यार्थियों का भविष्य दांव पर है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ------ ये भी पढ़ें- '3 फीट नपाई 7 फीट खुदाई, सूर्या को इंसाफ मिलेगा': गाजियाबाद में सभी हत्यारोपियों के एनकाउंटर की मांग, मां बोली- सभी के घर बुलडोजर चले गाजियाबाद में 11 वीं के छात्र सूर्या चौहान हत्याकांड को 6 दिन बीत चुके हैं। उसके घर पर सांत्वना देने वालों का सिलसिला जारी है। अलग-अलग संगठन से जुड़े लोग उसके घर पहुंचकर परिवार को दिलासा दे रहे हैं। उसके घर के आसपास के बाजार अब भी बंद हैं। यहां एक कंपनी RRF समेत 500 से ज्यादा जवान मौजूद हैं। 400 से ज्यादा छोड़ी बड़ीं दुकानें बंद हैं। पढ़िए पूरी खबर…
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