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    कुरुक्षेत्र NIT में सुसाइड के बाद हॉस्टल वार्डन बदलीं:सुसाइड नोट में लिखा- मैंने पैसे-सीट वेस्ट की; छात्रा के पिता बोले- पढ़ने में होशियार थी

    18 hours ago

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    हरियाणा में NIT कुरुक्षेत्र में बीटेक की छात्रा दीक्षा सुसाइड केस में संस्थान ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गर्ल हॉस्टल की चीफ वॉर्डन, डिप्टी वॉर्डन और एसोसिएट डीन स्टूडेंट वेल्फेयर को बदला गया है। गर्ल हॉस्टल की चीफ वॉर्डन डॉ. वृंदा गोयल की जगह प्रो. ज्योति ओहरी और डिप्टी चीफ वॉर्डन डॉ रितु गर्ग को बनाया गया है। NIT के PRO प्रो. ज्ञान भूषण ने बताया कि एसोसिएट डीन प्रो. वीके वाजपेयी और डॉ. पूनम जिंदल को लगाया गया है। वहीं, कुरुक्षेत्र में अस्पताल पहुंचे दीक्षा के पिता शशि कुमार दुबे ने बताया कि हमारी लड़की बहुत मजबूत थी। पढ़ने में भी वो शुरू से अच्छी रही। JEE मेंस में भी अच्छे नंबर आए था। यहां भी कॉलेज में परफॉरमेंस अच्छा था। कॉलेज प्रशासन और प्रोफेसर भी मानते हैं कि दीक्षा पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन फिर भी हमारी लड़की ने सुसाइड किया। इसमें जरूर कुछ न कुछ है। पिता बोले- हम छोड़ेंगे नहीं, चाहे कुछ भी करना पड़ा NIT के स्टूडेंट के आरोप पर पिता ने कहा कि हम यहां नहीं थे। छात्र ने कुछ कहा, तो हमने पुलिस से बात की है। पुलिस ने हमें आश्वासन दिए है। अगर इन कार्रवाई नहीं हुई तो हम यहां से लेकर बिहार तक जाएंगे। अपनी बच्ची की बात को हम दबने नहीं देंगे और हम छोड़ेंगे नहीं, चाहे इसमें हमें कुछ भी करना पड़े। भाई बोले- परिवार को अभी तक यकीन नहीं हो रहा दीक्षा के मौसेरे भाई ओंकार ने बताया कि घटना ने एक-दो दिन पहले ही उसकी घर पर बातचीत हुई थी। परिवार को अभी तक यकीन नहीं हो रहा कि दीक्षा इस तरह का कदम उठा सकती है। ओंकार ने बताया कि दीक्षा ने अपनी सारी पढ़ाई अलीगढ़ से की थी। 12वीं के बाद उसने IIT के लिए एग्जाम दिया था। तब ऑल इंडिया में उसका 15 हजार के आसपास रैंक आया था और उसका नम्बर कुरुक्षेत्र NIT में पड़ा था। बता दें कि NIT कुरुक्षेत्र में दीक्षा के सुसाइड के बाद देर रात तीन बजे तक कैंपस में हंगामा चला। हंगामे को देखते हुए एनआईटी प्रशासन ने मेन गेट बंद कर दिया और पुलिस बुला ली। इससे छात्र नाराज हो गए और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक छात्रा को ब्रह्मसरोवर में जाकर सुसाइड करने की बात कहने वाले प्रोफेसर पर कार्रवाई नहीं होती, वे यहां से नहीं उठेंगे। उन्होंने स्पोर्ट्स इंचार्च शहाबुद्दीन को भी सस्पेंड करने की मांग रखी। सूचना पर DSP हेडक्वार्टर सुनील कुमार, लाडवा DSP निर्मल सिंह और शाहाबाद DSP रामकुमार मौके पर पहुंचे। करीब छह घंटे बाद डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत स्टूडेंट के बीच पहुंचे और आश्वासन दिया कि उनकी मांगों पर आज ही विचार होगा। इसके बाद प्रदर्शनकारी छात्रों ने धरना-प्रदर्शन खत्म कर दिया। उधर, शुक्रवार सुबह एनआईटी प्रशासन की ओर से 17 अप्रैल से 4 मई तक छुट्टियां घोषित कर दी गई। एनआईटी प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने कहा कि कैंपस में अभी स्ट्रैस के माहौल है। बच्चे घर पर जाकर तैयारी करेंगे। उनके वाइवा भी ऑनलाइन लिए जाएंगे। वाइवा का शेड्यूल अभी जारी नहीं किया गया है। पहले जानिए… हंगामा कर रहे छात्रों ने क्या आरोप लगाए वार्डन ने गेट नहीं खोला, बिना चेक किए ही दीक्षा को डेड घोषित किया स्टूडेंट ने बताया कि छात्रा दीक्षा ऑर्टिफिशियल एंड डेटा साइंस स्ट्रीम की पढ़ाई कर रही थी। वह बिहार के बक्सर जिले की रहने वाली थी। उसके सुसाइड करते ही वार्डन को सूचित किया था। वार्डन ने NIT की हेल्थ टीम बुलाई, तो उस टीम बाहर से झांक कर ही दीक्षा को डेड घोषित कर दिया। पहले तो वार्डन ने गेट भी नहीं खोला था। प्रोफेसर ने सवाल पूछने पर डांटा, NIT प्रशासन ने पुलिस बुलाई छात्रा की एक दोस्त ने बताया कि दीक्षा का शव काफी देर तक फंदे पर लटका रहा, किसी ने ध्यान नहीं दिया। जब हमने प्रोफेसर से सवाल पूछे तो उन्होंने हमें डांटना शुरू कर दिया। छात्रों का कहना है कि पिछले करीब 2 महीने में कैंपस में ये चौथा सुसाइड है। इसे लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया तो एनआईटी प्रशासन ने मौके पर पुलिस बुला ली। छात्रों का आरोप है कि उनकी बात तक नहीं सुनी जा रही। प्रोफेसर कहते हैं- हम पढ़ाए या न पढ़ाए, हमारी सरकारी नौकरी स्टूडेंट ने बताया कि एक प्रोफेसर ये बोलता है कि सुसाइड करना है तो कॉलेज के बाहर करो, अंदर क्यो कर रहे हो। 4 सुसाइड हो चुके है डेढ़ महीने के अन्दर, कोई भी एक्शन नहीं लिया गया है और प्रोफेसर कहते हैं हमारी सरकारी नौकरी है। हम पढ़ाए चाहे ना पढ़ाए। पहले तीन सुसाइड होने के बाद एनआईटी प्रशासन ने एक कमेटी बनाई थी, जिससा काम छात्रों की प्रॉब्लम को सॉल्व करना था, लेकिन कमेटी ने ठीक से काम नहीं किया। स्टूडेंट को जबरदस्ती घर जाने को कहा जा रहा, सीबीआई जांच हो छात्रों ने आरोप लगाया कि NIT प्रशासन ने अब हंगामे को देखते हुए हमारी छुट्टियां कर दी है। हमें जबरदस्ती घर जाने के लिए कहा गया है, जिससे मामले को दबाया जा सके। छात्रों का कहना है कि प्रोफेसर हमें मेंटल हैरेसमेंट करते हैं। डिग्री रोकने का दबाव बनाया जाता है। हमारा कोई पर्सनल इश्यू नहीं है। हम सिर्फ अपनी दोस्त दीक्षा को इंसाफ दिलाने के लड़ रहे हैं। इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। NIT प्रवक्ता बोले- आनलाइन लिए जाएंगे वाइवा एनआईटी प्रवक्ता प्रो. ज्ञान भूषण ने कहा कि सेमेस्टर 22 अप्रैल तक था। अब तीन-चार दिन पहले ही उनकी छुट्टी कर दी गई है। कैंपस में अभी स्ट्रैस का माहौल है, बच्चे घर पर जाकर तैयारी कर सकेंगे। अब उनके वाइवा भी ऑनलाइन ही लिए जाएंगे। इसकी नोटिफिकेश भी जारी कर दी जाएगी। वहीं एंड सेमेस्टर एग्जाम की डेटशीट पहले से ही जारी की जा चुकी है, वो ऑफलाइन की होंगे। प्रोफेसर ने आगे कहा कि छात्रों से संवाद करने के लिए एक टीचर को कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। हर एक सेक्शन में 20 बच्चों पर कोऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है। सभी ने बच्चों से भी सुझाव लिए हैं। छात्रों के सुसाइड को लेकर एनआईटी प्रशासन गंभीर है। इंस्टीट्यूट बच्चों के हित के लिए कदम उठा रहा है। बच्चों से भी लगातार बातचीत चल रही है। अब पढ़िए, छात्रा की मौत का घटनाक्रम… DSP बोले- सभी इश्यू सॉल्व किए जाएंगे शाहाबाद DSP राजकुमार ने बताया कि सुबह करीब 3 बजे तक धरना प्रदर्शन चला। डायरेक्टर प्रो. ब्रह्मजीत ने स्टूडेंट को आश्वासन दिया है कि उनकी सभी मांगों पर आज शुक्रवार को ही विचार किया जाएगा। इसके अलावा पुलिस ने छात्रों को आश्वसन दिया कि सुसाइड मामले की जो भी शिकायत देंगे, उसी तरह की जांच की जाएगी। 2 महीने में चार स्टूडेंट कर चुके सुसाइड इस घटना के पहले NIT के तीन अन्य स्टूडेंट सुसाइड कर चुके हैं। 9 अप्रैल को सिरसा जिले के गांव शेरपुर के प्रियांशु वर्मा (22) ने फंदा लगाया था। प्रियांशु बीटेक थर्ड ईयर का स्टूडेंट था। हॉस्टल के रूम से उसका शव मिला था। प्रियांशु से पहले 31 मार्च को पवन कुमार (22) निवासी घासैड़ा जिला नूंह ने अपनी जान दी थी। पवन बीटेक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रहा था। वहीं दो महीने पहले 16 फरवरी को तेलंगाना के रहने वाले अंगोद शिवा (19) ने हॉस्टल के रूम में फांसी लगाकर जाने दे दी थी।
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