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    करसड़ा कूड़ा-डंपिंग में निगम लगाएगा मियावाकी वन:डेढ़ साल में 1264 मीट्रिक टन कूड़े की जापानी तकनीक से बायोमाइनिंग

    2 hours ago

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    वाराणसी के करसड़ा इलाके में पिछले डेढ़ दशक से डंप हो रहे कूड़े का अब हटाया जाएगा। यहां की 25 एकड़ भूमि पर नगर निगम अब मियावाकि वन लगाने की तैयारी कर रही है। जल्द ही यहां डंप 1264 मीट्रिक टन कूड़े की बायोमाइनिंग की जाएगी। जपने तकनीक से होने वाली इस बायोमाइनिंग में डेढ़ साल का समय लगेगा। जिसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया - कंपनियों ने टेण्डर होने के बाद पूरे ग्राउंड की मैपिंग कर कूड़े का सही आकलन कर लिया है। जिसके बाद अब बायोमाइनिंग का काम शुरू होगा। यहां मियावाकि वन लगने से यहां रहने वालों को दुर्गन्ध से छुटकारा मिल जाएगा वैज्ञानिक तरीके से होगा कचरे का निस्तारण नगर आयुक्त ने बताया - करसड़ा की 25 एकड़ भूमि पर पिछले डेढ़ दशक से पूरे शहर का कूड़ा डंप किया जा रहा है। इसपर अब मियावाकी तकनीक से सघन जंगल विक्सित किया जाएगा। जो इस इलाके और पर्यावरण को नई संजीविनी देगा। करसड़ा में जमा लाखों मीट्रिक टन कचरे के निस्तारण के लिए बायोमाइनिंग का रास्ता चुना है। इस प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए जीआइजेड और आरपीयूईएस कंपनियों की मदद ली जा रही है। जापानी तकनीक का उपयोग करते हुए इन कंपनियों ने पूरे डंपिंग ग्राउंड की मैपिंग और कचरे की मात्रा का सटीक आकलन कर लिया है। ये वैज्ञानिक तरीके से यहां के कूड़े को खत्म करेंगे। प्रदूषण, दुर्गन्ध से मिलेगी मुक्ति नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया - यहां लगभग 1264 लाख मीट्रिक टन कचरा एकत्रित है। कचरे के कारण आसपास के क्षेत्रों में भयंकर दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या बनी हुई है। हालांकि, कचरे की विशाल मात्रा को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया में करीब एक से डेढ़ वर्ष का समय लग सकता है। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। शहर में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1200 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। इस कचरे के निपटान के लिए निगम के पास वर्तमान में करसड़ा में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू कंपोस्ट' प्लांट और रमना में 600 मीट्रिक टन क्षमता का 'वेस्ट टू चारकोल' प्लांट मौजूद है। इसके अलावा रमना में ही मलबे से ईंट और टाइल्स बनाने के लिए सीएंडडी प्लांट भी कार्यरत है। ग्रीन लंग्स के रूप में का करेगा मियावाकी वन नगर आयुक्त ने बताया - करसड़ा में हम अगले डेढ़ वर्ष में कूड़े का ढेर ख़त्म करने की तरफ़ा अग्रसर हैं। इसके बाद यहां विकसित ओने वाले 25 एकड़ में मियावाकी वन शहर के लिए ग्रीन लंग्स का काम करेंगे। इससे शहर में भी प्रदूषण के स्तर में कमी आएगी। हाल ही में डोमरी में गंगा के किनारे एक साथ 2 लाख से अधिक पेड़ लगाकर वाराणसी नगर निगम ने वर्ल्ड रिकार्ड बनाया था। इसे भी मियावाकि वन के रूप में विकसित किया जा रहा है। काशी बनेगा हरित महापौर अशोक तिवारी ने इस संबंध में बताया - वाराणसी की आबो हवा को सुधारने के लिए करसड़ा के कूड़े के ढेर को निस्तारित करना हमारी प्राथमिक्ता है। बायोमाइनिंग की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इसके बाद वहां डेढ़ वर्ष बाद मियावाकि वन विकसित किया जाएगा। जो वाराणसी को स्वच्छ और हरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।
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