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    काशी में विक्रमादित्य महानाट्य का समापन:निदेशक बोले- CM मोहन यादव ने विक्रमादित्य के पिता का रोल किया, 3 दिन में 1 लाख लोग पहुंचे

    2 hours ago

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    वाराणसी बरेका के सूर्य सरोवर मैदान में चल रहे तीन दिवसीय महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” के अंतिम दिन ऐसा दृश्य बना, जिसने दर्शकों को इतिहास के स्वर्णिम काल में पहुंचा दिया। तीन भव्य मंचों पर एक साथ जीवंत हो रहे प्रसंग, दौड़ते घोड़े, गूंजते युद्ध दृश्य और महाकाल के दिव्य दर्शन हर पल रोमांच और आस्था से भरे नजर आए। महानाट्य में 200 से अधिक कलाकारों ने हिस्सा लिया। करीब 1 घंटा 45 मिनट तक चली इस प्रस्तुति ने सम्राट विक्रमादित्य के जनकल्याणकारी और आदर्श शासक के स्वरूप को जीवंत कर दिया। अंतिम दिन मुख्य अतिथि मंत्री सुरेश खन्ना पहुंचे। पिछले 3 दिन में इसको देखने के लिए 1 लाख से अधिक लोग पहुंचे। सबसे पहले तस्वीर देखें… मध्यप्रदेश के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां मंच पर उज्जैन के महाकाल मंदिर की भव्य प्रतिकृति विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जिसने दर्शकों को बाबा महाकाल के दर्शन का अहसास कराया। वहीं, युद्ध के दृश्यों में मंच के सामने दौड़ते घोड़े, रथ, ऊंट और हाथियों ने पूरे माहौल को रोमांचक बना दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो आंखों के सामने ही युद्ध चल रहा हो और सम्राट विक्रमादित्य विजय प्राप्त कर रहे हों। सम्राट विक्रमादित्य के मंचन से पूर्व मंच पर मध्यप्रदेश के लोक कलाकारों द्वारा पूर्वरंग प्रस्तुतियों में 150 से अधिक कलाकारों ने मध्यप्रदेश के लोक नृत्य जैसे, मालवा की मटकी, निमाड़ का गणगौर, डिंडोरी का गुदुमबाजा, सागर का बरेदी और उज्जैन का डमरू प्रस्तुत किया। इसके पूर्व लोक कलाकारों ने लोक कला यात्रा के माध्यम से शहर में मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक वैभव को प्रस्तुत किया। खुद मोहन यादव इस महानाट्य में कर चुके हैं अभिनय उज्जैन के रहने वाले निदेशक संजू मालवीय ने कहा - 2006 में इस महान की परिकल्पना हुई थी। जिसमें विक्रमादित्य के सुशासन को दिखाया गया था। पहली बार इस नाटक का मंचन 2007 में किया गया। उन्होंने बताया कि 2007 से जब तक वह कैबिनेट में नहीं रहे तब तक वहां विक्रमादित्य के पिता का रोल करते थे। उन्होंने इसके संगीत निर्माण और कथा को अंतिम रूप दिया। उन्होंने कहा कि इसमें एक खास बात यह भी है कि कोई व्यक्ति फुल टाइम थिएटर नहीं करता है। उन्होंने कहा कि जो विक्रमादित्य का रोल कर रहे हैं वह राहत पटेल है जो एक बड़े ऑर्थो सर्जन है। उन्होंने बताया कि हम लोग तीन माह पहले से रिहर्सल करते हैं और उसके बाद एक बड़े मंच का स्वरूप तैयार होता है। इंजीनियरिंग कर रही राजकुमारी की भूमिका निभाने वाली प्रियल निदेशक संजू मालवीय ने कहा - इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहीं प्रियल सुनानिया इस नाटक में राजकुमारी की भूमिका निभा रही हैं। लगभग आठ-नौ वर्षों से रंगमंच से जुड़ी प्रियल बताती हैं कि उनकी रंगमंचीय यात्रा संयोग से शुरू हुई थी। वे डांस के लिए आई थीं, लेकिन उन्हें इस भूमिका के लिए चुन लिया। धीरे-धीरे अभिनय ही उनकी पहचान बन गया।
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