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    कुशीनगर में अगले हफ्ते पारा 40°C पार होगा:IMD अलर्ट, मानसून सामान्य से कम रहने के संकेत

    1 hour ago

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    कुशीनगर जिले में अगले सप्ताह भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि शुष्क मौसम के कारण अधिकतम तापमान में 4 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि हो सकती है, जिससे पारा 40°C के पार पहुंचने की संभावना है। बढ़ती गर्मी का असर सामान्य जनजीवन के साथ-साथ कृषि क्षेत्र पर भी पड़ने की आशंका है। कृषि अधिकारी मेनका ने बताया कि तेज गर्मी और सूखी हवाओं से खेतों की नमी तेजी से कम होगी। इससे गेहूं की कटाई के दौरान दानों का वजन प्रभावित हो सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियों के मुरझाने और झुलसने का खतरा बढ़ेगा। आम और लीची जैसी बागवानी फसलों में समय से पहले फल गिरने और उत्पादन घटने की आशंका है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे सिंचाई की आवृत्ति बढ़ाएं और मल्चिंग तकनीक अपनाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने पर लू, डिहाइड्रेशन, सिरदर्द, चक्कर और थकान जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चे, बुजुर्ग और पहले से बीमार लोग इस स्थिति में अधिक संवेदनशील होंगे। आम लोगों को दोपहर में धूप से बचने, पर्याप्त पानी पीने, हल्के और ढीले कपड़े पहनने तथा ओआरएस का सेवन करने की सलाह दी गई है। तेज गर्मी के कारण दोपहर के समय बाजारों और सड़कों पर आवाजाही कम होने की संभावना है। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने से आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है। जलस्रोतों के सूखने से पेयजल संकट की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। विशेषकर ग्रामीण इलाकों में परेशानी बढ़ने की आशंका है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। इस बीच, वर्षा को लेकर IMD ने 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून का दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार, जून से सितंबर के दौरान देश में कुल वर्षा दीर्घावधि औसत (LPA) का लगभग 92% रहने की संभावना है, जिसमें ±5% की त्रुटि संभव है। विभाग के मुताबिक, इस वर्ष बारिश ‘सामान्य से नीचे’ श्रेणी में रहने की आशंका सबसे अधिक है, जबकि ‘कम वर्षा’ की संभावना भी बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार- प्रशांत महासागर में ENSO की तटस्थ स्थिति के बावजूद मानसून के दौरान अल नीनो जैसी परिस्थितियां विकसित हो सकती हैं, जो वर्षा को प्रभावित करेंगी। साथ ही हिंद महासागर में सकारात्मक IOD बनने की संभावना भी जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसका असर कृषि, जल संसाधन और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले महीनों में मौसम के रुझान पर नजर रखना जरूरी होगा।
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