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    खाद्य-सुरक्षा से मिट्‌टी, जल व वायु पर बन रहा दबाव:कृषि नीतियों और नई तकनीकी पर आईआईटी में हुआ लेक्चर

    2 hours ago

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    आईआईटी कानपुर के कोटक स्कूल ऑफ सस्टेनेबिलिटी द्वारा स्वस्तिभवतु व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत सतत कृषि और खाद्य सुरक्षा पर विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। व्याख्यान का विषय प्रकृति की रक्षा करते हुए भारत को भोजन उपलब्ध कराना:कृषि नीतियों और नई तकनीकों की भूमिका रहा। व्याख्यान में भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (ICRIER) के प्रो. अशोक गुलाटी ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में की गई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस सफलता के साथ-साथ मिट्टी, जल, वायु और जैव विविधता जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव एक गंभीर चुनौती बन गया है। उन्होंने सतत और संतुलित कृषि नीतियों की आवश्यकता पर जोर दिया, जो उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सुनिश्चित करें। सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं प्रो. गुलाटी ने सटीक कृषि (प्रिसिजन एग्रीकल्चर) से जुड़ी आधुनिक तकनीकों सेंसर, स्मार्ट कैमरे, ड्रोन और ‘सी एंड स्प्रे’ जैसी प्रणालियों की भूमिका को रेखांकित किया, जो आवश्यकता के अनुसार कृषि इनपुट के उपयोग में मदद करती हैं। प्रो. गुलाटी ने कहा कि आईआईटी जैसे संस्थानों को किसानों के लिए किफायती और व्यावहारिक तकनीकी समाधान विकसित करने में अग्रणी भूमिका निभानी होगी।कहा कि भारतीय कृषि को टिकाऊ बनाने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नीतियों, उत्पादों, कृषि पद्धतियों और साझेदारियों के बीच मजबूत तालमेल आवश्यक है। आईआईटी की भूमिका अहम भारत की खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए चार प्रमुख स्तंभों नीतियों, उत्पादों, पद्धतियों और साझेदारियों का समन्वय आवश्यक है। प्रो. गुलाटी ने कहा कि आईआईटी जैसे शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका ऐसी तकनीकों के विकास में बेहद अहम है, जो किसानों को कम संसाधनों में अधिक और टिकाऊ उत्पादन करने में सक्षम बनाएं। सतत कृषि केवल सामूहिक और समन्वित प्रयासों से ही संभव है। इस व्याख्यान में संकाय सदस्यों, छात्रों, शोधकर्ताओं और अन्य स्टेक होल्डर्स ने सक्रिय भागीदारी की तथा सतत कृषि और नवाचार पर सार्थक चर्चा की।
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