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    लाखों के पैकेज का धोखा, बंधक बनाकर साइबर ठगी कराई:चंगुल से छूटने के बाद की शिकायत, कानपुर पुलिस ने दो एजेंट को अरेस्ट किया

    5 hours ago

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    कानपुर पुलिस ने विदेश में नौकरी का झांसा देकर कंबोडिया और थाईलैंड समेत अन्य देशों के साइबर ठगों को युवाओं को बेचने वाले गैंग का खुलासा किया है। दो आरोपियों को अरेस्ट भी किया है। पकड़े गए शातिर कानपुर समेत आसपास के जिलों के युवाओं को विदेश में नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगों को बेच देते थे। पढ़े-लिखे युवाओं को विदेश में साइबर स्लेवरी यानी साइबर ठगों की गुलामी का काम कराते थे। युवाओं को यातनाएं देकर साइबर ठगी का काम कराया जाता था। साइबर ठगों के चंगुल से भागकर कानपुर पहुंचे युवक ने बेकनगंज थाने में शिकायत की। पुलिस ने दोनों शातिरों को अरेस्ट कर लिया। अब पुलिस पूरे सिंडीकेट का खुलासा करने के लिए काम कर रही है। साइबर ठगी की ट्रेनिंग फिर टॉर्चर-यातनाएं देकर कराते थे साइबर फ्रॉड डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके खुलासा किया। डीसीपी ने बताया कि बेकनगंज निवासी युवक जावेद ने बताया कि कागजी मोहाल निवासी मोहम्मद अमस और बेनाझाबर निवासी मोहम्मद फैसल वारसी ने विदेश में नौकरी का झांसा देकर 3 लाख रुपए वसूल लिया। इसके बाद उसे झांसा देकर कंबोडिया में भेजा। वहां पहुंचे तब पता चला कि उसे साइबर ठगों को लाखों रुपए में बेच दिया है। साइबर ठगों ने उसे बंधक बना लिया। सबसे पहले तो पासपोर्ट जब्त करके बंधक बना लिया। इसके बाद टॉर्चर और ट्रेनिंग का दौर शुरू हुआ। किस तरह से कॉल करके भारतीय मूल के लोगों को डिजिस्टल अरेस्ट, सीबीआई या ईडी अफसर बनकर रईस लोगों को टारगेट करने, ऑनलाइन जॉब के नाम पर ठगी, लॉटरी के नाम पर ठगी समेत सैकड़ों तरह से ठगी की ट्रेनिंग दी। इसके बाद साइबर गुलाम बनाकर अलग-अलग देशों के लोगों से साइबर ठगी कराने लगे। तीन महीने बाद तबियत बिगड़ने और अलग-अलग तरह से बहाने बनाने के बाद किसी तरह वह साइबर ठगों के चंगुल से बचकर इंडिया लौटा और फिर अपने घर कानपुर पहुंचे। इसके बाद जावेद ने मामले की जानकारी बेकनगंज थाने में दी। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए मोहम्मद अमस और मोहम्मद फैसल वारसी को अरेस्ट कर लिया। दोनों से पूछताछ के बाद पुलिस ने रविवार को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया। 3 से 4 लाख प्रति साइबर गुलाम भेजने पर मिलता था कमीशन जांच के दौरान पता चला कि शातिर मोहम्मद अमस और मोहम्मद फैसल कानपुर में रहकर भले ही कपड़े का व्यापार और सिलाई का काम करते हैं, लेकिन वह कंबोडिया और थाईलैंड समेत अन्य देशों के साइबर ठगों से जुड़े हुए हैं। प्रति व्यक्ति गैंग इन्हें 3 से 4 लाख रुपए देता था। जितना पढ़ा-लिखा और साइबर का जानकार युवक होता था एजेंट को उतनी ज्यादा रकम मिलती थी। अंतरराष्ट्रीय गिरोह से जुड़े तार, सैकड़ों लोगों को विदेश भेज चुका है गैंग डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि इस गैंग का कनेक्शन इंटरनेशनल लेवल पर है। कानपुर में पकड़े गए दोनों युवक तो एजेंट हैं। गिरोह की सबसे निचली सीढ़ी हैं। इनसे मिले इनपुट के आधार पर पूछताछ और जांच की जा रही है। दोनों युवक अब तक कानपुर के 25 से ज्यादा लोगों को विदेश भेज चुके हैं। जबकि गिरोह सैकड़ों लोगों को लाखों के पैकेज पर विदेश में नौकरी के सपने दिखाकर साइबर ठगों को बेच चुका है। जल्द ही गिरोह के सरगना को अरेस्ट करके जेल भेजा जाएगा।
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