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    लखनऊ अग्निकांड खोए हुए बच्चे पिता से मिले:भीषण आग के बीच लापता हुए थे बच्चे; पिता बोले- जान में जान आई, धन्यवाद भास्कर

    1 hour ago

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    ‘आग लगने के बाद हमारे दोनों बच्चे लापता हो गए। जैसे-जैसे आग बढ़ती जा रही थी वैसे-वैसे हमारी उम्मीद घटती जा रही थी। हम हमारी पत्नी अपने बच्चों को सब जगह ढूंढ़ चुके थे मगर वे कहीं नहीं मिले। हम रोने और चीखने लगे। हमें ऐसा लगा कि हमने अपने दोनों बच्चों को खो दिया। क्योंकि आग इतनी ज्यादा थी कि कुछ समझ में नहीं आ रहा था। आग में सब कुछ जला जा रहा था। इसी बीच आप लोगों ने हमारी खबर चलाई फिर हमें यह जानकारी मिली कि हमारे बच्चे जहां आग लगी है उसकी दूसरी तरफ हैं। इन दोनों बच्चों का मिलना हमें नई जिंदगी मिलने के बराबर है।’ यह कहना था रहमान का, जिनके दो बच्चे लापता हो गए थे, जो बाद में सकुशल मिल गए। लखनऊ में 15 अप्रैल बुधवार को शाम 5 बजे भीषण आग लग गई। विकासनगर इलाके में लगी इस आग से 30 से ज्यादा सिलेंडर फट गए। 250 से ज्यादा झुग्गी-झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। करीब 10 किलोमीटर दूर तक धुएं का गुबार देखा गया। आग लगने फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियों ने 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग काबू पाया। इस आग में झोपड़ी में रहने वाले लोगों का सब कुछ जलकर राख हो गया। कई ऐसे परिवार थे जिनके बच्चे कुछ देर के लिए लापता हो गए थे। उनमें से रहमान भी थे जिनके बच्चे समीर और आलिया भी लापता हुए थे। बच्चों के लापता होने के बाद दैनिक भास्कर ने रहमान की बात प्रमुखता से उठाई। बाद में बच्चे मिल गए तो रहमान की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उनसे जब पूछा गया कि हादसे वाले दिन 4 बच्चों के लापता होने की बात क्यों कही थी तो उन्होंने कहा- मैं अपने दोनों बच्चों के इतने दुख में था कि गलती से 4 बच्चे कह दिया होगा। दो बच्चे ही उस समय पता नहीं कहां चले गए थे। 2 तस्वीरें देखिए- ‘डर था कि बच्चे जल न गए हों’ बच्चों के मिलने के बाद रहमान ने बताया कि 2 घंटे बाद हमें पता चला वो दूसरी तरफ है। बेटा 5 साल का रहीम और बेटी 6 साल की आलिया लापता हुए थे। बच्चों के क्या होने की खबर चलने लगी जिसके बाद हमें किसी ने बताया गया कि बच्चे सुरक्षित हैं। आप आकर ले जाइए। बच्चों के लापता होने के बाद हम बिल्कुल बेसुध हो गए थे। बच्चों के लापता होने के बाद हमारी स्थिति बहुत खराब हो गई थी। हम यही सोच रहे थे की कहीं बच्चों जल न गए हो। माहौल से बुरी तरह डरे हुए थे। 4 महीने पहले बड़े बेटे की मौत हुई थी रहमान ने बताया कि अभी 4 महीने पहले ही हमारे बड़े बेटे की बीमारी से मौत हो गई थी जिसकी उम्र 12 साल थी। अगर इन बच्चों को भी कुछ हो जाता तो हम यह सदमा बर्दाश्त न कर पाते। हम इन्हीं के लिए मेहनत मजदूरी करते हैं। अगर यही न होते तो हम क्या करते? आज हमारी सारी पूंजी जलकर राख हो गई मगर उसका इतना अफसोस नहीं है। उससे ज्यादा हमको बच्चों के मिलने की खुशी ज्यादा है। फिलहाल, हम अपना गम भूल गए हैं और बच्चे मिल गए, यही हमारे लिए सब कुछ है। पिता से मिलने के बाद रहीम बोला पुलिस बनना है पिता से मिलने के बाद 5 साल का रहीम भी बेहद खुश था। उसने बताया कि मम्मी-पापा से अलग होने के बाद हम बहुत रो रहे थे। सब लोग उस समय इधर-उधर भाग रहे थे। मगर अब जब पापा मिल गए हैं तो बहुत अच्छा लग रहा है। हमें पुलिस वाले अंकल अच्छे लगते हैं। हम भी पढ़कर बड़े होकर पुलिस बनेंगे। 2 बेटियां जिंदा जल गईं विकासनगर में आग दो बच्चियों की जलकर मौत हो गई थी। उनकी पहचान बाराबंकी के काशी पुरवा के सतीश कुमार ने अपनी बेटियों के रूप में की। बड़ी बेटी श्रुति 2 साल की थी और दूसरी अभी 2 महीने की ही थी। बेटियां जिस जगह पर जलीं, वहां की तस्वीर सामने आई है। यहां पर दोनों के निशान बने हुए हैं। इन निशान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि दोनों बहनें आसपास पड़ी सो रही थीं। पीएम हाउस में दो माह वाली को तो पहचानना मुश्किल था लेकिन बड़ी का शव समझ में आ रहा था। उसकी हड्डियां बाहर आ गई थीं। परिवार ने जैसे ही बच्चियों के शव देखा, बुरी तरह रोने लगे। ऐसी हालत में देखते ही बेसुध हो गए। ----------------------- ये खबर भी पढ़िए- ग्राउंड रिपोर्ट- लखनऊ अग्निकांड- घर जला तो दुल्हन ससुराल नहीं आई : खाली हाथ बारात लेकर पहुंचा दूल्हा, बेबसी की 4 कहानियां... ‘हम लोग शादी की तैयारी कर रहे थे। एक घंटे बाद भतीजे की बारात निकलने वाली थी। मेहमान पहुंच चुके थे। दूल्हे को सजाने की तैयारी चल रही थी। उसे उबटन लगाया जा रहा था। घर की महिलाएं गीत गा रही थीं। अचानक चीख-पुकार मचने लगी। किसी ने चिल्लाकर बताया कि बस्ती में आग लग गई है।’ यह कहते हुए लखनऊ की रानी का गला भर आया। उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। (पूरी रिपोर्ट पढ़िए)
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