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    लखनऊ का गोमती बैराज होगा हाईटेक:कंट्रोल रूम से खुलेंगे बंधे के गेट, 2 गेट बदले; 4 फाटक का काम मई से

    5 hours ago

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    लखनऊ का गोमती बैराज अब पूरी तरह हाईटेक होने जा रहा है। गंगा बैराज की तर्ज पर यहां भी गेट संचालन की मैन्युअल व्यवस्था खत्म कर कंप्यूटराइज्ड सिस्टम लागू करने की तैयारी है। इसके तहत बैराज परिसर में कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जहां से सभी गेटों को एक क्लिक पर खोला और बंद किया जा सकेगा। इस परियोजना पर करीब 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। शासन से मंजूरी मिलते ही काम शुरू होगा। अभी तक बैराज के गेट खोलने और बंद करने की प्रक्रिया पूरी तरह मैन्युअल है। ऑपरेटर को प्लेटफार्म पर चढ़कर एक-एक गेट को खोलना पड़ता है। इसमें समय अधिक लगता है। जोखिम भी बना रहता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी गेटों की मोटरों को एक केंद्रीकृत सिस्टम से जोड़ दिया जाएगा। इससे ऑपरेटर को गेट तक जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। कंट्रोल रूम से ही पूरा संचालन हो सकेगा। मई से शुरू होगा गेट बदलने का काम इसी के साथ बैराज के पुराने और जर्जर गेटों को बदलने का काम भी तेज किया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अनुसार, गोमती बैराज पर लगे 9 गेट अपनी उम्र पूरी कर चुके हैं। इनमें से 2 गेट बदले जाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब 4 और गेट बदलने की मंजूरी मिल गई है। इसके लिए शारदा सहायक खंड को बरेली स्टोर से जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने की स्वीकृति मिल चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक, इन गेटों को बदलने का काम मई माह से शुरू किया जाएगा। इस पर करीब 5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। गेट बदलने के बाद बैराज के केवल एक गेट को छोड़कर बाकी सभी गेट नए और पूरी तरह कार्यशील हो जाएंगे। इससे जलस्तर नियंत्रण की क्षमता बेहतर होगी और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित निर्णय लेना आसान होगा। बाढ़ प्रबंधन में मिलेगा फायदा विशेषज्ञों का मानना है कि कंप्यूटराइजेशन और गेटों के नवीनीकरण से गोमती नदी के जल प्रबंधन में बड़ा सुधार होगा। खासतौर पर बरसात के मौसम में अचानक जलस्तर बढ़ने पर गेट तुरंत खोले जा सकेंगे, जिससे शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या कम होगी। नई तकनीक के इस्तेमाल से बैराज की निगरानी भी अधिक सटीक हो जाएगी। कुल मिलाकर, गोमती बैराज का यह आधुनिकीकरण लखनऊ के लिए बड़ी राहत और आधुनिक जल प्रबंधन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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