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    लखनऊ में ‘कॉटनफैब-2026’ प्रदर्शनी:26 राज्यों की झलक, स्वदेशी कला और स्वाद का संगम

    3 hours ago

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    लखनऊ के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में 15 अप्रैल से 11 मई तक राष्ट्रीय स्तर की हस्तशिल्प और हथकरघा प्रदर्शनी ‘कॉटनफैब-2026’ आयोजित की जा रही है। केंद्र सरकार की नेशनल हस्तशिल्प विकास योजना और राज्य सरकार की ओडीओपी योजना के तहत इसका आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी के माध्यम से स्वदेशी कला और कारीगरों को एक नया मंच मिल रहा है। प्रदर्शनी में देशभर के 26 राज्यों से 150 स्टॉल लगाई गई है। बनारस की जामदानी, चंदेरी और महेश्वरी प्रिंट, भागलपुरी सिल्क, कोटा डोरिया, कच्छ की अजरक, पंजाब की फुलकारी से लेकर असम की मूगा सिल्क तक हर राज्य की खासियत यहां देखने को मिल रही है। पारंपरिक डिजाइन को आधुनिक फैशन के साथ पेश किया गया है। यहां कपड़ों के साथ-साथ आर्टिफिशियल ज्वेलरी और सजावटी सामान भी लोगों को लुभा रहे हैं। खास बात यह है कि सभी उत्पाद वाजिब कीमत पर उपलब्ध हैं। कारीगर बताते हैं कि कपड़ों में प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है, जिससे न सिर्फ सुंदरता बढ़ती है बल्कि पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। प्रदर्शनी में प्रतापगढ़ से आए सर्वेश मिश्रा अपने खास आंवला उत्पादों के कारण चर्चा में हैं। बिना चीनी और बिना केमिकल के तैयार किए गए उनके प्रोडक्ट्स सेहत के प्रति जागरूक लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। आंवला कैंडी, मुरब्बा और सिरका जैसे उत्पादों को लोग हाथों-हाथ खरीद रहे हैं। बांस का मुरब्बा लोगों को खास पसंद वहीं बिहार के सुल्तान नवाज अपने पारंपरिक अचार और मुरब्बों से स्वाद का तड़का लगा रहे हैं। बांस का मुरब्बा और राजस्थानी कैर-सांगरी का अचार लोगों को खास पसंद आ रहा है। उनका कहना है कि पारंपरिक स्वाद ही उनकी पहचान है, जो ग्राहकों को बार-बार खींच लाता है। प्रयागराज के अनीश शेख अपने नमकीन की 35 से ज्यादा वैरायटी के साथ लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। मूंग दाल की ड्राई कचौरी, भेलपुरी और हींग चना जैसे प्रोडक्ट्स का स्वाद चखने के बाद ग्राहक खरीदारी से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं। गर्मी के मौसम में हल्के कॉटन कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा बनारस के बुनकर इमरान पारंपरिक बुनाई की विरासत को जीवित रखे हुए हैं। उनके स्टॉल पर मलमल, सिल्क और कॉटन के कपड़ों की बड़ी रेंज उपलब्ध है। गर्मी के मौसम में हल्के कॉटन कपड़ों की मांग सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। केरल से आए नितिन अपने खास हलवे, बनाना चिप्स और आयुर्वेदिक गुड़ के साथ लोगों को दक्षिण भारत का स्वाद चखा रहे हैं। पाइनएप्पल और नारियल हलवा यहां खास आकर्षण बना हुआ है। वहीं असम से आए कारीगर अपनी मेखला चादर और सिल्क साड़ियों के जरिए पूर्वोत्तर की संस्कृति की झलक पेश कर रहे हैं। मधुबनी प्रिंट की साड़ियों की मांग बिहार के भागलपुर से आए साकिब का ‘मटका सिल्क’ इस बार खास आकर्षण बना हुआ है। उनके स्टॉल पर मधुबनी प्रिंट की साड़ियों और सूट की सबसे ज्यादा मांग देखने को मिल रही है। साकिब बताते हैं कि सभी प्रोडक्ट हाथ से तैयार होते हैं, यही वजह है कि उनकी क्वालिटी और फिनिशिंग ग्राहकों को खास पसंद आ रही है। वहीं तमिलनाडु के कांचीपुरम से आए बुनकर हरी अपने सिल्क कलेक्शन से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। उनके पास 800 से 2500 रुपए तक के सूट और 48 डिजाइन व 24 रंगों की वैरायटी उपलब्ध है। हरी का कहना है कि खादी सिल्क के सूट आजकल सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं और हर बजट के ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद हैं। तांत की साड़ियां महिलाओं की पहली पसंद पश्चिम बंगाल से आए व्यापारी शरीफुल मुल्ला के स्टॉल पर कांथा वर्क और तांत साड़ियां महिलाओं की पहली पसंद बनी हुई हैं। 1 हजार से 8 हजार रुपए तक की रेंज में उपलब्ध इन साड़ियों में हैंडलूम की खूबसूरती साफ नजर आती है। राजस्थान के अजमेर से आए कलाकार दामोदर कुमावत अपने मेटल और वुडन आर्ट से प्रदर्शनी में अलग पहचान बना रहे हैं। 35 साल के अनुभव के साथ वे हाथ से बने होम डेकोर आइटम पेश कर रहे हैं, जिनमें म्यूजिशियन आकृतियां, वॉल हैंगिंग और लकड़ी के सजावटी सामान शामिल हैं। खास बात यह है कि ये प्रोडक्ट टिकाऊ होने के साथ घर के अंदर और बाहर दोनों जगह इस्तेमाल किए जा सकते हैं। क्वालिटी और फिनिशिंग ग्राहकों को खास पसंद बिहार के भागलपुर से आए साकिब का ‘मटका सिल्क’ इस बार खास आकर्षण बना हुआ है। उनके स्टॉल पर मधुबनी प्रिंट की साड़ियों और सूट की सबसे ज्यादा मांग देखने को मिल रही है। साकिब बताते हैं कि सभी प्रोडक्ट हाथ से तैयार होते हैं, यही वजह है कि उनकी क्वालिटी और फिनिशिंग ग्राहकों को खास पसंद आ रही है। 48 डिजाइन व 24 रंगों की वैरायटी उपलब्ध वहीं तमिलनाडु के कांचीपुरम से आए बुनकर हरी अपने सिल्क कलेक्शन से लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। उनके पास 800 से 2500 रुपए तक के सूट और 48 डिजाइन व 24 रंगों की वैरायटी उपलब्ध है। हरी का कहना है कि खादी सिल्क के सूट आजकल सबसे ज्यादा ट्रेंड में हैं और हर बजट के ग्राहकों के लिए विकल्प मौजूद हैं। ममता बनर्जी पहनती है तांत की साड़ियां शरीफुल ने बताया कि इस समय सबसे ज्यादा डिमांड कलकत्ता कॉटन और तांत साड़ियों की है। वहीं, हाथ से कढ़ाई की गई कांथा वर्क साड़ियाँ भी महिलाओं को खूब पसंद आ रही हैं। उनके पास करीब 14 से 15 तरह के अलग-अलग कपड़ों की वैरायटी मौजूद है, जिससे ग्राहकों को कई विकल्प मिल जाते हैं। बंगाल की साड़ियों की लोकप्रियता पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि ममता बनर्जी भी अक्सर तांत कॉटन की साड़ियांं पहनती नजर आती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सीधे तौर पर साड़ियांं सप्लाई नहीं करते, लेकिन जिन सप्लायर्स से वे माल लेते हैं, उनके जरिए ममता बनर्जी तक साड़ियांं पहुंचती हैं। हाथ से बने होम डेकोर आइटम पेश कर रहे राजस्थान के अजमेर से आए कलाकार दामोदर कुमावत अपने मेटल और वुडन आर्ट से प्रदर्शनी में अलग पहचान बना रहे हैं। 35 साल के अनुभव के साथ वे हाथ से बने होम डेकोर आइटम पेश कर रहे हैं, जिनमें म्यूजिशियन आकृतियां, वॉल हैंगिंग और लकड़ी के सजावटी सामान शामिल हैं। खास बात यह है कि ये प्रोडक्ट टिकाऊ होने के साथ घर के अंदर और बाहर दोनों जगह इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
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