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    लेम्बोर्गिनी कांड- ज्योतिष बोले- कार का अंक डेथ वाला:शिवम मिश्रा की सभी गाड़ियों का एक ही नंबर, कर्मचारी नेता ने कहा- DL सस्पेंड हो

    7 hours ago

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    कानपुर के लेम्बोर्गिनी केस के आरोपी शिवम मिश्रा को कोर्ट से जमानत मिल गई। लेकिन इस केस में ज्योतिषीय एंगल की एंट्री हो गई है। ज्योतिषाचार्य शिवम मिश्रा की कार के नंबर को लेकर अपने तर्क दे रहे हैं। वहीं कुछ लोग उसकी हेल्थ की कंडीशन को लेकर चर्चा कर रहे हैं। ज्योतिषाचार्य ने शिवम मिश्रा के कार नंबर के जोड़- 13 को खतरनाक बताया। कहा कि ये नंबर डेथ वाला है। बर्बादी का नंबर है। एक कर्मचारी नेता ने आरोपी शिवम मिश्रा को दौरा पड़ने वाली बात को लेकर आरटीओ में एप्लीकेशन देकर लाइसेंस सस्पेंड करने की मांग की है। आरोपी शिवम मिश्रा और उसकी कार के नंबर को लेकर लोगों ने क्या-क्या कहा? वो पढ़िए- शिवम की गाड़ियों का नंबर डेथ और तबाही वाला कानपुर के ज्योतिषाचार्य आदित्य पांडेय ने सोशल मीडिया पर लेम्बोर्गिनी केस पर अपना एक वीडियो जारी किया है। वीडियो में ज्योतिषाचार्य कह रहे हैं कि शिवम मिश्रा की सभी गाड़ियों का नंबर 4013 है। अंक ज्योतिष के मुताबिक शिवम की गाड़ियों के नंबर का योग 13 है। अंक ज्योतिष में अंक-13 को अलार्मिंग नंबर मानते हैं। 13 नंबर डेथ का होता है। इसे डिजास्टर का नंबर भी माना जाता है। जन्म के मामले में यह अंक खराब नहीं होता है। लेकिन गाड़ियों के मामले में यह नंबर बेहद खराब माना जाता है। जिनके पास ऐसे नंबर होते हैं उनके जीवन में बहुत उठापटक होती है। वह व्यक्ति अचानक से ऊपर उठता है तो तेजी से नीचे भी गिर जाता है। अंक-13 राहू का, सपोर्ट में मिलने पर सफलता मिलती ऐसे नंबर रखने वालों के जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं जो सामाजिक रूप से उनकी पद और प्रतिष्ठा को बुरी तरह से गिरा देती हैं। उन्होंने 13 अंक के नंबर वाली गाड़ी रखने वाले इरफान सोलंकी का भी उदाहरण दिया। कहा कि विधायक की गाड़ियों का भी अंक 13 ही है। 13 नंबर सफलता और असफलता के एक्सट्रीम का है। क्योंकि ये नंबर राहु का है। अगर राहु किसी को सपोर्ट कर देता है तो उसे सफलता के शिखर पर पहुंचने से कोई रोक नहीं सकता है। अगर यही राहु खिलाफ हो जाता है तो बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ता है। ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की मांग ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी) के जनरल सेकेट्री कानपुर ने RTO को इस पूरे मामले का संज्ञान लेने के लिए एक प्रार्थना पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने लेम्बोर्गिनी केस के आरोपी शिवम मिश्रा का ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड करने की मांग की है। उनका कहना है कि शिवम मिश्रा के पास लेम्बोर्गिनी जैसी कई हाई स्पीड गाड़ियां हैं। शिवम के पिता व ड्राइवर ने तबियत बिगड़ने व दौरा पड़ने की बात कही थी। उन्होंने मांग की है कि शिवम का ड्राइविंग लाइसेंस तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया जाना चाहिए। अगर ड्राइविंग लाइसेंस सस्पेंड नहीं हुआ तो फिर से किसी का जीवन खतरे में पड़ेगा। RJ पूरब ने 53 सेकंड के वीडियो में तंज कसा आरजे पूरब ने एक 53 सेकेंड का वीडियो बनाया है। इसमें रेडियो जॉकी पूरब ग्वालटोली थाने के भीतर से किसी से फोन पर बात करते हुए निकल रहे हैं। इस दौरान थाने के बाहर मौजूद एक मीडिया कर्मी ने उनसे पूछा कि ये लेम्बोर्गिनी वाला केस आपके सामने हुआ है क्या…? इस पर पूरब ने कहा कि हां मेरे सामने, आंखों के सामने हुआ और हम ही अभी अंदर गवाही देकर आ रहे हैं। पूरब से फिर मीडिया कर्मी ने सवाल किया कि आपने देखा कि अंदर कौन था…? इस पर पूरब ने कहा कि हां मैंने देखा कि अंदर कौन था नाम बताइए…। इतने में ही पूरब के फोन पे यूपीआई एप पर 100 रुपए प्राप्त होने का मैसेज आता है। इसके बाद पूरब ने इधर-उधर बात घुमाते हुए कहा कि नाम अज्ञात था। इतनी ही देर में पूरब को फिर से 120 रुपए यूपीआई एप पर प्राप्त होते हैं। रुपए मिलने के बाद पूरब का रुख पूरी तरह से बदल जाता है और पूरब ने कहा कि अंदर कोई नहीं था, वो टार्जन वाली कार थी, अंदर कोई नहीं था और पूरी गाड़ी खाली थी। पत्रकार पीयूष ने भी कसा तंज, कहा- ड्राइवर की खरीद लिया सोशल मीडिया पर पत्रकार पीयूष राय ने वीडियो बनाकर तंज कसा। वीडियो में वह कह रहे हैं कि लेम्बोर्गिनी वाले साहब अरेस्ट हो गए हैं। जज साहब उन्हें निबंध लिखने को कहते हैं। तो मामला तैयार है, जरा गौर फरामाइएगा। प्रिय जज साहब महोदय, मुझे निबंध लिखने का आदेश देने का जो आपको सौभाग्य मिला है, उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। निबंध के शुरूआत में मैं आदेश देता हूं कि इन पुलिसवालों की गाड़ियां बदल दें। क्योंकि ये बेहद कष्टदायक हैं। इन्हें लेम्बोर्गिनी नहीं तो मर्सडीज तो दे ही सकते हैं। इन लोगों ने मेरी जो मदद की है, उसके बदले में मैं इतनी मदद तो कर ही सकता हूं। अभी मैं आपकी कोर्ट पहुंचा तो पार्किंग देखकर मुझे हंसी आ रही थी। अगर मैं कभी कोर्ट आऊंगा तो मुझे अपनी लेम्बोर्गिनी इन सस्ती गाड़ियों के बीच खड़ी करनी होगी। कृपया लेम्बोर्गिनी और फरारी के लिए अलग व्यवथा आप अपने कोर्ट में करें। अगर पैसे की जरूरत पड़े तो मेरे पिता जी से संपर्क करें। पिछले चार दिनों में उन्होंने पता नहीं किस किसको खरीद लिया है। ये काले कोट वाले जो मेरे साथ दिख रहे हैं। इन्होंने तो पूरा का पूरा ड्राइवर ही खरीद लिया है। पता नहीं मोहन को कहां से ले आए। मगर मोहन ने जो बलिदन दिया है। उसे मैं कभी नहीं भूलूंंगा। उसे तराजू में बैठा कर नोटों से तौलूंगा। जज साहब मेरी लेम्बोर्गिनी से टकरा लोग पवित्र हो गए। घायल लोग जितना कमाते हैं, उतना तो मेरी गाड़ी का पेंट छूट गया है। चलिए अंत में मैं माफी मांग…अरे जज साहब ये क्या कर रहे हैं। अमीर घर के लड़के ये सब करते हुए शोभा नहीं देते हैं। बाकी आप समझदार हैं। मिलते रहेंगे। आपका शिवम मिश्रा। अब विस्तार से पूरा मामला पढ़िए- 8 फरवरी को लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को टक्कर मारी थी कानपुर में वीआईपी रोड इलाके पर 8 फरवरी को करीब 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को टक्कर मार दी थी। कार आर्यनगर में रहने वाले कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। हादसे के बाद पुलिस कार को थाने ले आई। कवर से ढक दिया था। पहले तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। मामला सुर्खियों में आया तो 6 घंटे बाद रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मामले को तूल दिया। फिर सीएम योगी ने कार्रवाई के आदेश दिए। तब पुलिस ने 24 घंटे बाद शिवम का नाम FIR में जोड़ा। 10 फरवरी को कारोबारी केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे थे। दावा किया था कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई थी। 11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ था। हादसे में घायल और FIR कराने वाले मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया था। कारोबारी के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया था, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है। वह पूरी तरह संतुष्ट है और कोई कार्रवाई नहीं चाहता। पीड़ित ने यह भी दावा किया था कि हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, DCP अतुल कुमार ने इस बात से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस को किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं मिला। 11 फरवरी को ड्राइवर मोहन कोर्ट पहुंचा 11 फरवरी की ही दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की ओर से ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो कार से निकल गया था। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर की अर्जी खारिज कर दी। उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कोर्ट में जब मोहन से मीडिया ने पूछा कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं। जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं। गुरुवार को पुलिस ने शिवम मिश्रा को गुरुवार सुबह 8 बजे घर के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहा। गुरुवार को सूचना मिली कि आरोपी एंबुलेंस से भाग रहा है। खुद को छिपाए रखने के आधार पर उसे गिरफ्तार किया। कोर्ट से आरोपी 7 घंटे में रिहा हो गया इसके बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया। जहां से वह 7 घंटे में ही रिहा हो गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। तंबाकू कारोबारी ने बेटे को बचाने की कई कोशिशें कीं तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नाकाम रहे। केके मिश्रा ने 8 फरवरी को हादसे के तुरंत बाद पहले बेटे को घटनास्थल से हटवाया। फिर मीडिया से बातचीत में दावा किया कि मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। यही नहीं, मामले ने जब तूल पकड़ा तो सीएम योगी ने अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल सामने आए। कहा कि गाड़ी कारोबारी का बेटा शिवम ही चला रहा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई। कमिश्नर के इस बयान पर केके मिश्रा भड़क गए थे। कहा था कि कानपुर कमिश्नर झूठ बोल रहे। फिर बुधवार (11 फरवरी) को कानपुर कोर्ट में मोहन नाम का शख्स सरेंडर करने पहुंचा। उसने दावा किया कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी। उसे लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी नहीं माना। कारोबारी की कंपनी पर 2 साल पहले पड़ा था छापा तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी है। यह कंपनी कानपुर की टॉप गुटखा कंपनियों को तंबाकू सप्लाई करती है। करीब 2 साल पहले 28 फरवरी को कंपनी के हेड ऑफिस पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था। तब केके मिश्रा की दिल्ली स्थित कोठी से 100 करोड़ से ज्यादा की कारें मिली थीं। इनमें 60 करोड़ से ज्यादा कीमत की लग्जरी कारें शामिल थीं। 16 करोड़ की रोल्स-रॉयस फैंटम कार, लेम्बोर्गिनी, फरारी, मॅकलारेन कारें थीं। तब छापेमारी में 100 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी सामने आई थी। दरअसल, शिवम मिश्रा भी लग्जरी कारों का शौकीन है। उसके पास कई कारें हैं। शिवम ने अपने बेटे के बर्थडे सेलिब्रेशन में बॉलीवुड के कई अभिनेताओं को बुलाया था। पार्टी में करोड़ों रुपए खर्च किए थे। इसके बाद ही वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर आ गया था।
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