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    मां की चिता के बगल में बेटियां दफन:कानपुर में जहर खाया, मां से बोली थी- बेटियां बेसहारा न हो, इसलिए साथ लेकर मरूंगी

    9 hours ago

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    महाराजपुर में जहरीला पदार्थ खाकर जान देने वाली महिला और उसकी दो बेटियों के शव का बुधवार को पोस्टमार्टम किया गया। रिपोर्ट में जहरीला पदार्थ खाने से मौत की पुष्टि हुई। इस दौरान परिजनों ने बताया कि चांदनी को मायके में बैठ कर रोटियां तोड़ने का अक्सर ताना दिया जाता था। इसी से परेशान होकर उसने यह कदम उठाया। चांदनी की मां ने पुलिस को बताया कि बेटी ने करीब एक माह पहले कहा था कि मैं जिस दिन मरूंगी, अपनी बेटियों को साथ लेकर मरूंगी। उसका कहना था कि, पिता पहले ही बच्चियों को छोड़ चुका है, मेरे जाने के बाद बेटियां बेसहारा हो जाएंगी। इसके चलते उसने पहले बेटियों को जहर खिलाया, फिर खुद जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी। पोस्टमार्टम के बाद मां-बेटियों का अंतिम संस्कार नजफगढ़ घाट पर किया गया। जहां मां की चिता के पास ही में ही दोनों बेटियों को दफनाया गया। 3 तस्वीर देखिए… अब जानिए क्या था पूरा मामला… गुजरात में मजदूरी करने वाले नजफगढ़ निवासी रामपाल पासवान की 33 वर्षीय बेटी चांदनी की शादी 12 साल पहले मैनपुरी के करहल के नगला सीताराम का पुरवा निवासी राकेश से हुई थी। चांदनी की दो बेटियां पायल (7) व ब्यूटी (5) थीं। भाई धर्मेंद्र और जितेंद्र ने बताया कि जीजा राकेश शराब का लती था, शादी के बाद आए दिन शराब पीकर बहन के साथ मारपीट करता था। जिससे तंग आकर पांच साल पहले वह मायके रहने चली आई थी। वह यहां मां के साथ रहने लगी। मजदूरी करके अपना और दोनों बेटियों का भरन-पोषण करने लगी। पंचायत के बाद पति से तलाक हुआ 2 साल पहले गांव में हुई पंचायत में राकेश और चांदनी ने अलग-अलग जिंदगी गुजारने का फैसला लिया था। जिसके बाद से चांदनी अपनी बेटियों के साथ मायके में रह रही थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक मंगलवार सुबह चांदनी का अपनी भाभी से झगड़ा हुआ था, जिस पर उसने तीन साल से मायके में बैठकर रोटियां तोड़ने का उलाहना दिया, जिससे परेशान होकर चांदनी ने बेटियों को जहरीला पदार्थ खिलाकर खुद जान दे दी थी। घटना के बाद पुलिस घर पहुंची तो देखा की मिट्‌टी के चूल्हे के पास लकड़ियां और माचिस रखी थी। पास में ही कटी हुई सब्जी और मसाले रखे हुए थे। जिसे देख कर अनुमान लगाया जा रहा है कि चांदनी सब्जी बनाने जा रही थी। मां शांति देवी ने बताया कि घटना के समय वह खेतों में गई हुई थी। परिजनों ने बताया कि चांदनी बेटियों को मेहनत-मजदूरी करके पढ़ाना चाहती थी, वह कहती थी कि उसकी जिंदगी में जो कुछ भी हुआ, वो बेटियों को न झेलना पड़े। इसलिए वह खेतों में मजदूरी करती थी। पायल गांव के ही प्राइवेट स्कूल में कक्षा तीन व ब्यूटी कक्षा एक की छात्रा थी।
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