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    मेडिकल कालेज में डॉक्टर-कर्मचारी आमने-सामने:मरीजों के तीमारदार घबराए; देर रात तक नहीं दर्ज हो सकी थी FIR

    2 hours ago

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    बीआरडी मेडिकल कालेज में जूनियर डॉक्टर व नर्सिंग स्टाफ आमने-सामने आ गए हैं। मामला तीन पुरुष नर्सिंग कर्मचारियों की पिटाई से बिगड़ा। उसके बाद पूरे दिन वहां खींचतान मची है। कर्मचारी मेडिकल कालेज प्रशासन पर आरोपी डॉकटरों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। अब वे कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी में हैं। हालांकि गुरुवार की देर रात तक इस मामले में FIR दर्ज नहीं हो सकी थी। देर रात तक एक ओर जूनियर डॉक्टर व उनके समर्थन में एमबीबीएस के छात्र खड़े थे तो दूसरी ओर कर्मचारी डटे थे। कर्मचारी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे में मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों के तीमारदार घबराए हैं। इस तनावपूर्ण माहौल का अभी कोई हल नहीं निकल पाया है। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि दिन में इंटर्न डॉक्टरों ने आन ड्यूटी कर्मचारियों के साथ मारपीट की थी। उनका कहना है कि दोपहर करीब 2 बजे सर्जरी विभाग का एक इंटर्न डॉक्टर ट्रॉमा वार्ड में इंजेक्शन लेने पहुंचा। वह एक साथ पूरा पैकेट ले जाने लगा। ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ ने उसे रोका और कहा कि जितनी जरूरत हो उतनी ही दवा ले जाए, क्योंकि सभी दवाओं का रिकॉर्ड वार्ड में दर्ज किया जाता है। कर्मचारियों का कहना है कि बिना एंट्री के दवा ले जाने से हिसाब गड़बड़ा जाता है और बाद में जिम्मेदारी तय करना मुश्किल हो जाता है। इसी बात को लेकर बहस शुरू हुई। बहस हाथापायी में बदल गई। नर्सिंग स्टाफ का आरोप है कि इसके बाद इंटर्न डॉक्टर वहां से चला गया और डेढ़ दर्जन से अधिक साथियों के साथ दोबारा वहां पहुंचा। नर्सिंग स्टाफ संतोष मसीह, शिवम मिश्रा और जय प्रकाश को पीटा गया। यह घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है। जानिए रात में क्या हुआ दिन में हुई मारपीट की घटना के बाद नर्सिंग स्टाफ कार्रवाई को लेकर मेडिकल कालेज प्रशासन के सामने अपनी मांग रखने लगे। लेकिन उनका आरोप है कि देर शाम तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद नर्सिंग स्टाफ ने पुलिस में रिपोर्ट कराने का मन बनाया। देर रात तक रिपोर्ट भी नहीं लिखी गई थी। इधर इंटर्न डॉक्टरों के सहयोग में एमबीबीएस के छात्र भी आ गए। देर रात तक एक ओर डॉक्टर खड़े थे तो दूसरी ओर नर्सिंग स्टाफ। दोनों पक्षों को संभालने में पुलिस को पसीना छूट रहा था। दोनों पक्षों से एक-दूसरे से बहस जारी थी। पुलिस उनके बीच खड़ी रही और समझाने-बुझाने का प्रयास जारी रहा। कर्मचारियों का कहना है कि जूनियर डॉक्टर आए दिन तीमारदारों के साथ भी मारपीट करते हैं। कर्मचारियों से अभद्रता से पेश आते हैं। इस बार पानी सिर के ऊपर हो गया है। दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब जानिए मरीजों का क्या हो रहा मेडिकल कालेज में भर्ती मरीजों की देखभाल व इलाज में नर्सिंग कर्मचारियों एवं जूनियर डॉक्टरों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है। लेकिन गुरुवार की घटना ने मेडिकल कालेज का माहौल तनावपूर्ण हो चला है। वहां भर्ती मरीजों के तीमारदार भी परेशान हैं। आसानी से उन्हें न तो डॉक्टर मिल रहे हैं और न ही नर्सिंग स्टाफ। हालांकि दोनों पक्षों का दावा है कि उनकी ओर से मरीजों की देखभाल हो रही है।
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