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    महोबा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन:8 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा

    6 hours ago

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    महोबा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अल्प मानदेय और बढ़ते शोषण के खिलाफ प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष आसमीन खातून के नेतृत्व में बड़ी संख्या में महिला कर्मियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारी आंगनवाड़ी कर्मियों का कहना है कि वे देश के नौनिहालों का भविष्य गढ़ने का काम करती हैं, लेकिन खुद अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित महसूस कर रही हैं। वे खुद को 'श्रमिक' के बजाय केवल 'मानसेवी' माने जाने वाली व्यवस्था के खिलाफ खड़ी हैं। आंगनबाड़ी कर्मचारी एवं सहायिका एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष आसमीन खातून ने स्पष्ट किया कि वे अब 'बंधुआ मजदूरों' जैसी स्थिति में काम नहीं करेंगी। उनकी सबसे बड़ी पीड़ा अत्यंत कम मानदेय है। वर्तमान में कार्यकर्ताओं को मात्र 4,500 रुपए और सहायिकाओं को 2,250 रुपए प्रति माह दिए जाते हैं, जिसमें पिछले सात वर्षों से कोई वृद्धि नहीं हुई है, जबकि महंगाई लगातार बढ़ रही है। इन महिला कर्मियों की प्रमुख मांगों में उन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाना और न्यूनतम वेतन 24,000 रुपए प्रति माह सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्ष 2022 के फैसले का हवाला देते हुए ग्रेच्युटी के भुगतान और पेंशन सुविधा की भी पुरजोर मांग की है। तकनीक के नाम पर होने वाले मानसिक शोषण का मुद्दा भी उठाया गया। कार्यकर्ताओं ने 'फेस रिकॉग्निशन' प्रणाली (फेस कैप्चर) को तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने पोषण ट्रैकर पर काम करने के लिए 5G मोबाइल सेट और सालाना 5,000 रुपए रिचार्ज के लिए उपलब्ध कराने की भी मांग की, ताकि डिजिटल कार्य में बाधा न आए। अन्य मांगों में सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता और लाभार्थियों के पोषण आहार में तीन गुना वृद्धि शामिल है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का तर्क है कि वे सरकार की प्रत्यक्ष कर्मचारी हैं, स्वयंसेवी नहीं। इसलिए, नई शिक्षा नीति के तहत उन्हें नर्सरी टीचर के रूप में नियमित करना न्यायसंगत होगा। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन और केंद्र सरकार इन 'भावी कर्णधारों' को तैयार करने वाली महिलाओं की मांगों पर ध्यान देती है या इनका संघर्ष और बड़ा रूप लेगा।​इस मौके पर राजकुमारी, दीप्ति राजपूत, उषा कुशवाहा, प्रीतिदेवी, सावित्री, चंद्रप्रथा आदि आंगनवाड़ी महिला कार्यकर्ता मौजूद रही।
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