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    ‘मुझे मारना है तो AK-47 से 200 गोलियां चलानी होंगी’:यति नरसिंहानंद बोले- सलीम वास्तिक की तरह कोई गला नहीं काट सकता

    2 hours ago

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    गाजियाबाद में डासना मंदिर के प्रमुख और श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी आतंकी संगठनों के निशाने पर हैं। 12 मार्च को गाजियाबाद की मसूरी पुलिस ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े सावेज उर्फ जिहादी समेत 6 लोगों को अरेस्ट किया। वॉट्सऐप चैट और पूछताछ से पता चला है कि यति नरसिंहानंद गिरी आतंकियों की हिट लिस्ट में हैं। महामंडलेश्वर खुद भी मानते हैं कि उनकी जान को खतरा है। उन्होंने कहा, मैं तो लगातार निशाने पर हूं ही, पूर्व में भी मंदिर के बाहर से संदिग्ध लोग पकड़े गए। मैं सच बोलता हूं और जो कुरान में लिखा है, वही बोलता हूं। इसलिए मुझे जान का खतरा है। ‘दैनिक भास्कर’ से खास बातचीत में यति नरसिंहानंद गिरी ने कहा- ‘मुझे मारना है तो AK-47 से 200 गोलियां चलानी होंगी। मेरे मरने की तारीख मां और महादेव ने तय कर रखी है।’ पूरा इंटरव्यू पढ़ने से पहले यति नरसिंहानंद गिरी की सुरक्षा के बारे में जानिए… आधार कार्ड चेक करने के बाद ही मंदिर परिसर में एंट्री गाजियाबाद में दिल्ली- लखनऊ एक्सप्रेस वे पर डासना कस्बे में प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर में यति नरसिंहानंद गिरी अपने शिष्यों के साथ रहते हैं। मंदिर के गेट पर पुलिस और पीएसी की पिकेट रहती है। यहां किसी भी मुस्लिम व्यक्ति की एंट्री नहीं है। गेट पर तैनात पुलिसकर्मी यहां आने वालों के आधार कार्ड चेक करते हैं, मोबाइल नंबर नोट करते हैं। यहां क्यों आए हैं, महामंडलेश्वर से क्यों मिलना चाहते हैं? पूरा वैरिफिकेशन करने के बाद तलाशी लेते हैं कि कोई शस्त्र या धारदार हथियार तो नहीं है। उसके बाद मंदिर परिसर में फिर पुलिस जांच करती है। फिर अंदर से महामंडलेश्वर के निजी सुरक्षाकर्मी आकर मिलने आने वाले को अंदर ले जाते हैं। बाहर लोहे के बड़े गेट हैं, यह अंदर और बाहर से लॉक रहते हैं। 4 लेयर में यति की सुरक्षा है। साथ में रिवाल्वर और बुलेट की बेल्ट गले में पहनते हैं यति नरसिंहानंद गिरी के पास अपना शस्त्र लाइसेंस है। वह रिवाल्वर साथ रखते हैं, यही नहीं बुलेट (गोलियों) की पूरी बेल्ट अपने गले में डालकर रखते हैं। पास में कई सुरक्षाकर्मी राइफल और दूसरे शस्त्रों के साथ रहते हैं। एक समय में 2 या 3 आदमी ही मिल सकते हैं, मिलने के वक्त बाहर और अंदर से दरवाजे लॉक किए जाते हैं। निजी सुरक्षाकर्मी पूरी नजर रखते हैं कि जो मिल रहा है, उसकी गतिविधियां कैसी हैं? अब यति नरसिंहानंद गिरी से पूरी बातचीत पढ़िए… सवाल: क्या आपको किसी गैंग से खतरा है? जवाब: हां, मुझे खतरा है। और मेरे लिए ये कोई नई बात नहीं है। जितने भी आतंकी पकड़े जाते हैं, उनके निशाने पर मैं ही रहता हूं। मसूरी पुलिस ने देश विरोधी गतिविधियों में जिन 6 लोगों को पकड़ा है, उनके सबसे ज्यादा निशाने पर मैं ही था। मुझे पुलिस और मीडिया से पता चला है कि जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े लोग पकड़े गए हैं, वह मुझे मारना चाहते थे। आतंकवादियों का कर्तव्य है कि वह मुझे मारें। सवाल: आप हमेशा चर्चा में रहते हैं? जवाब: मैं चर्चा में इसलिए रहता हूं, क्योंकि मैं देश में अकेला सच बोलता हूं। अब कुछ लोग सच बोलने लगे हैं। सलीम वास्तिक (एक्स मुस्लिम) भी सच बोल रहे थे, उन पर हमला हुआ। उनकी गर्दन काटी गई। मां और महादेव की कृपा है कि वह भी बच गए। सच को लोग आश्चर्य के साथ देखते हैं। मैं जो बात बोलता हूं, वह मुसलमानों की कुरानों में लिखी हुई होती है। एक भी बात मनगढ़ंत नहीं कहता। मैं उन्हीं बातों को करता हूं। सवाल: सलीम वास्तिक पर हमला करने वाले दोनों हमलावर मारे गए, क्या कहेंगे? जवाब: गाजियाबाद पुलिस को बहुत-बहुत आभार है, धन्यवाद है। सीएम योगी के समय में अपराध कम हुआ है। विशेष रुप से हम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हैं। सवाल: सलीम की सुरक्षा की लड़ाई कैसे लड़ेंगे? जवाब: सलीम वास्तिक की जान बच गई है। हम उनकी सुरक्षा की लड़ाई लड़ेंगे। उन्हें शस्त्र लाइसेंस देने की मांग करेंगे। सरकारी सुरक्षा की भी मांग करेंगे। मां और महादेव की कृपा से वह बच गए हैं। सवाल: क्या आप पुलिस सुरक्षा से संतुष्ट हैं? जवाब: मैं पुलिस की सुरक्षा से संतुष्ट नहीं हूं। जिस तरह से मुझे धमकी मिल रही हैं, उससे मैं संतुष्ट नहीं हूं। मैं बहुत बुरी तरह असंतुष्ट हूं। मैं एक धर्म प्रचारक हूं, मैं जगह-जगह घूमता रहता हूं, मेरी सुरक्षा के कोई खास इंतजाम नहीं हैं, मेरे पास बहुत कम सुरक्षा है। सवाल: जो लोग पकड़े गए हैं, क्या विदेशी फंडिंग हुई? जवाब: विदेशी फंडिंग के लोग ही यह पकड़े गए हैं। यहां बहुत बड़ा इनका आधार है। दारुल उलूम देवबंद जैसे संगठन, बड़े जमीयत उलेमा ए हिंद जैसे संगठन अपराधियों को पालते हैं और हम जैसे लोगों की हत्या करने के लिए छोड़ते हैं। सवाल: आप के पास भी शस्त्र हैं? जवाब: हां, कुछ पुलिसकर्मी यहां रहते हैं। यहां मंदिर की सुरक्षा की बात नहीं है, मेरी सुरक्षा भी होनी चाहिए। यह बात सही है कि यहां आधार कार्ड चेक होकर प्रवेश होता है। मुझे जान का खतरा है, इसलिए ही पुलिस आधार कार्ड चेक करती है। सवाल: साथ में रिवाल्वर और बुलेट बेल्ट की माला…क्यों? जवाब: मरना मैं भी नहीं चाहता हूं। मैं लड़ते हुए मरना चाहता हूं, कुत्ते बिल्ली की मौत मरना नहीं चाहता। अपनी गर्दन नहीं कटवाऊंगा, जैसे वास्तिक और कमलेश तिवारी की गर्दन काट दी। मुझे बम से उड़ाना पड़ेगा, या एके 47 से आकर 100-200 गोलियां मारनी पड़ेंगी। मैं ऐसे ही नहीं मरुंगा। इसलिए मैं अपनी खुद की सुरक्षा रखता हूं। सरकारी सुरक्षा के साथ मेरे साथ मेरे अपने गनर भी साथ रहते हैं। हिंदू महासभा के नेता कमलेश तिवारी की 2019 में लखनऊ में हत्या हुई थी, जबकि यूट्यूबर सलीम वास्तिक पर 27 फरवरी 2026 को हमला हुआ था। सवाल: आप पर यहां कितनी बार हमला हुआ है? जवाब: यहां फिजिकली हमला तो नहीं हुआ, लेकिन मुझ पर हमला करने के लिए आतंकवादी आए थे। पुलिस ने कई बार इन्हें पकड़ा है और केस खोला है। पूर्व में भी मंदिर पर हमला किया गया है। एक-दो बार पुलिस ने अच्छा एक्शन लिया है। हालांकि पुलिस ज्यादातर सीरियस नहीं लेती। सवाल: क्या आपके साथ अनहोनी हो सकती है? जवाब: वह चाहते हैं, करा तो नहीं सकते हैं। मैं महादेव और मां का बेटा हूं, मेरी मौत की तारीख मेरी मां और महादेव ने तय कर रखी है। वह प्रयास बहुत कर रहे हैं, लेकिन आसानी से अनहोनी करा नहीं सकते। मेरे पर हमले के लिए विदेशी फंडिंग होती है। मेरे महादेव मेरे साथ हैं, दुश्मनों के साथ नहीं हैं। सवाल: आपकी निजी सुरक्षा कैसी है? जवाब: मैं गरीब ब्राह्मण हूं। मेरी खास निजी सुरक्षा नहीं है, मेरे साथ कुछ युवक सुरक्षा में रहते हैं। सरकारी सुरक्षा भी मेरे साथ है, लेकिन वह कम है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें… आतंकी संगठन जैश में शामिल होना चाहता ‘जिहादी’:खौफ इतना कि लोग बोल नहीं रहे, 34 हजार आबादी वाले गांव का टेरर कनेक्शन दिल्ली-लखनऊ एक्सप्रेस-वे पर गाजियाबाद में मसूरी थाने से 5 किमी की दूरी पर नहर के किनारे नाहल गांव है। यह गाजियाबाद का ही नहीं, आसपास के जिलों का सबसे संवेदनशील गांव है। यहां की मुस्लिम आबादी करीब 34 हजार है। गांव इन दिनों चर्चा में है। वजह- नाहल गांव का देश विरोधी कनेक्शन सामने आया है। पढ़ें पूरी खबर
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