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    मोनू हत्याकांड के आरोपी की मौत के बाद गरमाई सियासत:मुजफ्फरनगर में परिजनों को डेढ़ लाख की मदद पर उठे सवाल, जेल में तबीयत बिगड़ने पर हुई मौत

    11 hours ago

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    मुजफ्फरनगर में मोनू हत्याकांड के मुख्य आरोपी सादिक की मौत के बाद जिले में “मुआवजा पॉलिटिक्स” को लेकर नई बहस छिड़ गई है। जिस व्यक्ति पर एक युवक की पीट-पीटकर हत्या का आरोप था, उसकी मौत के बाद अब राजनीतिक दलों की सक्रियता और आर्थिक मदद को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, बुढ़ाना क्षेत्र में मोनू खटीक को सादिक समेत कई युवकों ने कथित रूप से बेरहमी से पीटा था, जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सादिक को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जेल में बिगड़ी तबीयत, इलाज के दौरान मौत गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद सादिक की तबीयत बिगड़ गई थी। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। सादिक की मौत के बाद मामला केवल आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने राजनीतिक रंग भी ले लिया। सपा नेताओं ने उठाई मदद की मांग सादिक की मौत के बाद सपा नेता प्रमोद त्यागी और जिलाध्यक्ष ज़िया चौधरी ने यह मामला पार्टी नेतृत्व के सामने उठाया। इसके बाद आरोपी के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की मांग की गई। बताया जा रहा है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से सादिक के परिवार को डेढ़ लाख रुपये का चेक भेजा गया। पूर्व सांसद और नेताओं ने सौंपा चेक यह सहायता राशि पूर्व सांसद कादिर राणा और अन्य सपा नेताओं की मौजूदगी में परिजनों को सौंपी गई। इसके बाद जिले में इस मुद्दे को लेकर चर्चा और तेज हो गई है। राजनीतिक हलकों से लेकर आम लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या हत्या के आरोपी के परिवार को इस तरह की आर्थिक मदद देना संवेदनशीलता है या सियासी संदेश? जिले में छिड़ी नई बहस इस पूरे घटनाक्रम ने मुजफ्फरनगर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि क्या आरोपियों के परिजनों के प्रति भी राजनीतिक दल इसी तरह की सहानुभूति दिखाएंगे, या फिर यह केवल स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और वोट बैंक से जुड़ा कदम है। फिलहाल, यह मामला जिले में कानून, राजनीति और नैतिकता—तीनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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