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    मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव नहीं:फिल्म या वेब सीरीज बनाने की योजना से भी इनकार; 1500 आदिवासी शहीद हुए थे

    6 hours ago

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    केंद्र सरकार ने राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के प्रस्ताव से इनकार कर दिया। राजस्थान के साथ गुजरात और मध्य प्रदेश के आदिवासियों के लिए मानगढ़ आस्था केंद्र है। आदिवासी समुदाय लंबे समय से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग कर रहा है। उदयपुर से बीजेपी सांसद मन्नालाल रावत ने लोकसभा में इसे लेकर 23 मार्च को सवाल किया था। जवाब देते हुए केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इसके प्रस्ताव को लेकर इनकार कर दिया। बता दें कि मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने को लेकर राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण-2022 में ही अपनी सिफारिशों की मंत्रालय को रिपोर्ट दे चुका है। पढ़िए- सांसद मन्नालाल के सवाल और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के जवाब… सवाल- क्या सरकार की ओर से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के विचाराधीन प्रस्ताव पर कोई कार्रवाई करने पर विचार किया जा रहा है या इसका प्रस्ताव है? जवाब- वर्तमान में मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सवाल- सरकार भगवान बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम जैसे ऐतिहासिक जनजातीय बलिदानों पर कोई फिल्म या वेब सीरीज बनाने की योजना बना रही है? जवाब- भगवान बिरसा मुंडा या मानगढ़ धाम जैसे ऐतिहासिक जनजातीय बलिदानों पर कोई फिल्म या वेब सीरीज बनाने की योजना का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। सवाल- क्या इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र ने जनजाति गौरव नामक पुस्तक लिखी है? जवाब- 'जनजातीय गौरव' नामक पुस्तक लिखी गई है। पुस्तक में स्वतंत्रता संग्राम के साथ-साथ जनजातीय समाज की भूमिका पर प्रकाश डाला है। सवाल- क्या सरकार देशभर में जनजातीय नायकों के शहादत स्थलों की सुरक्षा और वीरतापूर्ण कामों के बारे में साहित्य सृजन के लिए कोई विरासत संरक्षण संबंधी काम या लेखन परिजयोजना लागू कर रही है? जवाब- जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 10 राज्यों में 11 जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों को मंजूरी दी है। इसके अलावा विभिन्न जनजातीय समुदायों के जीवन और संस्कृति को दर्शाने वाली दुर्लभ कलाकृतियों, पारंपरिक पोशाकों, आभूषणों, हथियारों और अन्य तत्वों को प्रदर्शित करने के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से नृवंशविज्ञान संग्रहालयों को भी मंजूरी दी गई है। मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग क्यों उठी? आदिवासियों के नेता स्वतंत्रता सेनानी गोविंद गुरु के नेतृत्व में 17 नवंबर 1913 को करीब 1.5 लाख से ज्यादा भील आदिवासियों ने मानगढ़ पहाड़ी पर सभा की थी। इस सभा पर अंग्रेज सरकार की पुलिस ने गोलियां चला दी थी, जिसमें लगभग 1,500 आदिवासियों की जान चली गई थी। इस नरसंहार को राजस्थान के जलियांवाला बाग भी कहा जाता है। राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण 2022 में कर चुका राष्ट्रीय स्मारक के दर्जे की सिफारिश राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण (NMA) के तत्कालीन अध्यक्ष तरुण विजय ने 6 जुलाई 2022 को मानगढ़ पहाड़ी को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट दी थी। तत्कालीन कला, संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल को रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में मानगढ़ पहाड़ी के बारे में प्रासंगिक विवरण और राष्ट्रीय स्मारक प्राधिकरण की सिफारिशें शामिल थीं। तत्कालीन संस्कृति मंत्री ने कहा था- रिपोर्ट को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाएंगे तत्कालीन कला, संस्कृति राज्य मंत्री अर्जुन मेघवाल ने कहा था कि गुमनाम नायकों और मानगढ़ पहाड़ी को इतिहास में वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। 17 नवंबर 1913 को ब्रिटिश सेना ने 1500 भील आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों को बेरहमी से मार डाला था। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए, आजादी का अमृत महोत्सव के अवसर पर हम एनएमए अध्यक्ष तरुण विजय की दी गई रिपोर्ट को सकारात्मक रूप से आगे बढ़ाएंगे। हमारी युवा पीढ़ी उनके बलिदान और मानगढ़ पहाड़ी से अनजान है, यह हमारी जिम्मेदारी होगी कि हम मानगढ़ पहाड़ी के महत्व को उजागर करें और इसके बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं। पीएम ने कहा था- आदिवासी समाज के बलिदान को इतिहास में जगह मिलनी चाहिए 1 नवंबर 2022 को पीएम नरेंद्र मोदी मानगढ़ धाम के दौरे पर आए थे। मानगढ़ धाम की गौरव गाथा के कार्यक्रम में राजस्थान के तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत, एमपी के तत्कालीन सीएम शिवराज सिंह चौहान और गुजरात के तत्कालीन सीएम भूपेंद्र पटेल शामिल हुए थे। पीएम मोदी ने कहा था- 17 नवंबर 1913 को मानगढ़ में जो नरसंहार हुआ, वह अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता की पराकाष्ठा थी। दुनिया को गुलाम बनाने की सोच के साथ मानगढ़ की इस पहाड़ी पर अंग्रेजी हुकूमत ने 1500 से ज्यादा लोगों को घेरकर के उन्हें मौत के घाट उतारा था। दुर्भाग्य से आदिवासी समाज के इस बलिदान को इतिहास में जो जगह मिलनी चाहिए, वह नहीं मिली। आज देश उस कमी को पूरा कर रहा है। मानगढ़ धाम में स्थित शहीद स्मारक की दीवारों पर शिलालेख पर नरसंहार की कहानी और पत्थरों पर युद्ध का चित्रण किया गया है। मानगढ़ धाम को फोटो में देखिए...
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