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    मीरगंज विधायक बोले-20 हजार करोड़ के काम किए:हर गांव तक सड़क-बिजली पहुंचाई, 2027 टिकट पर कहा- पार्टी जो तय करेगी वही मान्य

    1 hour ago

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    बरेली की मीरगंज विधानसभा से भाजपा विधायक डॉ. डीसी वर्मा का दावा है कि विकास के मामले में उनकी विधानसभा प्रदेश की सभी सीटों में सबसे आगे है। उनका कहना है कि आजादी के बाद दशकों तक क्षेत्र उपेक्षित रहा, लेकिन पिछले नौ वर्षों में सड़क, बिजली, पुल और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव हुआ है। करीब 80 किलोमीटर के दायरे में फैली मीरगंज विधानसभा में लगभग 350 गांव और 4 नगर पंचायतें आती हैं। यह क्षेत्र नेशनल हाईवे-24 (दिल्ली-लखनऊ) पर स्थित है और बरेली के झुमका तिराहा से इसकी शुरुआत होती है। दैनिक भास्कर ने विधायक डॉ. डीसी वर्मा से उनके कामकाज, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर खास बातचीत की। पढ़िए सवाल-जवाब- सवाल: अपने कार्यकाल के आधार पर आप खुद को 10 में से कितने नंबर देंगे? जवाब: मैं खुद को 10 में से 10 नंबर दूंगा, क्योंकि जब 2017 में पहली बार विधायक बना था तब क्षेत्र की हालत बेहद खराब थी। विधानसभा में एक किलोमीटर सड़क भी ढंग की नहीं थी। करीब 100 से 125 गांव ऐसे थे जहां बिजली नहीं पहुंची थी और 50 से अधिक गांव मुख्य संपर्क मार्गों से कटे हुए थे। आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। एक भी गांव या मजरा ऐसा नहीं बचा जहां बिजली न पहुंची हो या पक्की सड़क न बनी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सहयोग से करीब 20 हजार करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए गए हैं। 2017 से पहले आठ बड़ी नदियों पर सिर्फ चार पुल थे, जबकि अब 15 नए दीर्घ और लघु सेतु बनवाकर क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत की गई है। सवाल: आपके कार्यकाल का सबसे बड़ा और चुनौतीपूर्ण काम क्या रहा? जवाब: रामगंगा नदी पर दो महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है। गोराघाट पुल का निर्माण 2008 में बसपा सरकार के समय रुक गया था और सपा सरकार के पांच साल में भी यह पूरा नहीं हो पाया। 2017 में हमारी सरकार बनने के बाद मैंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया और 2020 तक इसे पूरा कराया। दूसरा बड़ा काम बाबा कैलाशमढ़ी का पुल है, जहां पहले नाव दुर्घटनाओं में कई लोगों की जान जा चुकी थी। इसके अलावा सुल्तानपुर बलेही, पहाड़पुर और रेतीपुरा जैसे गांवों में नदी कटान से बचाव के लिए पिचिंग का काम कराया गया। 2017 के बाद से वहां एक भी घर नदी में नहीं समाया है। सवाल: ऐसा कौन सा काम है जो अभी तक पूरा नहीं हो सका? जवाब: रबर फैक्ट्री की करीब 1400 एकड़ जमीन का मामला अभी प्रक्रिया में है। यह मामला पहले बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहा था। मैंने इसे विधानसभा में उठाया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने विशेष संज्ञान लिया। अब इसकी सुनवाई बरेली की सिविल कोर्ट में भी शुरू हो गई है। उम्मीद है कि जल्द ही इस जमीन का निस्तारण होगा और क्षेत्र के विकास में इसका उपयोग किया जा सकेगा। सवाल: 2027 के विधानसभा चुनाव में क्या आप फिर से टिकट के दावेदार होंगे? जवाब: टिकट का फैसला पार्टी नेतृत्व करता है। भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है और संगठन का जो भी निर्णय होगा, वह हमें स्वीकार होगा। 2012 में मैं चुनाव हार गया था, लेकिन 2017 और 2022 में जनता ने मुझे आशीर्वाद दिया। अगर पार्टी तीसरी बार मुझ पर भरोसा करती है तो मैं निश्चित रूप से चुनाव लड़ूंगा और क्षेत्र की सेवा करता रहूंगा। मीरगंज विधानसभा का इतिहास: राजनीतिक सफरनामा मीरगंज विधानसभा सीट का इतिहास काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यह क्षेत्र कृषि प्रधान होने के साथ-साथ राजनीतिक रूप से भी काफी जागरूक रहा है। यह सीट 1967 में अस्तित्व में आई थी। इससे पहले यह क्षेत्र अन्य विधानसभाओं का हिस्सा हुआ करता था। यहाँ मुख्य रूप से कुर्मी, मुस्लिम और दलित मतदाताओं की निर्णायक भूमिका रहती है। अब तक के विधायक और उनकी पार्टी जानिए इतिहास के मुख्य बिंदु विधायक डॉ. डीसी वर्मा का दावा है कि आजादी के 75 वर्षों तक मीरगंज में एक भी राजकीय कॉलेज नहीं था। उनका कहना है कि पिछले 9 वर्षों में 10 इंटर कॉलेज खुलवाना और जर्जर बिजली व्यवस्था को सुधारना उनकी सबसे बड़ी सामाजिक उपलब्धि है। अब देखना होगा कि 2027 की सियासी बिसात पर जनता और पार्टी उनके इन दावों पर कितनी मुहर लगाती है। मीरगंज विधानसभा का सियासी इतिहास और अब तक के विधायक मीरगंज विधानसभा सीट का गठन वर्ष 1967 में हुआ था। तब से लेकर अब तक यहां की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। शुरुआती दौर में इस सीट पर रफत अली का दबदबा रहा। उन्होंने 1969 से 1985 के बीच अलग-अलग दलों के टिकट पर लगातार पांच बार जीत दर्ज की। रफत अली ने निर्दलीय, भारतीय मुस्लिम लीग और कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़कर क्षेत्र में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। वहीं 1967 के पहले चुनाव में जनसंघ के एन. दत्त ने यहां से जीत हासिल की थी। नब्बे के दशक में राम मंदिर आंदोलन की लहर के दौरान मीरगंज की राजनीति ने नया मोड़ लिया और भाजपा के सूरज पाल यहां के प्रमुख नेता बनकर उभरे। उन्होंने 1989, 1991 और 1993 में लगातार तीन बार भाजपा का परचम लहराया। इसके बाद 1996 से इस क्षेत्र में सुल्तान बेग का दौर शुरू हुआ। सुल्तान बेग ने 1996 और 2002 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीत दर्ज की, जबकि 2007 और 2012 में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। इस तरह वे लगातार चार बार विधायक रहे और करीब दो दशकों तक मीरगंज की राजनीति के केंद्र में बने रहे। साल 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने डॉ. डीसी वर्मा पर भरोसा जताया। उन्होंने सुल्तान बेग के दो दशक पुराने किले को ढहाते हुए बड़ी जीत दर्ज की। डॉ. डीसी वर्मा ने विकास कार्यों के दम पर अपनी लोकप्रियता बरकरार रखी और 2022 के चुनाव में भी दोबारा जीत हासिल कर भाजपा के विजय रथ को आगे बढ़ाया। वर्तमान में वे लगातार दूसरी बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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