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    नीले ड्रम को काट कर बनाया चूल्हा:गोरखपुर में होटल, रेस्टोरेंट और ढाबा में लकड़ी पर बनने लगा खाना

    3 hours ago

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    देश भर में एलपीजी गैस की किल्लत के बाद गोरखपुर में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक लगा दी गई है। जिससे शहर के लगभग सभी होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा और कैफे संचालकों की दिक्कत बढ़ गई है। विकल्प ढूंढते हुए तमाम संचालकों ने चूल्हे की व्यवस्था कर ली है। कोई नीले ड्रम को काट कर चूल्हा बनवा रहा है तो किसी ने ईंट और मिट्टी की मदद से बनी चूल्हे का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। तमाम कोशिशों के बावजूद कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने के बाद शहर के तमाम रेस्टोरेंट्स में पारंपरिक चूल्हे की व्यवस्था कर दी गई है। इसी बीच शनिवार को रंगरेजा के टॉप फ्लोर पर ईंट और मिट्टी की मदद से चूल्हा बनवाया गया। अब खाना उसी पर पकेगा। रेस्टोरेंट की ओनर सुप्रिया द्विवेदी ने बताया- सोमवार तक हमें आसानी से सिलेंडर मिला। उसके बाद से एक भी सिलेंडर नहीं मिल पाया है। अभी तक इंडक्शन और तंदूर वाले चूल्हे की मदद से मैनेज किया जा रहा था। पारंपरिक तरीके को अपनाया उनका कहना है कि अब पता नहीं सिलेंडर कब मिलेगा। परेशानी को देखते हुए हमने पारंपरिक तरीके को अपनाया है। ईंट और मिट्टी का चूल्हा बना कर अब उसी के सहारे खाना पकेगा। बाकी जितना डिश हो सकता है उतने को इंडक्शन पर बनाया जा रहा है। चूल्हे पर खाना बनाना मुश्किल है हालांकि चूल्हे पर खाना बनाना बहुत मुश्किल हो रहा है। अंदर कही खास जगह न होने की वजह से टॉप फ्लोर पर इसकी व्यवस्था करनी पड़ी। धूप की वजह से हमारे एम्प्लॉयी की हालत खराब हो जा रही है। सबसे ज्यादा टेंशन हमें जो प्री बुकिंग है उसके लिए हो रही है। 48 साल पुराना बिजनेस बंद न इसलिए किया जुगाड़ धर्मशाला स्थित 48 साल पुराना समोसे का बिजनेस बंद न हो इसके लिए व्यापारी दिनेश कुमार गुप्ता नीले ड्रम और मिट्टी- सरिया की मदद से बनी भट्ठी वाले चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक दिन दुकान बंद होने पर बड़ा नुकसान होगा उन्होंने बताया कि हमारा दुकान बहुत फेमस है। 48 साल से हम समोसा और नमकीन का बिजनेस करते हैं। दूर- दराज से लोग यहां के समोसे खरीदने आते हैं। अगर एक दिन भी दुकान बंद होगी तो हमारा बहुत नुकसान हो जाएगा। घर चलाना मुश्किल हो जाएगा। इसलिए सिलेंडर न मिलने पर हमने विकल्प ढूंढ लिया। अब मिट्टी की भट्ठी पर समोसे तलने पड़ रहे हैं। हालांकि इसमें दिक्कत बहुत हो रही है। बार- बार कढ़ाही उतरना पड़ता है जिससे आग लगने का डर लगा रहता है। डीजल ईंधन का इस्तेमाल कर रहे वहीं शहर के तमाम ऐसे खाने के व्यापारी हैं, जो डीजल ईंधन का इस्तेमाल कर इस परेशानी से निपट रहे हैं। जिससे उन्हें काफी हद तक राहत है। हालांकि सिर्फ डीजल ईंधन पर निर्भर हो जाना उन्हें काफी महंगा पड़ रहा है।
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