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    मिर्जापुर के विंध्याचल धाम में उमड़ी भक्तों की भीड़, VIDEO:नवरात्रि के 7वें दिन माँ कालरात्रि की विशेष पूजा, दूर-दराज से पहुंचे लोग

    2 hours ago

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    मिर्जापुर में चैत्र नवरात्रि के सातवें दिन विंध्याचल धाम "जय माता दी" के जयकारों से गूंज उठा। विंध्य पर्वत पर स्थित कालीखोह मंदिर में माँ कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा-अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा धाम भक्तिमय वातावरण में डूबा रहा। नवरात्रि के सप्तम दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विशेष महत्व है। माँ का स्वरूप विकराल और भयावह बताया गया है, जो दुष्टों के संहार के लिए है। वहीं, भक्तों के लिए माँ सदैव शुभ फल देने वाली 'शुभंकरी' मानी जाती हैं। पं. राजन मिश्र ने बताया कि सप्तमी तिथि पर कालीखोह धाम में दर्शन-पूजन का विशेष महत्व है। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने माँ के चरणों में मत्था टेककर सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन साधक का मन सहस्रार चक्र में स्थित होता है और माँ की कृपा से उसे आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। शास्त्रों में वर्णित है कि माँ कालरात्रि के दर्शन मात्र से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति आती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मधु-कैटभ नामक असुरों का संहार करने के लिए भगवान विष्णु को योगनिद्रा से जगाने हेतु ब्रह्मा जी ने माँ की स्तुति की थी, जिसके परिणामस्वरूप माँ कालरात्रि प्रकट हुईं। इन्हें महामाया और विष्णु की योगनिद्रा भी कहा जाता है। इस दिन माँ को मधु, महुआ रस और गुड़ का विशेष भोग लगाया जाता है। श्रद्धालु माँ के भव्य स्वरूप के दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। तांत्रिक साधना के लिए भी सप्तमी की रात्रि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, जब साधक विशेष विधि से माँ की आराधना करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, पूजा की शुरुआत कलश पूजन, नवग्रह एवं दशदिक्पालों की आराधना से की जाती है और अंत में माँ कालरात्रि का ध्यान एवं पूजन होता है। सच्चे मन से की गई साधना से माँ अपने भक्तों को अभय, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
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