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    मिर्जापुर में बनेंगी बड़ी गौशालाएं, खुलेंगे चारा बैंक:500 से अधिक गौवंश के लिए होगी समुचित व्यवस्था

    2 hours ago

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    मिर्जापुर में निराश्रित एवं बेसहारा गौवंश के संरक्षण के लिए प्रशासन ने बड़ी पहल की है। जिले में तीन वृहद गौशालाओं का निर्माण किया जा रहा है, जहां 500 से अधिक गौवंश के लिए रहने, चारे और देखभाल की समुचित व्यवस्था होगी। इन गौशालाओं को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जा रहा है, ताकि पशुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिल सके। गौवंश के लिए पूरे वर्ष हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु जिले के राजगढ़, पटेहरा और हलिया ब्लॉक में 'चारा बैंक' स्थापित किए जा रहे हैं। इन चारा बैंकों में पर्याप्त मात्रा में चारा उपलब्ध रहे, इसके लिए किसानों को आर्थिक रूप से सहयोग देकर नेपियर घास की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशासन ने बताया कि एक हेक्टेयर में नेपियर घास की खेती करने से किसानों को प्रति माह लगभग 20 हजार रुपये तक की आय हो सकती है। खास बात यह है कि एक बार घास लगाने के बाद करीब 5 वर्षों तक लगातार कटाई की जा सकती है, जिससे किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. भूपेंद्र ने बताया कि जिले में अब तक 10 किसानों द्वारा नेपियर घास की बुवाई की जा चुकी है। प्रशासन की योजना के तहत छोटे-छोटे गौ आश्रय स्थलों को बंद कर वहां के गौवंश को इन वृहद गौशालाओं में स्थानांतरित किया जाएगा। उसरी पाण्डेय गांव के गौ आश्रय स्थल से गौवंश को नई गौशालाओं में शिफ्ट किया जाएगा। इसी प्रकार अहरौरा क्षेत्र के भुइली, सीखड़ और भिस्कुरी के टांडा फाल तथा शाहपुर चौसा के आश्रय केंद्रों के पशुओं को भी इन नई गौशालाओं में भेजा जाएगा। डॉ. भूपेंद्र ने यह भी बताया कि जिन गौ आश्रय स्थलों को बंद किया जाएगा, उन्हें 'भूसा बैंक' में परिवर्तित किया जाएगा। गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल का 7 अप्रैल को आगमन प्रस्तावित है, जहां वे इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर समीक्षा करेंगे। प्रशासन की इस पहल से एक ओर जहां गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को भी अतिरिक्त आय का स्रोत प्राप्त होगा।
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