Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    मर्दानगी की दवा लेंगे ट्रंप के सैनिक? खामनेई ने...युद्ध के बीच पेंटागन के ऐलान ने मचाई हलचल

    22 hours ago

    1

    0

    ईरान के साथ लंबे वक्त से छिड़ी जंग के बीच अमेरिकी सेना का क्या हाल हो रहा है अब यह धीरे-धीरे पूरी दुनिया के सामने आ रहा है। दरअसल 1 मार्च 2026 को कुवैत के शोएब इंटरनेशनल बंदरगाह को ईरान ने निशाना बनाया था। हालांकि इससे पहले अमेरिकी सैनिकों ने अपनी सीनियर कमांड को यह जानकारी दी थी कि उनकी यह पोजीशन ईरान के निशाने पर आ सकती है। लेकिन उनकी इस चेतावनी के बावजूद भी अमेरिकी सीनियर कमांड ने इसे अनदेखा किया और आखिरकार वही हुआ जिसका इन सैनिकों को डर सता रहा था। ईरान के साथ लंबे खिसते टकराव की वजह से अमेरिकी सैनिक एक अभूतपूर्व मानसिक और शारीरिक दबाव से जूझ रहे हैं। जिसका सीधा असर उनकी सैन्य क्षमता पर पड़ रहा है। और इसी वजह से अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को एक ऐसा कदम उठाना पड़ा है जो बेहद ही हैरान करने वाला है। पेंटागन के इस कदम से दुनिया भर में इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या अमेरिकी सैनिकों की मददानगी ताकत कम हो रही है? दरअसल अमेरिका ने ईरान को झुकाने के लिए मिडिल ईस्ट में अपनी आधी से ज्यादा फौज उतार दी। अमेरिका ने अपनी नेवी एयरफोर्स और ग्राउंड फोर्स को मिडिल ईस्ट में ईरान की घेराबंदी के लिए उतार दिया है। लेकिन इसी बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेग्सेथ ने घोषणा की है कि अमेरिका के हर सैनिक को सालाना टेस्टोस्टरॉन की स्क्रीनिंग करानी होगी। बता दें कि टेस्टोस्टरॉन एक ऐसा हार्मोन होता है जो पुरुषों में पाया जाता है। यह हार्मोन पुरुषों में मददानगी और शारीरिक ताकत से लेकर स्टैमिना तक बढ़ाने का काम करता है। इसे भी पढ़ें: डील कराने वालों को भी नहीं बख्श रहा ईरान, आगे का क्या है खौफनाक प्लान?द हिल के अनुसार, 30 साल और उससे ज़्यादा उम्र के सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन स्क्रीनिंग को  सेना की समय-समय पर होने वाली हेल्थ जांच में शामिल किया जाएगा, जबकि 30 साल से कम उम्र के सैनिकों के पास अपनी मर्ज़ी से यह टेस्ट करवाने का विकल्प होगा। एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो मैसेज में हेगसेथ ने कहा कि हालांकि हम अपने हथियार सिस्टम, प्लेटफॉर्म और साजो-सामान पर बहुत ज़्यादा निवेश करते हैं, लेकिन हमारा सबसे निर्णायक रणनीतिक फ़ायदा हमेशा व्यक्तिगत सैनिक ही होगा। वीडियो घोषणा के साथ, हेगसेथ ने वीडियो को यह शीर्षक दिया हाई-टी डिपार्टमेंट ऑफ़ वॉर। उन्होंने कहा कि उस बढ़त को बनाए रखना हमारा पवित्र कर्तव्य है, इसलिए हमें आपकी परफॉर्मेंस, आपकी सहनशक्ति और आपकी लंबे समय की सेहत को बेहतर बनाने के नए तरीके लगातार खोजने होंगे। हेगसेथ ने कहा कि स्क्रीनिंग प्रोग्राम का मकसद यह पक्का करना है कि सैनिकों में "टेस्टोस्टेरोन का सही लेवल हो ताकि वे अपना बेस्ट प्रदर्शन कर सकें, क्योंकि यह एक स्थापित वैज्ञानिक तथ्य है कि उम्र बढ़ने के साथ टेस्टोस्टेरोन का लेवल अक्सर अपने-आप कम हो जाता है। इसे भी पढ़ें: चाबहार का इतना भयंकर बदला, ईरान ने 15 मिनट में 60 फाइटर जेट उड़ाए? हिल गए ट्रंपअमेरिका का टेस्टोस्टरॉन स्क्रीनिंग प्रोग्राम यह स्क्रीनिंग प्रोग्राम अमेरिका के 30 साल या उससे ज्यादा उम्र के सैनिकों के लिए अनिवार्य होगा। हेक्सेथ का कहना है कि इस प्रोग्राम का मकसद अमेरिकी सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन की कमी से निपटना है जो अमेरिकी सैनिकों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। इसको लेकर अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि विज्ञान में यह बात अच्छे से साबित हो चुकी है कि जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है, टेस्टोस्टरॉन का स्तर प्राकृतिक रूप से घटता है। दरअसल पीट हेक्कसेथ का कहना है कि अमेरिकी सैनिकों के टेस्टोस्टरॉन लेवल की जांच के लिए एक सालाना हेल्थ असेसमेंट होगा जो सभी सैनिकों के लिए अनिवार्य होगा। इस स्क्रीनिंग में 30 साल या उससे अधिक उम्र के सैनिक स्वतः अपने आप शामिल हो जाएंगे और 30 साल से कम उम्र के सैनिक स्वैक्षिक रूप से टेस्टोस्टरॉन स्क्रीनिंग करा सकते हैं। हेक्सेथ का कहना है कि जिन सैनिकों का टेस्टोस्टरॉन लेवल कम पाया जाता है उन्हें टेस्टोस्टरॉन रिप्लेसमेंट थेरेपी यानी टीआरटी दी जाएगी। जिसके जरिए अमेरिकी सैनिकों को अतिरिक्त रूप से टेस्टोस्टरॉन हॉर्मोन दिया जाएगा। हालांकि ऐसा जबरन नहीं किया जाएगा। मेडिकल एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह थेरेपी जेल, इंजेक्शन, स्किन पैचेस,  मुंह द्वारा खाई जाने वाली टेबलेट के जरिए दी जा सकती है। हेक्सेथ का कहना है कि अगर किसी सैनिक का टेस्टोस्टरॉन लेवल तय मानक से नीचे चला जाता है तो उन्हें टीआरटी थेरेपी दी जाएगी।
    Click here to Read more
    Prev Article
    Russia-Ukraine War: रूसी गोदामों पर Ukraine के भीषण Drone Attack में 7 की मौत, Wildberries Warehouse बना निशाना
    Next Article
    चाबहार का इतना भयंकर बदला, ईरान ने 15 मिनट में 60 फाइटर जेट उड़ाए? हिल गए ट्रंप

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment