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    मऊ में लंपी वायरस का खतरा, पशुपालन विभाग अलर्ट:27 टीमें कर रहीं गोवंशों का टीकाकरण, 87 हजार को टीका लगाने का लक्ष्य

    4 hours ago

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    मऊ जिले में गोवंशों में लंपी स्किन डिजीज के खतरे को देखते हुए पशुपालन विभाग अलर्ट है। बीमारी की रोकथाम के लिए जिले में बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। 9 सितंबर से शुरू हुए विशेष अभियान में 27 टीमें गांव-गांव जाकर गोवंशों का टीकाकरण कर रही हैं। विभाग ने जिले के सभी गोवंशों को टीका लगाने का लक्ष्य रखा है। पशु चिकित्सा अधिकारी आरबी चौरसिया ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देश पर पिछले कई महीनों से लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए टीकाकरण कराया जा रहा है। जिले में 87 हजार गोवंशों को टीका लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इनमें से अब तक करीब 50 हजार पशुओं का टीकाकरण हो चुका है। शेष पशुओं को भी जल्द से जल्द टीका लगाने के लिए टीमें लगातार गांवों में पहुंच रही हैं। विभाग ने पशुपालकों को बीमारी के लक्षणों और संक्रमण फैलने के तरीके को लेकर भी जागरूक किया है। अधिकारियों के मुताबिक, समय पर लक्षण पहचानकर संक्रमित पशु को अलग रखना और पशु चिकित्सक से संपर्क करना जरूरी है। पशुपालकों से अपने गोवंशों का टीकाकरण कराने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की जानकारी तत्काल विभाग को देने की अपील की गई है। 87 हजार गोवंशों के टीकाकरण का लक्ष्य पशु चिकित्सा अधिकारी आरबी चौरसिया के अनुसार मऊ जिले में कुल 87 हजार गोवंशों का टीकाकरण किया जाना है। 9 सितंबर से शुरू हुए विशेष अभियान में अब तक करीब 50 हजार पशुओं को टीका लगाया जा चुका है। बाकी गोवंशों का टीकाकरण भी लगातार जारी है। गांव-गांव पहुंच रही 27 टीमों की टीम टीकाकरण अभियान को पूरा करने के लिए जिले में 27 टीमें लगाई गई हैं। टीमें गांवों में पहुंचकर गोवंशों का टीकाकरण कर रही हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा पशुओं को बीमारी से बचाव का टीका लगाया जा सके। तेज बुखार के बाद शरीर पर बनने लगती हैं गांठें पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि लंपी स्किन डिजीज होने पर पशु को तेज बुखार आ सकता है। आंख और नाक से पानी आने लगता है और पशु खाना कम या बंद कर देता है। इसके एक-दो दिन बाद शरीर के अलग-अलग हिस्सों में गांठें बनने लगती हैं। बाद में ये गांठें फूटकर घाव में बदल सकती हैं। मक्खी, मच्छर और किलनी से फैल सकता है संक्रमण अधिकारियों के मुताबिक लंपी स्किन डिजीज संक्रमित पशु से दूसरे पशुओं तक फैल सकती है। मक्खी, मच्छर और किलनी जैसे जीव संक्रमण को स्वस्थ पशुओं तक पहुंचा सकते हैं। इसलिए बीमारी के लक्षण वाले पशु को स्वस्थ गोवंश से अलग रखना जरूरी है। समय पर उपचार और टीकाकरण से संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है। लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक को दें सूचना पशुपालन विभाग ने पशुपालकों से अपने गोवंशों का टीकाकरण जरूर कराने की अपील की है। विभाग की टीमें गांवों में पहुंचकर टीकाकरण कर रही हैं। किसी पशु में तेज बुखार, आंख-नाक से पानी आना या शरीर पर गांठें जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सक या पशुपालन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है।
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