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    मायावती ने आकाश को तीसरी बार पद से क्यों हटाया:क्या पॉलिटिकल करियर खत्म?, बसपा को फायदा या नुकसान

    6 hours ago

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    2 अगस्त, 2026 को मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से निकाल बाहर किया। मायावती ने 'X' पर लिखा- बार-बार चेतावनी के बावजूद अशोक सिद्धार्थ के रवैये में कोई सुधार नहीं आया। इस वजह से उनसे सभी जिम्मेदारियां छीन ली गई थीं। इसके ठीक 32वें दिन मायावती ने उनके दामाद और अपने भतीजे आकाश आनंद से राष्ट्रीय समन्वयक का पद छीन लिया। लिखा- 'कांशीरामजी ने अपने परिवार के लोगों को पार्टी कार्य में सहयोग करने की छूट तो दी, लेकिन उन्हें चुनाव लड़ाने के खिलाफ थे। उस संकल्प पर मैं पूरी तरह से कायम हूं। मैंने आकाश को पार्टी में काम करने की इजाजत दी, लेकिन उन्हें अभी और मैच्योर होने की जरूरत है। सवाल है, क्या इस फैसले से आकाश के पॉलिटिकल करियर पर ग्रहण लग जाएगा? सब कुछ 5 पॉइंट में जानिए… 1. पहले जानिए, मायावती ने आकाश को क्यों पार्टी से निकाला? वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- आकाश आनंद को मायावती ने पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान भी इसी तरह से हटाया था। तीनों बार की कार्रवाई में एक समानता है कि वे पहले उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को हटाती हैं। इसके बाद आकाश पर कार्रवाई करती हैं। आकाश आनंद को सादाबाद की सफल रैली के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं से लेकर आम लोगों और मीडिया में जमकर तारीफ मिली थी। मीडिया में यह भी खबर चल गई कि आकाश आनंद की यूपी विधानसभा चुनाव में अहम भूमिका होगी और वे टिकट भी बांटेंगे। इस पर तुरंत मायावती की ओर से प्रतिक्रिया आई। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि बसपा में सारे टिकट सिर्फ वो बांटती हैं। उनकी ओर से तय किए गए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन में किया जाता है। आकाश आनंद ने भी सादाबाद में वही किया था। इसके बाद मायावती ने एक और पोस्ट किया कि अब से आकाश आनंद के कार्यक्रम तय करने से पहले मुझसे अनुमति ली जाए। आकाश के लिए भी कहा था कि वे कार्यक्रम में शामिल होने से पहले मुझसे अनुमति लेंगे। आकाश की लोकप्रियता और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की संगठन में पैठ के चलते मायावती हमेशा से आशंकित रहती हैं कि कहीं ससुर-दामाद मिलकर उन्हें पद से हटा ना दें। मायावती में असुरक्षा की भावना आज से नहीं है। जब से पार्टी में उनका प्रभाव बढ़ा, वे इसी तरह आशंका के चलते निर्णय लेती रही हैं। आरके चौधरी, लालजी वर्मा समेत कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाने के पीछे भी यही वजह रही। मायावती के खिलाफ पार्टी में रहते हुए सिर्फ दो ही नेता बगावत करने की हिम्मत दिखा सके। पहले नसीमुद्दीन सिद्दीकी, जिन्होंने मायावती से जुड़ा एक ऑडियो टेप सार्वजनिक कर दिया था। दूसरा स्वामी प्रसाद मौर्य हैं, जिन्होंने पार्टी कार्यालय में प्रेस वार्ता बुलाकर मायावती को दौलत की बेटी कहा था। 2. मायावती ने अचानक फैसला लिया या इसके संकेत मिलने लगे थे वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं- यह अचानक लिया फैसला नहीं है। मायावती क्या करने वाली हैं, ये तो उनके सिवा कोई नहीं अंदाजा लगा सकता। लेकिन, आकाश के पर कतरने के संकेत दिखने लगे थे। आकाश की सादाबाद की रैली का बसपा के ऑफिशियल सोशल अकाउंट पेजों पर लाइव प्रसारण हुआ था। उनके भाषणों की छोटी-छोटी क्लिप बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। इसके बाद आकाश ने रैपिडो से जुड़े अंकित कुमार को लेकर एक पोस्ट किया था। इसमें लिखा था- 4 रेलवेकर्मी उनकी कैब में बैठकर एक दलित सीनियर अफसर के खिलाफ जातिसूचक टिप्पणियां कीं, तो अंकित ने विरोध किया और उन्हें गाड़ी से उतार दिया। सवाल पूछा कि किसी की काबिलियत पर सवाल है, तो नाम लो। पूरी जाति को क्यों बदनाम कर रहे हो? बदले में क्या मिला? रैपिडो ने अंकित का अकाउंट 99 साल 11 महीने के लिए सस्पेंड कर दिया। फिर आकाश ने आरक्षण खत्म करने पर राय रखने वाले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत को लेकर लिखा था कि उन्हें अंकित जैसे दलित युवाओं को जवाब देना चाहिए। बाद में आकाश ने यह पोस्ट डिलीट कर दिया। यह मायावती के दबाव में ही करना पड़ा था। फिर 25 अगस्त को जब जेवर में उनकी सभा हुई, तो इसका पार्टी के ऑफिशियल पेज पर कोई प्रसारण नहीं हुआ। आकाश ने भी इस सभा में कुछ खास नहीं बोला। 31 अगस्त को जब यूपी के प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक बुलाई, तब भी आकाश को नहीं बुलाया गया। इसके बाद 3 सितंबर को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले आकाश ने अपना बायो चेंज करते हुए सिर्फ बसपा कार्यकर्ता लिख दिया है। 3. बसपा को इसका कितना फायदा-नुकसान वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं- 2024 लोकसभा चुनाव में मायावती अपने निर्णय का नतीजा देख चुकी है। तब चुनाव के बीच उन्होंने आकाश पर कार्रवाई की थी। उनके कोर दलित वोटरों में सपा-कांग्रेस ये संदेश फैलाने में सफल रहे थे कि बसपा प्रमुख मायावती भाजपा के दबाव में निर्णय लेने को मजबूर हैं। नतीजा निकला कि बसपा लोकसभा में पूरे देश में खाता तक नहीं खोल पाई। उसका वोट प्रतिशत भी 10 के नीचे चला गया। इस बार भी मायावती ने ऐन चुनावी माहौल के बीच आकाश आनंद को पद से हटाया है। हाथरस की सादाबाद और जेवर की सभा के बाद से पार्टी के कार्यकर्ता उत्साहित थे। खासकर युवा दलित मतदाता आकाश के सक्रिय होने से अधिक काफी खुश थे। दलित वोटर्स एक बार फिर बसपा की तरफ मुड़ने की सोचने लगा था। अब आकाश पर कार्रवाई से दलित समर्थकों में ये संदेश जाएगा कि मायावती भाजपा के प्रभाव में निर्णय ले रही हैं। वे पार्टी को चुनाव में जीत दिलाने के लिए इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में दलित मतदाता तीसरे विकल्प की ओर जाएगा। दलितों का पुराना घर कांग्रेस रहा है। दलितों का एक बड़ा हिस्सा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ जा सकता है। 4. क्या आकाश आनंद का पॉलिटिकल करियर संकट में मायावती ने एक तरफ आकाश आनंद से पद छीना, तो दूसरी ओर उनके छोटे भाई ईशान आनंद के साथ बैठक में पहुंचीं। ईशान 2024 में मायावती के जन्मदिन के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखे। उनके साथ पिता आनंद कुमार भी थे। आनंद कुमार पार्टी में उपाध्यक्ष हैं। मायावती ने पार्टी की बैठक में बताया भी कि आनंद कुमार की तबीयत ठीक नहीं रहती है। उनके कार्यों में ईशान आनंद हाथ बंटाएंगे। मायावती के इस निर्णय के बाद कयास लग रहे हैं कि क्या आकाश आनंद के राजनीतिक सफर पर ब्रेक लग जाएगा। इसका जवाब देते हुए दलित चिंतक एवं जेएनयू के प्रो. विवेक कुमार कहते हैं कि आकाश आनंद युवा हैं। अभी राजनीतिक तौर पर उनके पास लंबा वक्त है। मायावती ने पार्टी से उन्हें बाहर भी नहीं किया है। पहले भी मायावती ने जब उन्हें पार्टी से निकाला, तो बाद में वापस भी लिया। आकाश को उन्होंने एक बार अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी तक घोषित किया था। इस बार भी उनके लिए पार्टी में नया पद सृजित करते हुए राष्ट्रीय समन्वयक बनाया था। मतलब, आगे आकाश आनंद को फिर वे जिम्मेदारी सौंप सकती है। 5. आकाश आनंद और ईशान में कितना अंतर दोनों मायावती के भतीजे हैं। मायावती के छोटे भाई आनंद कुमार के 2 बेटों में आकाश बड़े तो ईशान छोटे हैं। आकाश की शादी मायावती ने ही अशोक सिद्धार्थ की बेटी प्रज्ञा से कराई थी। जबकि ईशान ने परिवार से बगावत कर खुद की पसंद से पंजाबी खत्री परिवार की बेटी ईशा खन्ना से लव-मैरिज की थी। ईशान परिवार से नाराज होकर साउथ एक्स दिल्ली में अलग तक रह रहे थे। आकाश की एक बेटी है, जबकि ईशान का एक बेटा है। दोनों की संतानों में एक दिन का अंतर है। वरिष्ठ पत्रकार सैयद कासिम कहते हैं- दोनों के संस्कार में भी बड़ा अंतर है। आकाश जहां सौम्य और संस्कारित दिखते हैं। वहीं, ईशान एटीट्यूट में रहते हैं। इसका नजारा राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान भी दिखा। आकाश जब भी इस तरह की बैठकों में आते थे, तो मायावती का पैर छूना नहीं भूलते थे। जबकि ईशान मायावती के पास थोड़ी देर के लिए अपने हाथ पीछे बांधे हुए तनकर जरूर खड़े रहे। इसके बाद पिता के साथ साइड की कुर्सी पर बैठ गए। दूसरा दोनों भाइयों के भाषण कला में भी बहुत फर्क है। ईशान को अभी तक किसी ने सार्वजनिक मंच से भाषण देते हुए नहीं सुना है। जबकि, आकाश के भाषण काफी लोकप्रिय रहे हैं। ------------------------- यह खबर भी पढ़ें - बसपा चारों सदनों में शून्य होगी, ऐसा 37 साल बाद, इकलौते विधायक का निधन; नवंबर में राज्यसभा सांसद का भी कार्यकाल खत्म बहुजन समाज पार्टी अपनी स्थापना के 37 साल बाद चारों सदनों में ‘शून्य’ हो जाएगी। यूपी विधानसभा में उसके इकलौते विधायक उमाशंकर सिंह का 5 अगस्त को निधन हो गया। यूपी विधान परिषद में राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस की तरह बसपा का भी कोई सदस्य नहीं बचा है। 2024 में पार्टी के एकमात्र विधान परिषद सदस्य (MLC) भीमराव अंबेडकर का कार्यकाल पूरा होने के बाद बसपा उच्च सदन में वापसी नहीं कर सकी। पढ़िए पूरी खबर...
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