Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    निचली अदालतें उम्रकैद की सजा को बदल नहीं सकतीं:सुप्रीम कोर्ट बोला- यह अधिकार केवल संवैधानिक अदालतों के पास; ट्रायल कोर्ट-हाईकोर्ट का फैसला पलटा

    21 hours ago

    1

    0

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि हत्या के मामले में किसी आरोपी को दोषी ठहराते समय सेशंस कोर्ट यह आदेश नहीं दे सकता कि दोषी अपनी बाकी बची पूरी जिंदगी जेल में ही बिताएगा। यानी, निचली अदालतें उम्रकैद की सजा का नियम बदल नहीं सकती। यह अधिकार केवल संवैधानिक अदालतों सुप्रीम कोर्ट-हाईकोर्ट के पास है। यह फैसला पंजाब के लुधियाना में दिसंबर 2009 में एक महिला और उसकी दो नाबालिग बेटियों की हत्या के मामले में आया। मामला जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच में था। सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए दो दोषियों की सजा बदलकर 25 साल की कैद कर दी है। वो सवाल जिससे पूरा मामला जुड़ा- सुप्रीम कोर्ट बोला- विशेष अधिकार संवैधानिक अदालतों के पास मामला नवल किशोर और एक और दोषी की अपील से जुड़ा था। दोनों पर लुधियाना में एक महिला पिंकी, उसकी 8 साल की बेटी दिव्या और 5 साल की बेटी पूजा की हत्या का आरोप था। बेंच ने पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि उम्रकैद के दोषी को बाकी जिंदगी तक जेल हो सकती है, लेकिन वैधानिक माफी और सजा कम करने की शक्तियों को सेशंस कोर्ट सीमित नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि बिना माफी वाली उम्रकैद की स्पेशल कैटेगरी की सजा देने का अधिकार संवैधानिक अदालतों के पास है। यह अधिकार सेशंस कोर्ट के पास नहीं है। बेंच ने यह भी कहा कि CrPC के तहत माफी देने और सजा कम करने की शक्ति को सेशंस कोर्ट खत्म नहीं कर सकता। सेशंस कोर्ट का यह निर्देश वैधानिक व्यवस्था के खिलाफ है। ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक ऐसे चला केस 25 साल की कैद, वैधानिक माफी नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट IPC की धारा 302 और धारा 34 के तहत उम्रकैद देने में सक्षम था। लेकिन वह दोनों दोषियों को पूरी जिंदगी जेल में रखने की विशेष श्रेणी की सजा नहीं दे सकता था। कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें दोनों को जीवनभर जेल में रखने कहा गया था। इसके बदले दोनों दोषियों को 25 साल कैद दी गई। हालांकि इस अवधि में किसी भी वैधानिक माफी का लाभ नहीं मिलेगा। ----------------------- सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा-TMC पर फैसला कब: कहा- हमने शिवसेना मामले में देरी का नतीजा देखा सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को चुनाव आयोग (EC) से पूछा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा फैसला कब तक लेंगे। कोर्ट ने आयोग से कहा कि वह फैसले की टाइमलाइन बताए। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें आयोग ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न को फ्रीज कर दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी। पढ़ें पूरी खबर…
    Click here to Read more
    Prev Article
    पीएम ने मंत्रियों से योजनाओं और कामकाज पर फीडबैक लिया:कहा- कोई जरूरतमंद योजना के लाभ से न छूटे, लोगों का जीवन आसान बनाना लक्ष्य
    Next Article
    हैदराबाद लॉ यूनिवर्सिटी में उमर खालिद की डॉक्यूमेंट्री की स्क्रीनिंग:ट्रिपल आईटी में कैंसिल होने के विरोध में दिखाई गई; CBFC बोला- यह सर्टिफाइड नहीं

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment