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    नोएडा आग्निकांड: सहायक निदेशक कारखाना ने माना गंभीर लापरवाही:35 लोग हुए थे घायल, एक की हुई थी मौत, बिना सुरक्षा मानक के रसायन का किया भंडारण

    3 hours ago

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    नोएडा में 12 मार्च को सेक्टर-4 केपिटल पावर सिस्टम लिमिटेड में आग लगी थी। सहायक निदेशक कारखाना नोएडा ने इस अग्निकांड की जांच की। जिसकी एक विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपी है। संदीप कुमार सिंह सहायक निदेशक कारखाना,सुप्रिया द्विवेदी श्रम प्रवर्तन अधिकारी, जितेंद्र सिंह भदौरिया, श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया फैक्ट्री में सुरक्षा मानकों की लापरवाही बरती गई। जिससे आग लगी। निरीक्षण के समय राकेश सक्सेना, वरिष्ठ प्रबंधक, मानव संसाधन एवं प्रशासन, रजनीश कुमार शर्मा, वाइस प्रेसिडेंट वर्क्स आधिकारिक कारखाना प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित रहे। इस घटना में 35 लोग घायल हुए थे और एक कर्मचारी की मौत हो गई थी। स्टोर मॉलवाहक लिफ्ट से पहले उठा धुआं अपनी रिपोर्ट में बताया कि स्थलीय निरीक्षण, कर्मचारियों से की गई पूछताछ, गवाहों के बयान एवं दस्तावेजों की जांच के बाद स्पष्ट है कि यह अग्निकाण्ड संभवतः शॉर्ट सर्किट के कारण हुआ। 12 मार्च 2026 को सुबह 05:30 बजे कंपनी में आग लगी। 5:30 बजे स्टोर के माल वाहक लिफ्ट क्षेत्र के निकट धुआं एवं आग की लपटें देखीं, जिसके बाद उन्होंने अन्य कर्मचारियों को सूचित करते हुए आग बुझाने का प्रयास किया। 25 मिनट बाद पहुंची दमकल की गाड़ी आग की तीव्रता अधिक होने के कारण प्रारंभिक प्रयास असफल रहे, जिसके उपरांत पुलिस आपातकालीन सेवा (112) को सूचना दी गई। लगभग 20 से 25 मिनट के भीतर अग्निशमन विभाग की गाड़ियां घटनास्थल पर पहुंचीं आग बुझाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई। इस घटना में एक कर्मचारी उपेन्द्र की मृत्यु हो गई तथा 35 कर्मचारी घायल पाए गए, जिनमें से 33 कर्मचारियों को उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। जबकि 2 कर्मचारियों का उपचार अभी भी जारी है। ये मिली खामियां स्थलीय निरीक्षण में पाया गया कि कारखाना भवन में दो बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर, प्रथम तल और द्वितीय तल निर्मित हैं। टेरेस को टीन शेड से ढककर भंडारण कार्य के लिए उपयोग में लाया जा रहा था। जबकि अग्नि सुरक्षा विभाग द्वारा जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र केवल दो बेसमेंट एवं तीन तल तक ही स्वीकृत था। यह भी पाया गया कि कारखाना परिसर के चारों ओर नियमानुसार आवश्यक सेटबैक क्षेत्र नहीं छोड़ा गया था। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कारखाने में स्थापित स्मोक डिटेक्टर घटना के समय कार्यशील नहीं थे । आवागमन के मार्ग कई स्थानों पर अवरुद्ध पाए गए। विद्युत सुरक्षा से संबंधित समय-समय पर कराई जाने वाली परीक्षण रिपोर्ट व अभिलेख मांगे जाने पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। साथ ही यह भी पाया गया कि कारखाने में लगभग 50 टन पॉलीकार्बोनेट एवं लगभग 200 लीटर कन्फॉर्मल कोटिंग रसायन का भंडारण किया जाता था। इनका भंडारण सुरक्षित नहीं था। रिपोर्ट में दिखाया परिणाम कंपनी ने कारखाना अधिनियम, 1948 व उत्तर प्रदेश कारखाना नियमावली, 1950 के अंतर्गत निर्धारित सुरक्षा प्रावधानों का समुचित अनुपालन नहीं किया गया। विशेष रूप से कर्मकारों की सुरक्षा, अग्नि सुरक्षा प्रबंध, सुरक्षित भंडारण, विद्युत सुरक्षा तथा आपातकालीन व्यवस्थाओं के संबंध में गंभीर लापरवाही बरती गई।
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