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    नोएडा इंजीनियर की मौत के बाद परिवार ने देश छोड़ा:पिता-बहन लंदन गए, घर में ताला लगा; SIT रिपोर्ट पर एक्शन नहीं

    7 hours ago

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    नोएडा में सिस्टम की लापरवाही से सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटे युवराज को खोने वाले पिता और बहन ने देश छोड़ दिया है। घटना के एक महीने बाद वह लंदन चले गए। उनके फ्लैट पर ताला लगा है। वहां कोई नहीं है। घटना 16 जनवरी की देर रात की है। युवराज मेहता अपने पिता के सामने कार समेत डूब गए थे। SIT अपनी जांच रिपोर्ट 27 जनवरी को सौंप चुकी है। इसपर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है। 14 फरवरी को युवराज के पिता राज कुमार मेहता और उनकी बहन लंदन चले गए। हालांकि देश छोड़ने की अहम वजह अभी साफ नहीं हो पाई है। इस बीच उनका देश छोड़कर जाना चर्चा में आ गया है। घटना की 2 तस्वीरें… जानिए पूरा मामला… 16 जनवरी को सेक्टर-150 के एससी-02 A3 प्लाट के बेसमेंट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार डूब गई थी। वह खुद को बचाने के लिए कार की छत पर चढ़ गए। मदद के लिए पिता को कॉल की। पिता पहुंचे। उनकी कॉल पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पहुंची। घंटों की मशक्कत के बाद भी युवराज तक मदद नहीं पहुंच सकी। वह अपने पिता और राहत और बचाव की टीम के सामने ही पानी में डूब गए। अगले दिन सुबह उनकी लाश बरामद की गई। घटना के 3 दिन बाद यानी 19 जनवरी को SIT का गठन किया गया। रिपोर्ट में सिस्टम के फेल्योर की बात SIT ने नोएडा प्राधिकरण समेत तीन विभागों से 22 से ज्यादा सवाल पूछे। नोएडा प्राधिकरण ने अपनी 150 पन्रों की, जबकि पुलिस ने 450 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी। SIT का सवाल रहा कि रेस्क्यू में 2 घंटे की देरी क्यों हुई? इसका जवाब अधिकारियों को देते नहीं बना। सोर्सेज की मानें तो नोएडा में युवराज मेहता की मौत का मामला एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम के फेल्योर की तरह सामने आया है। ये फैक्ट पुलिस और नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में सामने आ गया है।SIT रिपोर्ट का एनालिसिस करने के बाद इसे सीएम योगी आदित्यनाथ को 27 जनवरी को सौंपा गया। इन रिपोर्ट में कुछ खास चेहरों को जिम्मेदार ठहराया गया है। इस घटना के 2 दिन बाद सीएम योगी ने खुद संज्ञान लिया। एडीजी मेरठ जोन भानु भास्कर की अध्यक्षता में एक जांच टीम बना दी। जिसमें मेरठ मंडायुक्त भानु चंद गोवास्मी और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर शामिल रहे। इनको 5 दिन का समय दिया गया। इस बीच युवराज के पिता राज कुमार मेहता घटना के चश्मदीद से मिले। मीडिया के सामने भी आए और एसआईटी के गठन से संतुष्ट भी थे। SIT ने सीएम को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, लेकिन एक्शन नहीं हुआ। बैरिकेडिंग लगी, दीवार नहीं बनी नोएडा प्राधिकरण की ओर से हादसे के बाद घटना स्थल पर बैरिकेड, क्रैश बीम बैरियर, लेन मार्किंग, रिफ्लेक्टर आदि लगाकर सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं। टूटे हुए नाले की दीवार तो अब तक नहीं बनी है। अभी भी नाले का पानी खाली प्लॉट में भर रहा है। पानी को निकालने के लिए सिचाईं विभाग से रेगुलेटर बनाने का अनुबंध प्राधिकरण ने किया है। अब पढ़िए हादसे की रात क्या-कुछ हुआ… 12.20 बजे (रात) कॉल आया, प्लीज बचा लो, पिता बोले- सुनते ही भागा पिता राजकुमार कहते हैं- शुक्रवार की रात के करीब 12.20 बजे मैं बेड पर लेटा हुआ था। अचानक बेटे युवराज का कॉल आया। वो घर ही आने वाला था, इसलिए मुझे अचानक समझ नहीं आया कि वो मुझे कॉल क्यों कर रहा है? मैंने फोन उठाया। उधर से घबराई आवाज सुनाई दी। बोला- पापा…पापा मैं नाले में गिर गया हूं, मैं मरना नहीं चाहता हूं। मुझे बचा लीजिए। इतना सुनने के बाद मैं जिन कपड़ों में था, उन्हीं में दौड़ पड़ा। सोसाइटी से निकलने से पहले मैंने एक मैसेज टाइप किया और सोसाइटी के ग्रुप पर पोस्ट किया, ताकि मदद मिल सके। बेटे ने जो नाला बताया था, वो हमारी सोसाइटी से 200 मीटर दूर था। मैं दौड़ता हुआ उस नाले तक पहुंचा। यहां 30 मिनट तक बेटे को घने कोहरे और अंधेरे में ढूंढने की कोशिश करता रहा, चिल्ला रहा था कि रिस्पॉन्स मिल जाए। फिर मुझे लगा कि मैं गलत जगह ढूंढ रहा हूं। 12.30 बजे वीडियो बना रहे लोगों से कहा- प्लीज मेरे बेटे को बचाइए इसके बाद मैं रोड के कट की तरफ पहुंचा, जहां एक बिल्डिंग का निर्माण अधूरा पड़ा था। यहां बेसमेंट के लिए गड्‌ढा खोदा गया था। वहां पहुंचकर मैं चिल्लाने लगा, मेरी आवाज सुनकर बेटा भी चिल्लाया…बचाओ…बचाओ। हेल्प मी... की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यहीं पर बेटा गिरा है। मैं थोड़ा और आगे तक गया, कोहरे में दिखा कि कार पानी में है और बेटा उसकी छत पर लेटा हुआ है। वो सड़क से 50 से 60 फीट दूर था। धीरे-धीरे डूब रहा था। वो लगातार मोबाइल की लाइट को जला और बुझा रहा था, ताकि किनारे पर खड़े हम जान सकें कि वो जिंदा है। मैंने डायल-112 पर फोन किया। उस समय करीब साढ़े 12 बज रहे थे। मैं उसे अपने सामने डूबता देख रहा था। वहां और लोग भी थे, लेकिन मदद कोई नहीं कर रहा था। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे, मैंने उन लोगों से कहा- प्लीज, वीडियो नहीं बनाइए, मेरे बेटे की मदद करिए। सर्च ऑपरेशन कैसे चला, ये समझिए 12:50 बजे क्रेन 30 फीट पहुंची, युवराज 50 फीट दूर था रात करीब पौने एक बजे डायल-112 के साथ पुलिस और दमकल की एक गाड़ी मौके पर पहुंची। तब तक कोहरा और घना हो चुका था। विजिबिलिटी लगभग जीरो थी, सबसे पहले पुलिस और अग्निशमन की टीम ने रस्सी फेंककर बचाने का प्रयास किया। मगर, रस्सी युवराज तक नहीं पहुंच रही थी। कोई पुलिस वाला कह रहा था कि पानी बहुत ठंडा है, कैसे जाएं। कोई कह रहा था कि साइट में नीचे सरिया हो सकती हैं। इसके बाद क्रेन मंगवाई गई, मगर क्रेन भी युवराज तक नहीं पहुंच पा रही थी। वो सिर्फ 30-40 फीट तक जा रही थी। वहां मौजूद कोई भी पानी में उतरने की कोशिश नहीं कर रहा था। पिता ने बताया- वो गड्‌ढा शायद 15 से 20 फीट गहरा था, इसलिए गोताखोर वहां होते तो बेटे की जान बच सकती थी। 1.45 बजे SDRF बुलाई, मगर डूब गई कार SDRF की टीम रात 1.15 बजे पहुंची। उसके पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं थे। सब चिल्ला रहे थे बचाओ, कुछ तो करो। पिता कहते हैं- मैं खुद पानी में उतरने को तैयार था, लेकिन पुलिस ने मुझे आगे जाने नहीं दिया। 1.45 बजे के आसपास युवराज की कार पूरी तरह पानी में डूब गई। उसके ऊपर लेटा युवराज भी पानी में समा गया। ये हम सिर्फ देखते ही रहे। 80 कर्मचारियों ने 2 घंटे तक सर्च ऑपरेशन चलाया करीब पौने दो बजे के आसपास NDRF की टीम पहुंची। SDRF और NDRF के 30 कर्मचारी आ चुके थे। पुलिस और अग्निशमन विभाग के 50 कर्मचारी वहां मौजूद थे। करीब 80 लोगों ने रेस्क्यू और सर्च ऑपरेशन चलाया। सर्च लाइट, क्रेन और लैडर की मदद से टीम पानी में गई। 2 घंटे की मशक्कत के बाद युवराज के शव को 4.15 बजे के आसपास निकाला गया। उसे लेकर अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टर ने बताया कि उसकी सांस थम चुकी है। हादसे के बाद क्या कुछ हुआ…
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