Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    नागा बाबा बोले-मोबाइल चोरी हुआ, शिष्यों से संपर्क टूटा:नागा साधुओं का अलग संसार : टेंट में अग्निकुंड, शरीर पर भस्म, जटाएं और रुद्राक्ष

    1 hour ago

    1

    0

    महाकुंभ के बाद माघ मेले में भी नागा साधुओं का अलग संसार नजर आने लगा है। संगम की रेती पर छोटे छोटे टेंट लगाकर नागा बाबा भक्तों, श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दे रहे हैं। हर टेंट में अग्नि कुंड के सामने नागा बैठ रहे हैं। नागाओं के पूरे शरीर पर भस्म लगी है। चंदन (त्रिपुंड तिलक), जटाएं, और रुद्राक्ष की माला पहने यह नागा अलग ही नजर आ रहे हैं। हाथ में त्रिशूल, कमंडल, और चिमटा भी इनकी पहचान है। श्री पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा के नागा साधु अनिल बाबा 25 दिसंबर को ही माघ मेला पहुंच गए थे। 2 तस्वीरें देखिए... 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा स्नान किया अब धूनी रमाकर मकर संक्रांति स्नान की तैयारी कर रहे हैं। नागा बाबा ने बताया- मेरा मोबाइल चोरी हो गया। इससे काफी दिक्कत हो रही है। शिष्यों, भक्तों से बात नहीं हो पा रही है। भक्त हमारे तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। शिष्यों से संपर्क ही टूट गया है। नागा बाबा ने कहा कि महाकुंभ जैसी सुविधाएं नागा को नहीं दी गई। हम अपने जेब से ही खा रहे हैं। श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा दीपक भारती नागा बाबा भी माघ मेला में पंडाल लगाकर बैठे हैं। नागा दीपक भारती जूनागढ़ गुजरात से आए हैं। वह कहते हैं पौष पूर्णिमा स्नान कर लिया। रोज संगम स्नान कर रहे हैं। एक साथ नागा अब मकर संक्रांति का स्नान करेंगे फिर मौनी अमावस्या पर महा स्नान होगा। माघ मेले में गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल व उत्तर प्रदेश के जिलों से नागा साधु पहुंच रह हैं।श्री शंभू पंचदशनाम आवाहन अखाड़ा नागा साधु भिक्षा नहीं मांगते। हाथ नहीं फैलाते। कोई मर्जी से दे जाए तो ही लेते हैं। यही वजह है कि इन नागा साधु को हर प्रकार की सुविधा न मिलने से परेशानी हो रही है। कोतवाल, भंडारी, कोठारी, कारोबारी और पुजारी आवाहन अखाड़े के कर्ताधर्ता श्रीमहंत होते हैं। इनके बाद अष्ट कौशल, थानापति व दो पंच होते हैं। इनके अलावा पांच सरदारों की नियुक्ति की जाती है। इसमें कोतवाल, भंडारी, कोठारी, कारोबारी और पुजारी होते हैं। आवाहन अखाड़ा में शामिल होने से पहले व्यक्ति को मन, कर्म और वचन से शुद्ध होना पड़ता है। संन्यास मिलने के बाद गुरु की सेवा सर्वोपरि होती है। कड़े अनुशासन होते हैं व्यक्ति को संसार के समस्त सुखों को त्यागना पड़ता है। जो ऐसा नहीं करता उसे अखाड़े से बाहर कर दिया जाता है। कड़ा अनुशासन होने के कारण अखाड़े में संतों की संख्या पहले की अपेक्षा कम है। मौजूदा समय 15 हजार के लगभग संत हैं। इसमें 12 हजार नागा संत हैं। महामंडलेश्वर सात हैं। स्थापना काल से आवाहन अखाड़ा सनातन धर्म की रक्षा के लिए संघर्षरत है। हमारे अखाड़ा के संतों ने मुगलों, अफगानियों और अंग्रेजों से युद्ध करके मठ-मंदिरों के साथ सनातन धर्मावलंबियों की रक्षा की है। अखाड़े में भिक्षा मांगना वर्जित है। हम इसे स्वाभिमान के विपरीत मानते हैं। भिक्षा मांगने वाले संत के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाती है। नींव 547 ईस्वी में पड़ी माना जाता है कि आवाहन अखाड़ा की नींव 547 ईस्वी में पड़ी। महंत रत्ना गिरि, श्रीमहंत हंस दीनानाथ गिरि, श्रीमहंत मारिच गिरि, भगहरण पुरी, उदय पुरी, गणेश पुरी, चंदन वन, ओंकार वन, हीरा भारती आदि संतों ने मिलकर अखाड़े की नींव रखी। उस समय चार से दो से तीन सौ संतों का समूह था। आदिशंकराचार्य ने अखाड़े के स्वरूप को व्यापक किया। उन्हें भाला, त्रिशूल, फरसा चलाने में परांगत किया। तब अखाड़े से 15 से 20 हजार के लगभग नागा संत जुड़े। इसमें दो से तीन हजार संतों का अलग-अलग समूह बनाकर केरल, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, बंगाल व उत्तर प्रदेश में भेजा गया, क्योंकि इन प्रदेशों में मतांतरण करने वालों की संख्या अधिक थी। उन्हें निर्देश दिया गया कि जिस क्षेत्र में जाएं वहां मूर्ति की स्थापना करके भजन-पूजन करें।
    Click here to Read more
    Prev Article
    लखनऊ टुडे, 12 जनवरी - आपके काम की खबर:उत्तर प्रदेश AI और स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन में शामिल होंगे CM, विद्युत सखियों की बैठक
    Next Article
    चोर इतनी तेज भागे कि बाइक से गिर पड़े, CCTV:गिरते ही लोगों ने तीनों को दौड़ाकर पकड़ा, लखनऊ में घर का ताला तोड़ रहे थे

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment