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    OT टेक्नीशियन अली ने दिल्ली में ली ऑपरेशन की ट्रेनिंग:डॉ. अफजल का खास परवेज गया जेल, शिवम के मोबाइल में मिले किडनी डोनर के 3 ग्रुप

    1 hour ago

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    किराए पर अस्पतालों का ओटी (ऑपरेशन थियेटर) लेकर किडनी ट्रांसप्लांट जैसा बड़ा ऑपरेशन करने वाले मुद्स्सिर अली सिद्दीकी उर्फ डॉ. अली ने बाकायदा दिल्ली में इसकी ट्रेनिंग ली थी। डॉ. रोहित की टीम में अली अकेला नहीं, बल्कि अन्य ओटी स्पेशलिस्ट भी शामिल रहे हैं, जिन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया। पुलिस की जांच में यह बात सामने आयी है। 29 मार्च को किया गया था ऑपरेशन रावतपुर पुलिस ने शहर में चल रहे किडनी के काले कारोबार का खुलासा किया था। पुलिस ने रावतपुर के केशवपुरम स्थित आहूजा हॉस्पिटल में अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट होने की सूचना पर छापा मारा तो आहूजा अस्पताल की संचालक डॉ. प्रीती आहूजा उनके पति सुरजीत सिंह आहूजा से पूछताछ हुई तो उन्होंने पूरी कहानी बयां कर दी। कल्याणपुर के मेडलाइफ हॉस्पिटल में बिहार के बेगूसराय का डोनर आयुष कुमार और प्रिया अस्पताल के डीलक्स रूम में मुजफ्फर नगर की पारुल तोमर भर्ती मिली। इनका 29 मार्च को आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन किया गया था। किडनी के इस काले कारोबार का सरगना डॉ. रोहित को बताया गया। उसके लिए कानपुर में काम करने वाले एंबुलेंस ड्राइवर शिवम अग्रवाल, मेडलाइफ अस्पताल के मालिक राजेश कुमार व राम प्रकाश कुशवाहा प्रिया अस्पताल के संचालक नरेंद्र सिंह को जेल भेजा गया। इसके बाद डॉ. रोहित, डॉ. अफजल, डॉ. वैभव मुद्गल, डॉ. अमित चौधरी के नाम सामने आए, लेकिन इनमें से कोई भी सर्जन नहीं है। डॉ अली तक पुलिस पहुंची तो पता चला कि वह भी ओटी मैनेजर है। यह सभी डॉक्टर अभी फरार हैं, जिसके बाद यह बात पुलिस को भी हैरान कर रही थी कि किडनी ट्रांसप्लांट इतनी सफाई से ओटी मैनेजर ने कैसे कर दिया। सूत्रों के मुताबिक रावतपुर पुलिस जांच में आगे बढ़ी तो पता चला कि डॉ अली ने दिल्ली में कुछ साल पहले किडनी ट्रांसप्लांट की पूरी ट्रेनिंग ली है। ट्रेनिंग लेने के बाद वह किडनी ट्रांसप्लांट के कई ऑपरेशन में शामिल रहा है। पुलिस के मुताबिक डॉ. रोहित की टीम में शामिल कई और ओटी टेक्नीशियन भी इसकी ट्रेनिंग ले चुके हैं। इसी के चलते यह लोग 6 से 7 घंटे चलने वाले किडनी ट्रांसप्लांट के ऑपरेशन को इतनी साफगोई से कर सके। बता दें कि किडनी डोनर आयुष की हालत ठीक है। उसे लखनऊ के अस्पताल से छुट्टी मिल चुकी है जबकि पारुल की हालत भी सामान्य बतायी जा रही है। डॉ अफजल और अपनी अग्रिम जमानत कराने आया था परवेज वहीं किडनी कांड के काले कारोबार में शामिल डॉ. अफजल का कारखास और ड्राइवर परवेज सैफी को बुधवार पुलिस ने जेल भेज दिया। 500 रुपये के नोटों की गड्डियों के साथ उसका और डॉ. अफजल का वीडियो वायरल होने के बाद से पुलिस उसके पीछे लगी थी। उसे रावतपुर के पास से गिरफ्तार किया गया है। सैफी से 9.05 लाख रुपए पुलिस ने बरामद किए हैं। पुलिस को उसने बताया कि रुपए डॉ. अफजल ने दिए थे। इन रुपयों से उसकी और डॉ. अफजल की जमानत कराने की फिराक में था। कानपुर में कुछ वकीलों से उसकी बात चल रही थी। वकील से बातचीत के दौरान वह पकड़ा गया। किडनी के अवैध कारोबार में शामिल परवेज सैफी को पुलिस ने मंगलवार की रात गिरफ्तार किया था। डीसीपी एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक वह वकीलों के संपर्क में था और मुकदमे से बचने और अग्रिम जमानत लेने के प्रयास में जुटा था। पूछताछ में उसने बताया कि मुजफ्फर नगर की पारुल तोमर के ऑपरेशन के बाद डॉ. अफजल को 22 लाख रुपये मिले थे, जिसमें से 9.50 लाख रुपये उसे दिए थे। कुछ रुपये इधर उधर छिपने और भागने के दौरान खर्च हो गए। डीसीपी के मुताबिक बुधवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया जहां से जेल भेज दिया गया। परवेज सैफी बागपत के शिंघावली अमीन नगर सराय देवीगंज का रहने वाला है। डीसीपी ने बताया कि तीन टीमें अभी भी गाजियाबाद, मेरठ में हैं जो गिरोह से जुड़े डॉक्टरों की तलाश में जुटी हैं। फरार सभी आरोपियों के मोबाइल स्विच ऑफ हैं ऐसे में उनकी लोकेशन ढूंढने में मुश्किल आ रही है। 12 लोगों की टीम ट्रांसप्लांट कराने आई थी कानपुर पूछताछ में परेवज ने बताया कि पारूल तोमर के ट्रांसप्लांट के लिए वह 10 दिन पहले डॉ अफजल को लेकर आया था। यहां कल्याणपुर के सत्यम होटल में वह रुका था। ट्रांसप्लांट के बाद उसकी गाड़ी में डॉ वैभव, डॉ अनुराग उर्फ अमित व अफजल को लेकर मेरठ रवाना हो गया था। उसने बताया कि ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ रोहित, वैभव, अनुराग, अफजल, ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार व कुलदीप सिंह जाधव, डॉ अली समेत 12 लोगों की टीम कानपुर आई थी। पारूल के ट्रांसप्लांट के दौरान ऑपरेशन थिएटर में डॉ रोहित, डॉ अफजल, डॉ अली, कुलदीप सिंह जाधव व राजेश समेत 3 अन्य लोग थे। डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि एजेंट शिवम अग्रवाल के मोबाइल से अब तक 3 डोनर और रिसीवर के वीडियो फोटो मिले है, जो ट्रांसप्लांट के पहले के है। टेलीग्राम पर वह किडनी डोनर, किडनी एजेंट व लिवर प्लांट डोनर नाम के ग्रुपों से जुड़ा था, जिसमें तकरीबन 800 से ज्यादा मेंबर है। डीसीपी वेस्ट ने बताया कि किडनी डोनर ग्रुप के जरिए शिवम डॉ रोहित, अफजल और अली के संपर्क में आया था। शिवम ने तीनों को डायरेक्ट मैसेज किया था, जिसमें डॉ अली के साथ उसका पहला इंटर फेस हुआ था। लोकेशन छिपाने के लिए WIFI का इस्तेमाल करता था डॉ रोहित डीसीपी के मुताबिक डॉ रोहित बहुत ही शातिर किस्म का है। वह चार मोबाइल नंबरों का इस्तेमाल करता था, जिसमें डेडिकेटेड सिम का इस्तेमाल करता था। एक नंबर से वह मेरठ के लोगों के संपर्क में था। दूसरे नंबर से वह सिर्फ शिवम से बात करता था, तीसरे का इस्तेमाल पर्सनल लोगों के लिए करता था, जबकि चौथे नंबर से वह दिल्ली NCR के एजेंट नवीन पांडेय से बात करने के लिए इस्तेमाल करता था। पसर्नल नंबर छोड़ कर वह सभी से वाट्सएप कॉल के जरिए ही बात करता था। IP एड्रेस छिपाने के लिए वह WIFI नेटवर्क का इस्तेमाल करता था, इसी से वह वाट्सएप भी चलाता था। IP एड्रेस की लोकशन लखनऊ, दिल्ली NCR की मिली है। वहीं उन्होंने बताया कि एजेंट नवीन पांडेय और शिवम अग्रवाल की सामने आई ऑडियो क्लिप 19 नंवबर की है, जिसके बाद अब पुलिस टीम उस दिन दिल्ली के MAX हॉस्पिटल में लगे कर्मचारियों व डॉक्टरों की कुंडली खंगालने में जुटी है।डीसीपी ने बताया कि MAX हॉस्पिटल को नोटिस देने की भी तैयारी की जा रही है।
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