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    पंचायत चुनाव में डबल वोटर लिस्ट पर बवाल:राज्य निर्वाचन आयोग और मुख्यमंत्री को सौंपे गए दो अलग-अलग ज्ञापन

    15 hours ago

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    प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारी के बीच मतदाता सूची को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने राज्य निर्वाचन आयोग को ज्ञापन देकर साफ कहा है कि एक ही ग्राम पंचायत के लिए दो अलग-अलग वोटर लिस्ट स्वीकार नहीं होंगी। संगठन ने मांग की है कि सिर्फ “स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन” के तहत जारी अंतिम मतदाता सूची को ही पंचायत चुनाव में लागू किया जाए। इसी के साथ संगठन ने प्रदेश में प्रस्तावित करीब 100 नई नगर पंचायतों के गठन को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ाया है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलग से ज्ञापन भेजा गया है। एक ग्राम पंचायत, दो मतदाता सूची पर संगठन ने जताई आपत्ति संगठन का कहना है कि अभी विशेष पुनरीक्षण अभियान के तहत वोटर लिस्ट अपडेट की जा रही है, लेकिन पंचायत चुनाव के लिए अलग से भी सूची तैयार करने की बात सामने आ रही है। अगर ऐसा होता है तो एक ही गांव के लिए दो आधारों पर मतदाता सूची तैयार होगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि इससे प्रशासनिक भ्रम पैदा होगा, कई पात्र मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं, चुनाव के बाद कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं और चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। संगठन ने स्पष्ट कहा है कि “एक ग्राम–एक पंचायत–एक मतदाता सूची” का सिद्धांत लागू होना चाहिए। अंतिम रूप से प्रकाशित और वैध रूप से अपडेट की गई सूची को ही चुनाव में इस्तेमाल किया जाए। चुनाव से पहले नियम साफ करने की मांग ज्ञापन में कहा गया है कि अगर दोहरी प्रक्रिया अपनाई गई तो आपत्तियों, दावों और अदालतों में मुकदमों की संख्या बढ़ सकती है। इससे चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। संगठन ने आयोग से तत्काल स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की है। 100 नई नगर पंचायतों पर सरकार से समयबद्ध फैसला मांग दूसरे ज्ञापन में संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि प्रदेश में प्रस्तावित लगभग 100 नई नगर पंचायतों के गठन की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए। संगठन का तर्क है कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए यह कदम जरूरी है। संगठन का कहना है कि नई नगर पंचायतों के गठन से •शहरी आबादी का प्रतिशत बढ़ेगा •निवेश और उद्योग को बढ़ावा मिलेगा •स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा •सड़क, नाली, बिजली, पानी जैसी सुविधाएं बेहतर होंगी। पांच साल से पहले ग्राम पंचायतों के विलय पर उठे सवाल संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि पहले कुछ ग्राम पंचायतों को उनका पांच साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही शहरी क्षेत्र में मिला दिया गया, जिससे प्रतिनिधित्व और प्रशासनिक संतुलन बिगड़ा। मांग की गई है कि पंचायत चुनाव से पहले ही सीमांकन और अधिसूचना की पूरी प्रक्रिया खत्म की जाए, ताकि बाद में कोई विवाद न हो। सरकार और आयोग के लिए बढ़ी चुनौती पंचायत चुनाव की तैयारी और शहरी विस्तार जैसे दो बड़े मुद्दों को एक साथ उठाकर संगठन ने सरकार और निर्वाचन आयोग के सामने सीधी चुनौती रख दी है। अब नजर इस बात पर है कि आयोग वोटर लिस्ट के मुद्दे पर क्या फैसला लेता है और सरकार नई नगर पंचायतों के गठन पर कितनी तेजी दिखाती है।
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