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    पहचान छिपाने को बर्खास्त सिपाही ने भिखारी को जिंदा जलाया:हाथरस में प्लेटफॉर्म पर मिला था शव, 13 मुकदमों का आरोपी, सैफई से जली हालत में अरेस्ट

    6 hours ago

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    यूपी के हाथरस में खुद की पहचान छिपाने और जेल जाने से बचने के लिए क्रिमिनल सिपाही लावारिश भिखारी को जिंदा जलाकर मार डाला। पुलिस को गुमराह करने के लिए लाश के पास ही अपना आधार कार्ड और जला हुआ मोबाइल छोड़ दिया। हत्या को अंजाम देने के दौरान ज्वलनशील पदार्थ से वह खुद बुरी तरह जल गया। पर पुलिस से बचता फिरता रहा। चोरी-छिपे जिला अस्पताल में भर्ती हुआ, जहां से सैफई पीजीआई रेफर हो गया। अस्पताल में खुद को प्राइवेट गाड़ी चालक और सीएनजी सिलेंडर ब्लास्ट की झूठी कहानी बताई। पुलिस ने आरोपी को एक महीने बाद सैफई से गिरफ्तार कर लिया है। जीआरपी टीम ने बताया- आरोपी पहले यूपी पुलिस में सिपाही था। बरेली में पोस्टेड था। ड्यूटी के दौरान उस पर हत्या समेत 13 मुकदमे दर्ज हुए। जिसके चलते 2013 में बर्खास्त कर दिया गया था। जेल जाने से बचने के लिए उसने अपनी कदकाठी से मिलते-जुलते लावारिश भिखारी की जिंदा जलाकर हत्या कर दी थी। आरोपी पर पहले से हत्या समेत 13 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अब पूरा मामला सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए... जीआरपी हाथरस की टीम ने 12 मार्च को हाथरस रोड स्टेशन के प्लेटफॉर्म से एक जली हुई लाश बरामद की थी। बाद में पता चला यह 40-45 वर्ष का एक लावारिश भिखारी था, जो कई वर्षों से प्लेटफॉर्म पर ही रहकर भीख मांगता था। पुलिस को शव के पास से एक आधा जला हुआ आधार कार्ड और एक जला हुआ मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही थी, पर युवक के परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा था। पुलिस बागला जिला अस्पताल से भेजी गई मंथली रिपोर्ट में पता चला कि 14 मार्च को एक युवक गंभीर रूप से जली हुई हालत में भर्ती हुआ था, जिसे सैफई रेफर कर दिया गया है। रिकॉर्ड चेक करने पर आधार कार्ड से मिली डिटेलिंग जीआरपी हाथरस सिटी थाना प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- पुलिस से मिली इंफॉर्मेशन के तहत जब जिला अस्पताल में भर्ती मरीज के एडमिट पेपर की जांच की गई तो पता चला, इसका नाम और पता, 12 मार्च को भिखारी के शव के पास मिले आधार कार्ड के नाम-पते से हूबहू मैच कर रहा था। अस्पताल पहुंचकर पूछताछ की गई तो पता चला कि मरीज को सैफई रेफर किया जा चुका है। पुलिस उसे खोजते हुए सैफई पीजीआई पहुंची तो वहां पर भी मरीज ने वही नाम-पता लिखवा रखा था। जिसके बाद उसे हिरासत में लेकर मंगलवार रात हाथरस ले आया गया। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। आरोपी की पहचान रामवीर सिह (55) पुत्र सीताराम के रूप में हुई है। अब जानिए क्यों और कैसे की थी हत्या... जीआरपी प्रभारी सुयश सिंह ने बताया- जांच के दौरान पता चला रामवीर सिंह मूलरूप से मैनपुरी के किशनी थाना क्षेत्र अंतर्गत बघौनी गांव का रहने वाला है। वह पहले यूपी पुलिस में सिपाही था। करीब 23 वर्षों तक बरेली जोन में पोस्टेड रहा। रामवीर सिंह आपराधिक प्रवृत्ति का था। ड्यूटी के दौरान उसके खिलाफ वर्ष 2012-13 में हत्या, हत्या का प्रयास समेत कुल 13 मुकदमे दर्ज हुए। जिनके चलते उसे 2013 में पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। उसकी लास्ट पोस्टिंग बरेली के सुभाषनगर थाने में थी। कई दिनों से था फरार, जेल जाने से बचने के लिए कर दी हत्या जीआरपी ने बताया- बर्खास्त किए जाने के बाद रामवीर सिंह कई दिनों से फरार चल रहा था। पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसीलिए गिरफ्तारी और जेल जाने से बचने के लिए उसने षडयंत्र रचा। उसने एक ऐसे व्यक्ति को ढूंढा, जिसका कोई जानने वाला ना हो। तलाश हाथरस रोड रेलवे प्लटेफॉर्म पर रहने वाले एक भिखारी पर खत्म हुई। प्लेटफॉर्म पर ना तो कोई कर्मचारी रहता था, ना ही रात के समय कोई ट्रेन रुकती थी। 11-12 मार्च की देर रात सोते समय उसने भिखारी पर केरोसिन छिड़ककर आग लगा दी। जिससे भिखारी की जिंदा जलकर मौत हो गई। पुलिस को गुमराह करने के लिए उसने अपना जला हुआ आधार कार्ड और मोबाइल फोन भी शव के पास रख दिया। जलने के बावजूद दो दिन तक छिपता रहा केरोसिन छिड़कने के दौरान रामवीर सिंह खुद भी बुरी तरह जल गया। पकड़े जाने के डर से वह दो दिनों तक छिपता रहा। मेडिकल स्टोर से दवा लेकर अपना खुद ही इलाज करता रहा। आखिरकार 14 मार्च को हाथरस जिला अस्पताल में एडमिट होने पहुंचा। 40 परसेंट जला होने के कारण रामवीर सिंह की हालत बेहद गंभीर थी तो डॉक्टरों ने उसे सैफई पीजीआई के लिए रेफर कर दिया गया। वह 14 मार्च की रात ही सैफई में जाकर भर्ती हो गया। पेशेंट रजिस्ट्रेशन डिटेल्स से पकड़ाया, खुद को बताया- गाड़ी चालक, सिलेंडर ब्लास्ट की कहानी जीआरपी इंस्पेक्टर सुयश सिंह ने बताया- जिला अस्पताल से मंथली रिपोर्ट भेजी गई थी, जिसमें बताया गया था कि 14 मार्च को एक मरीज 40 परसेंट जली हालत में भर्ती हुआ था। भर्ती होने के समय राजवीर सिंह ने खुद को प्राइवेट गाड़ी चालक बताया था। साथ ही बताया था कि गाड़ी चलाते समय सीएनजी सिलेंडर ब्लास्ट होने के कारण वह जल गया था। पर राजवीर सिंह ने हाथरस जिला अस्पताल और सैफई पीजीआई में अपना असली नाम और पते से पेशेंट पर्चा बनवाया था। जिसके कारण पुलिस ने उसे ट्रेस कर लिया। फिरोजाबाद, अलीगढ़, मुरादाबाद, हरदोई, मैनपुरी और बंदायूं में वॉन्टेड जीआरपी ने बताया- राजवीर सिंह के खिलाफ 2012 से 2013 के बीच फिरोजाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, मैनपुरी, बदायूं और कानपुर देहात में कुल 13 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। 2012 में बदायूं के सिविल लाइंस थाने में हत्या और 2013 में फिरोजाबाद के मटसैना थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा पंजीकृत है। 2013 में मटसैना थाने से गैंगस्टर एक्ट भी लगाया जा चुका है। इकलौते बेटे की मौत, 5 बेटियां मां के साथ रह रहीं पुलिस ने बताया- राजवीर सिंह का परिवार मैनपुरी में ही रहता है। उसके कुल 6 बच्चे थे, जिनमें से इकलौते बेटे की मौत हो चुकी है। परिवार में 5 बेटियां बची हैं, जो अपनी मां के साथ रहती हैं। पुलिस परिवार से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। ----------------------------------------- ये खबर भी पढ़िए… संभल में ईदगाह-इमामबाड़ा को बुलडोजर चल रहा:भीड़ को अफसरों ने हटाया, 5 थानों की फोर्स और PAC तैनात संभल में ईदगाह और इमामबाड़े पर गुरुवार सुबह 8 बजे से बुलडोजर की कार्रवाई चल रही है। इमामबाड़ा गिरा दिया गया है। अब ईदगाह को चार बुलडोजरों से तोड़ा जा रहा है। मौके पर 5 थानों की पुलिस फोर्स और एक कंपनी PAC तैनात की गई है। इसी बीच, गांव के लोग मौके पर जुट गए। विरोध की आशंका को देखते हुए अफसरों ने उन्हें वहां से हटा दिया। प्रशासन के मुताबिक, करीब 7 बीघा चारागाह की जमीन पर ईदगाह और खाद गड्ढे की भूमि पर इमामबाड़ा बनाया गया था। पूरी खबर पढ़िए…
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