Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    पॉजिटिव सेल्फ टॉक ने हालेंड को बनाया सुपर स्टार:अर्लिंग हालेंड ने बताया- थकान सिर्फ दिमाग में होती है; विज्ञान भी यही कहता है

    3 hours ago

    1

    0

    हालिया फुटबॉल वर्ल्ड कप में नॉर्वे के अर्लिंग हालेंड 7 गोल दागकर टूर्नामेंट के चौथे सबसे सफल खिलाड़ी रहे। 6 फुट 5 इंच लंबे इस खिलाड़ी की फुर्ती और फिटनेस भी चर्चा में रही। उनकी इस शानदार परफॉरमेंस का राज केवल उनकी शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि उनकी गजब की मानसिक मजबूती है। पिछले साल की एक घटना है, जब मैनचेस्टर सिटी की ट्रेनिंग फैसिलिटी में हालेंड एक ‘हाइपोक्सिक चैंबर’ में एक्सरसाइज बाइक चला रहे थे। यह एक ऐसा कमरा होता है, जहां पहाड़ों जैसी ऊंचाई और तेज गर्मी का माहौल बनाकर हवा में ऑक्सीजन काफी कम कर दी जाती है। हालेंड को पूरी ताकत लगाकर अपना हार्ट रेट 150 बीट्स प्रति मिनट तक ले जाना था। उन्होंने कैमरे की तरफ देखते हुए कहा था कि वह यह बिल्कुल नहीं करना चाहते, लेकिन फिर भी करेंगे क्योंकि यह उनके शरीर और दिमाग दोनों के लिए अच्छा है। हालेंड का खुद को थकावट की लिमिट से आगे ले जाने का तरीका बेहद असरदार है। उनका मानना है कि अगर आप खुद से कहेंगे कि आप थक गए हैं, तो आप सच में थक जाएंगे। लेकिन अगर आप खुद से कहेंगे कि ‘मैं इतना भी नहीं थका हूं, सब ठीक है,’ तो आपको थकान महसूस नहीं होगी। उनका सीधा सा फंडा है कि हमारे शरीर में हमारी सोच से कहीं ज्यादा सहने की ताकत होती है और यह सब सिर्फ दिमाग का खेल है। बास्केटबॉल सुपरस्टार लेब्रोन जेम्स और अमेरिकी फुटबॉल के दिग्गज टॉम ब्रैडी जैसे चैम्पियन खिलाड़ी भी इसी सोच के साथ मैदान में उतरते रहे हैं। सालों से खेल मनोवैज्ञानिक भी मानते आए हैं कि खुद से सकारात्मक बातें करना (पॉजिटिव सेल्फ-टॉक) एक बेहतरीन टूल है, और अब विज्ञान भी यही मानता है। वेल्स की बांगोर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेम्स हार्डी और उनके साथियों द्वारा 2014 में की गई एक रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि एथलीट इसलिए हार नहीं मानते क्योंकि उनकी मांसपेशियों की ताकत खत्म हो जाती है, बल्कि वे इसलिए रुकते हैं क्योंकि उनका दिमाग मान लेता है कि अब दर्द या मेहनत बर्दाश्त से बाहर है। इस रिसर्च में कुछ युवाओं को साइकिल चलाने को कहा गया। जिस ग्रुप ने एक्सरसाइज के दौरान खुद से सकारात्मक बातें कीं, उनकी क्षमता में 18 प्रतिशत का सुधार देखा गया। दिलचस्प बात यह थी कि उनकी हार्ट रेट और शारीरिक मेहनत में कोई बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन खुद से अच्छी बातें करने की वजह से उन्हें वह काम आसान लगा। हालेंड जब भी मैदान पर थकते हैं, तो खुद से बस यही कहते हैं कि ‘मैं थका नहीं हूं।’ खुद से ‘तुम’ कहकर बात करना भी देता है एनर्जी यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के मनोवैज्ञानिक एथन क्रॉस की रिसर्च के अनुसार, खुद से बात करते समय किसी दूसरे व्यक्ति की तरह (जैसे ‘तुम’ कहकर) बात करना और भी ज्यादा फायदेमंद होता है। इसलिए, अगर आप भी चैम्पियन जैसी एनर्जी पाना चाहते हैं, तो अगली बार जब आप दौड़ते हुए, जिम में, या ऑफिस का काम करते हुए थकने लगें, तो खुद से बस यही कहें कि ‘तुम थके नहीं हो।’
    Click here to Read more
    Prev Article
    पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख ठगी का आरोप:नवीन जिंदल से पहचान बताकर काम में पार्टनर बनाने ठेकेदार को फंसाया; FIR के आदेश
    Next Article
    शुभमन गिल वनडे में नंबर-1 बनने से एक अंक दूर:डेरिल मिचेल टॉप पर कायम, रूट 2020 के बाद टॉप-10 में शामिल

    Related स्पोर्ट्स Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment