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    पाकिस्तान के लिए जासूसी कर रहा था प्रयागराज का सुमित:राजस्थान की इंटेलीजेंस ने पकड़ा, पिता बोले- उसने देश से गद्दारी की, सजा मिले

    3 hours ago

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    "11 साल पहले आखिरी बार सुमित घर आया था। इसके बाद फिर उसका चेहरा तक नहीं देख पाया। फोन पर भी बात नहीं करता था। मां कभी फोन करती भी थी तो व्यस्त होने की बात कहकर फोन काट देता। उसने क्या किया, कैसे किया, हमें कुछ पता नहीं। उसके किए से हमारा कोई लेना-देना भी नहीं। उसने जैसा किया, वैसा भरेगा।' यह कहते हुए प्रयागराज के लाहुरपार में रहने वाले बेनीमाधव का गला रुंध गया और आंखें भी भर आईं। बेटे के लिए चिंता है, इस बात पर बोले- 'जिस संतान को जन्म दिया, उसकी इस हालत पर मन में पीड़ा है और इसे छिपा नहीं सकता। लेकिन उसने जो काम किया, वह देश से गद्दारी है। इसके लिए कानून उसे सजा देगा।' दो दिन पहले किया गया था गिरफ्तार बेनीमाधव उस सुमित कुमार के पिता हैं जिसे दो दिन पहले राजस्थान की इंटेलिजेंस टीम ने पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में असम के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह वायुसेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान के हैंडलर्स तक पहुंचा रहा था। उसने लड़ाकू विमानों की लोकेशन, मिसाइल सिस्टम और अधिकारियों-कर्मचारियों से संबंधित गोपनीय जानकारी भी साझा की। असम के एयरफोर्स स्टेशन पर तैनाती थी डिब्रूगढ़ (असम) के चबुआ एयरफोर्स स्टेशन में MTS (मल्टी टास्किंग स्टाफ) के पद पर कार्यरत था। वह मूल रूप से प्रयागराज के बम्हरौली में स्थित लाहुरपार गांव का रहने वाला है। यहां उसके पिता बेनीमाधव और तीन भाई रहते हैं। सुमित के बारे में जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम उसके घर पहुंची। परिवारवालों से बातचीत में सामने आया कि वह पिछले 11 साल से आया ही नहीं। तीसरे नंबर का बेटा पिता ने बताया, सुमित उनके पांच बेटों में तीसरे नंबर का है। सबसे बड़ा रामराज, दूसरे नंबर का रामशरन और सबसे छोटा रजनीश है जो गांव में ही रहते हैं। गांव में रहने वाले तीनों बेटे दूध बेचने का काम करते हैं। रामराज व रामशरन की शादी हो चुकी है जबकि रजनीश अविवाहित है। चौथे नंबर का राजकुमार एयरफोर्स में ही फोर्थ क्लास में लद्दाख में तैनात है। दूध पहुंचाने का काम करता था 2011 में सुमित की नौकरी लगी। उनके घर से कुछ दूर पर ही एयरफोर्स कैंपस है। उनके साथ सुमित भी अफसरों के घर में दूध पहुंचाने का काम करता था। इसी दौरान वह एक अफसर के संपर्क में आया। 2011 में उस अफसर का ट्रांसफर हुआ और वह सुमित को भी अपने साथ ले गए। इसके बाद उसे वहीं नौकरी दिला दी। कुछ सालों तक तो ठीक रहा लेकिन फिर उसने आना-जाना और यहां तक कि परिवारवालों से बातचीत भी कम कर दी। बहुत कहने पर 2005 में घर में हुए भंडारे में शामिल होने के लिए आया। उसकी पत्नी व 12 साल का बेटा भी साथ था। इसके बाद वह लौटकर नहीं आया। फोन से बातचीत भी बंद कर दी। शिलांग की युवती से की शादी घर में सुमित की भाभी रानी भी मिलीं। उन्होंने बताया, सुमित अपने भाई राजकुमार की शादी में भी नहीं आया। नौकरी में ही उसका तबादला एक बार शिलांग में हुआ। वहीं उसका एक लड़की से संपर्क हुआ। इसके बाद उसने उससे शादी कर ली। कुछ दिनों बाद सुमित का ट्रांसफर असम हो गया। लेकिन वह उसके साथ नहीं गई। उन लोगों का परिवार से कोई संपर्क नहीं है। आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं बेनीमाधव ने बताया, गांव में पूछ लीजिए, परिवार की माली हालत किसी से छिपी नहीं है। नौकरी लगने के बाद से ही सुमित का व्यवहार बदल गया। कभी एक रुपये की मदद नहीं की। मैंने गाय-भैंस पाल रखे हैं और इनका दूध बेचकर ही परिवार पालता हूं । तीनों बेटे इसी में हाथ बंटाते हैं। न्यूज से मिली जानकारी वह कहते हैं, सुमित की गिरफ्तारी के संबंध में कोई सूचना पुलिस या एयरफोर्स से नहीं मिली। न्यूज में उसकी फोटो आई तो गांववालों से जानकारी मिली। सुमित ने क्यों और किसलिए ऐसा किया, इसका कुछ पता नहीं। उसके किसी भी काम से परिवार का कोई लेना देना नहीं है।
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