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    प्रकृति से जितना लिया, उससे दोगुना लौटाना होगा:CSJMU में जलवायु परिवर्तन पर मंथन; विशेषज्ञों ने कहा- अब पुराने तरीकों से नहीं बचेगा पर्यावरण

    1 hour ago

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    छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) के समाज कार्य विभाग में मंगलवार को जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण सुरक्षा को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि हम अपनी जरूरतों के लिए प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो हमारी जिम्मेदारी है कि हम उससे दोगुनी संपदा समाज को वापस लौटाएं, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित धरती छोड़ी जा सके। सतत विकास ही एकमात्र समाधान कार्यशाला में सोशल साइंस के डीन प्रोफेसर संदीप कुमार सिंह ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर सिर्फ मौसम पर नहीं, बल्कि हमारे समाज, राजनीति और संस्कृति पर भी पड़ रहा है। मौजूदा हालात प्रकृति के अनुकूल नहीं हैं। ऐसे में हमें 'सस्टेनेबल डेवलपमेंट' यानी सतत विकास की ओर गंभीरता से ध्यान देना होगा। वहीं स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेस के डॉ. विशाल चंद्रा ने वैज्ञानिक कारणों पर चर्चा करते हुए बताया कि किस तरह बिगड़ता पर्यावरण हमारे दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा है। कुदरत से जितना लिया, उससे दोगुना लौटाएं कार्यक्रम में कार्तिक शिक्षण संस्थान के निदेशक ने छात्रों को जागरूक करते हुए एक खास फॉर्मूला दिया। उन्होंने कहा कि यह हमारा सामाजिक उत्तरदायित्व है कि हम प्राकृतिक संपदाओं को बचाने के लिए नए तरीके खोजें। अगर हम अपने लाभ के लिए प्रकृति का उपयोग करते हैं, तो उसके बदले में दोगुनी नई संपदा (जैसे पौधे लगाना या जल संरक्षण) का सृजन करना चाहिए। तभी समाज में संतुलन बना रहेगा। प्रतियोगिताओं में छात्रों ने दिखाया दम कार्यशाला के दौरान छात्रों के बीच स्पीच, निबंध और क्विज कॉम्पिटिशन भी कराया गया। इसमें छात्रों ने पर्यावरण बचाने के अपने आइडिया साझा किए: स्पीच कॉम्पिटिशन: एमएसडब्ल्यू द्वितीय वर्ष के कालका प्रसाद ने बाजी मारते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। संस्कृति पाण्डेय दूसरे और अश्विनी कुमार तीसरे स्थान पर रहे। निबंध प्रतियोगिता: आर्यन कुमार ने पहला स्थान हासिल किया, जबकि खुशी त्रिपाठी दूसरे और तुषार कुमार तीसरे नंबर पर रहे। क्विज कॉम्पिटिशन: कोमल ने प्रथम, शिप्रा द्विवेदी ने द्वितीय और प्रियांशी देवी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस मौके पर सहायक निदेशक डॉ. मानस उपाध्याय ने सस्टेनेबिलिटी के विभिन्न पहलुओं पर विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. एस.पी. वर्मा, डॉ. ए.पी. सिंह, डॉ. उर्वशी, डॉ. सत्येंद्र सिंह चौहान और बुशरा बरकाती समेत विभाग के सभी छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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