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    प्रतीक को 13 दिन में 2 बार हार्ट अटैक आया:सगा बेटा नहीं होने पर भी मुलायम ने अखिलेश के बराबर रखा; जिंदगी से जुड़े किस्से

    23 hours ago

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    अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव को 13 दिन में 2 बार दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ा। 30 अप्रैल को लखनऊ के चौधरी चरण सिंह एयरपोर्ट पर प्रतीक फ्लाइट से उतरकर VIP लाउंज की तरफ आ रहे थे। तभी उन्हें सीने में तेज दर्द उठा था। चक्कर आने से चलते-चलते गिर पड़े थे। सहयोगी उन्हें लखनऊ के मेदांता हॉस्पिटल लेकर गए। डॉक्टरों ने बताया कि प्रतीक को दिल का दौरा पड़ा है। अपर्णा भी हॉस्पिटल पहुंची थीं। उस वक्त प्रतीक की जान 2 वजह से बच गई थी। पहला- दौरा माइनर था। दूसरा- समय रहते वह अस्पताल पहुंच गए थे। लेकिन, 13 मई को पड़े दिल के दौरे में उनकी जान नहीं बच पाई। सुबह 6.30 बजे जब प्रतीक को सिविल हॉस्पिटल ले जाया गया था, तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। इसलिए डॉक्टर बहुत मदद नहीं कर सके। अखिलेश यादव ने प्रतीक को आखिरी बार देखने के बाद भावुक होकर कहा- वो (प्रतीक) अपने स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहता था। मैंने ख्याल रखने को कहा था। 30 अप्रैल को दिल के दौरे का इलाज मिलने के बाद प्रतीक जब थोड़ा ठीक हुए, तब उन्होंने डॉक्टर से डिस्चार्ज के लिए कहा। डॉक्टर ने उन्हें रेस्ट करने की सलाह दी थी। मेदांता की डॉक्टर रुचिका शर्मा ने प्रतीक को हाइपरटेंशन और नसों में ब्लड क्लॉटिंग के बारे में बताया था। इसके बावजूद 3 मई को वह अचानक हॉस्पिटल से चले गए थे। 5 मई को पैर की सर्जरी कराई, फिर घर पर रहे प्रतीक यादव के पैर में खून का थक्का जमने (ब्लड क्लॉटिंग) की समस्या थी, जिसे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस कहा जाता है। 5 मई को उन्होंने लखनऊ के ही एक प्राइवेट हॉस्पिटल में इसका ऑपरेशन कराया था। 6 मई को डिस्चार्ज होने के बाद वह घर पर आ गए थे। इसके बाद से वह ज्यादातर अपने कमरे में रहते थे। कम ही लोगों से मिलते थे। अपर्णा यादव भी असम के दौरे पर थीं, लेकिन फोन पर लगातार प्रतीक का हालचाल ले रही थीं। अब प्रतीक की जिंदगी से जुड़े कुछ किस्से 'यादव परिवार' को लगा था अखिलेश से भेदभाव होगा प्रतीक की अचानक मौत के बाद सपा समर्थकों के बीच उनकी जिंदगी को लेकर कई किस्से चर्चा में हैं। इनमें उस दौर की भी बातें हैं, जब मुलायम चाहते थे कि प्रतीक चुनाव लड़ें। सपा समर्थक भी उन्हें ‘नेताजी’ की तरह देखना चाहते थे। दरअसल, प्रतीक मुलायम सिंह यादव के सगे बेटे नहीं थे। वह मुलायम की पत्नी साधना के पहले पति के बेटे थे। इसलिए यादव परिवार में इस बात को लेकर आशंका थी कि प्रतीक के चलते अखिलेश के साथ राजनीतिक भेदभाव न हो। वारिस अखिलेश को ही समझा जाए। मुलायम सिंह ने भी अपने परिवार को इस बात का भरोसा दिया था कि अखिलेश के साथ किसी तरह का कोई भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, अखिलेश भी चाहते थे कि प्रतीक राजनीति में आएं। इसके लिए वह अक्सर प्रतीक को राजनीति के बारे में बताते रहते थे। पार्टी के बड़े नेताओं से मिलवाते रहते थे। लेकिन, प्रतीक उनसे अक्सर मना करते थे कि मैं राजनीति में नहीं आऊंगा। जब शादी के मंच पर लोग बोले- विधायक कब बनेंगे शादी में यादव परिवार जुटा, अमिताभ-अनिल अंबानी पहुंचे थे मुलायम सिंह यादव ने 2011 में प्रतीक की शादी सैफई में काफी भव्य तरीके से करवाई थी। अपर्णा बिष्ट से हुई इस शादी में बॉलीवुड स्टार अमिताभ बच्चन, जया बच्चन और अनिल कपूर जैसी हस्तियां शामिल हुई थीं। परिवार एकजुट था। किसी तरह का कोई विवाद नहीं था। शादी के 4 महीने बाद यूपी में चुनाव था। इसलिए शादी में आए लोग बधाई में यह भी कहते रहे कि प्रतीक इस बार विधायक बनिए। प्रतीक ने ‘हां’ में सिर हिलाया और कहा कि विचार करेंगे। अखिलेश CM बने, उधर प्रतीक ने बिजनेस शुरू किया लखनऊ, गाजियाबाद, नोएडा में करोड़ों का इन्वेस्टमेंट 2012 में यूपी में सपा की सरकार बनी। मुलायम सिंह ने बेटे अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाया। यही वो साल था, जब प्रतीक ने रियल स्टेट में कारोबार की शुरुआत की। एक के बाद एक 16 कंपनियां बनाई। लखनऊ के अलावा गाजियाबाद और नोएडा में प्रॉपर्टी में करोड़ों निवेश किए। उनके इस काम में अपर्णा यादव के भाई अमन उर्फ चंद्रशेखर बिष्ट सहयोगी रहे। प्रतीक की कई कंपनियां उनके ही नाम थीं। किस्सा प्रतीक को चुनाव लड़ाने का प्रतीक आजमगढ़ से चुनाव लड़ें, इसके लिए प्रदर्शन हुए 2013 में एक बार फिर प्रतीक को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि वो 2014 के लोकसभा चुनाव से राजनीति में आएंगे। ऐसा इसलिए, क्योंकि प्रतीक पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने लगे थे। 2013 के आखिर में तो आजमगढ़ में उनके लिए पोस्टर तक लग गए। पार्टी कार्यालय के सामने तमाम लोग इकट्ठा होने और नारेबाजी करने लगे कि प्रतीक यादव को आजमगढ़ से चुनाव लड़वाया जाए। जब प्रतीक यादव से चुनाव लड़ने का सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा था- मेरा चुनाव लड़ने का कोई इरादा नहीं है। 5 करोड़ की कार खरीदने पर लोगों ने अखिलेश से जोड़ा अपर्णा को नामांकन के लिए 5 करोड़ की कार से ले गए प्रतीक अक्सर मीडिया से बात करते थे। वह राजनीतिक टिप्पणी करने से बचते थे। जब भी राजनीति में आने की बात होती, तो मना कर देते थे। लेकिन, पत्नी के बारे में कहते थे कि वह राजनीति में आएंगी। 2017 के चुनाव के लिए लखनऊ की कैंट सीट पर अपर्णा ने दावेदारी कर दी। इसके लिए प्रचार भी शुरू कर दिया। चुनाव से करीब 4 महीने पहले दिसंबर 2016 में प्रतीक ने लैम्बॉर्गिनी हुराकेन खरीद ली। इसकी कीमत उस वक्त 5 करोड़ 23 लाख रुपए थी। प्रतीक ने 73 लाख रुपए कैश दिए, बाकी 4.50 करोड़ रुपए यूनियन बैंक से लोन करवाया था। लखनऊ की सड़कों पर अक्सर प्रतीक इस गाड़ी से घूमते नजर आते थे। प्रतीक यूपी में पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिनके पास लैंबोर्गिनी हुराकेन थी। चूंकि वह राजनीतिक परिवार से थे, इसलिए जब भी सोशल मीडिया पर गाड़ी के बारे में पोस्ट करते, लोग अखिलेश यादव के सीएम होने से जोड़ देते थे। 2017 में अपर्णा यादव लखनऊ की कैंट सीट से प्रत्याशी बनाई गईं। प्रतीक पत्नी को नामांकन कराने इसी कार से ले गए थे। उस वक्त लोगों ने इस गाड़ी को लेकर तंज कसा। तब प्रतीक ने कहा था- मैं कारोबारी हूं, नेता नहीं। गाड़ी के बारे में देखना है तो ऑफिस आ जाना, बैलेंस शीट चेक कर लेना। अखिलेश यादव से भी कर्ज लिया था 2017 के चुनाव में अपर्णा यादव ने अपनी संपत्ति के बारे में बताया। उन्होंने बताया था कि उनके पास 3 करोड़ 27 लाख की चल संपत्ति है। पति प्रतीक के पास 13 करोड़ 41 लाख रुपए की संपत्ति है। प्रतीक पर 8 करोड़ 70 लाख रुपए का कर्ज बताया था। आधा कर्ज तो गाड़ी का था, इसके अलावा 81 लाख 50 हजार रुपए का कर्ज उन्होंने अपने भाई अखिलेश यादव से ले रखा था। हलफनामे में भी इसका जिक्र है। सोशल मीडिया पर कभी अखिलेश को पोस्ट नहीं किया अखिलेश से रिश्ते नॉर्मल, अच्छा दिखाने की कोशिश नहीं की सियासत में इस बात की भी चर्चा रही है कि अखिलेश और प्रतीक के बीच रिश्ते नॉर्मल थे, लेकिन कभी भी दोनों ने इसे बहुत अच्छा दिखाने की कोशिश नहीं की। कई प्रोग्राम में अखिलेश और प्रतीक साथ रहे। लेकिन, जब सोशल मीडिया पर फोटो पोस्ट करने की बारी आई तो प्रतीक ने उन्हीं तस्वीरों को चुना, जिनमें अखिलेश यादव नहीं थे। उनके इंस्टाग्राम अकाउंट पर ऐसी कोई तस्वीर नहीं है, जिसमें वह अखिलेश के साथ हों। मुलायम सिंह के साथ उनकी 5 तस्वीरें हैं। अपर्णा के साथ स्वीडन, ऑस्ट्रिया घूमने गए प्रतीक को विदेश घूमना खूब पसंद था प्रतीक ने जीव आश्रय फाउंडेशन नाम से एक संस्था बना रखी थी। यह आवारा जानवरों के लिए काम करती है। प्रतीक अक्सर इससे जुड़ा कार्यक्रम करवाते रहते थे। पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट का आवारा कुत्तों से जुड़ा फैसला आया था, तब प्रतीक हॉस्पिटल में भर्ती थे। सर्जरी के बावजूद उन्होंने उस पर वीडियो बनाकर पोस्ट किया था। प्रतीक विदेश यात्राएं भी करते थे। इस यात्रा में उनकी पत्नी अपर्णा और दोनों बेटियां शामिल रहती थीं। पिछले साल इन लोगों ने स्वीडन और ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। वह दूसरे देशों में रेसिंग कार चलाते हुए दिखते थे। विदेश में जहां ऐसा इवेंट होता था, उसे भी देखने पहुंचते थे। तलाक के ऐलान से चौंकाया 9 दिन बाद सुलह हुई, तस्वीरें शेयर करके लिखा- सब अच्छा है प्रतीक यादव ने 19 जनवरी, 2026 को अचानक पत्नी अपर्णा तलाक लेने का ऐलान कर दिया था। कहा था- अपर्णा ने मेरी जिंदगी नरक बना दी है। हालांकि, 9 दिन बाद दोनों में सुलह हो गई थी। इंस्टाग्राम पर प्रतीक ने अपर्णा के साथ तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था- All is Good यानी सब अच्छा है। चैंपियन वो होते हैं, जो अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल समस्याओं को खत्म कर देते हैं। हम चैंपियंस का परिवार हैं। 21 फरवरी को प्रतीक-अपर्णा साथ नजर आए थे। दोनों ने बेटी का बर्थडे मनाया था। पार्टी में यूपी के मंत्री भूपेंद्र चौधरी, दिनेश सिंह, दानिश आजाद और राजनाथ सिंह के बेटे नीरज सिंह समेत भाजपा के कई नेता शामिल हुए थे। प्रतीक जब मुलायम के घर रहने लगे मुलायम परिवार के सभी बच्चों के साथ प्रतीक को रखते थे प्रतीक मुलायम सिंह यादव के सगे बेटे नहीं थे। वह साधना गुप्ता और चंद्र प्रकाश गुप्ता के बेटे थे। प्रतीक 4 जुलाई, 1986 को पैदा हुए थे। वह जब 4 साल के थे, तब साधना और चंद्र प्रकाश का तलाक हो गया था। इसके बाद वह साधना के साथ लखनऊ में ही रहने लगे थे। साधना इस शादी से पहले सैफई के एक हॉस्पिटल में काम करती थीं, वहीं से वह मुलायम सिंह के परिवार के संपर्क में आई थीं। तलाक के बाद साधना और मुलायम सिंह के बीच नजदीकी बढ़ती गई। उस वक्त मुलायम सिंह की पहली पत्नी मालती देवी और उनके बेटे अखिलेश यादव मुख्यमंत्री आवास में ही उनके साथ रहते थे। साधना और प्रतीक भी वहां आते-जाते थे। प्रतीक कई बार वहीं रहते थे। इससे जुड़ी तस्वीरें उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट भी की हैं। इन तस्वीरों में मुलायम सिंह फोन पर बात करते नजर आ रहे हैं। उनके आस-पास तमाम बच्चे बैठे हैं। एक फोटो में मुलायम सिंह, प्रतीक से बात करते दिख रहे हैं। यह उस वक्त की बात है, जब प्रतीक सरनेम में यादव नहीं, बल्कि गुप्ता लगाते थे। ----------------------- ये खबरें भी पढ़ें - अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक का निधन, पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर लाया गया, अपर्णा भी पहुंचीं सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। उनकी उम्र 38 साल थी। सुबह 6 बजे पत्नी अपर्णा यादव के भाई अमन सिंह बिष्ट उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पढ़िए पूरी खबर... लग्जरी कारें, बॉडी बिल्डिंग और तन्हाई, ऐसे थे प्रतीक यादव, राजनीति से दूरी, अपर्णा से लव मैरिज, फिर विवाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन हो गया। महज 38 साल की उम्र में उनकी मौत की खबर से लोग हैरान हैं। प्रतीक की जिंदगी उतार-चढ़ाव से भरी रही है। यादव परिवार से होने के बावजूद प्रतीक को राजनीति पसंद नहीं थी। पढ़िए पूरी खबर…
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