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    सहारनपुर में समूह-सखी महिलाओं का प्रदर्शन, मानदेय बढ़ाने की मांग:बोली, 800 रुपए में कैसे चलेगा घर ,आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    3 hours ago

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    सहारनपुर में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत कार्यरत समूह-सखी महिलाओं ने गुरुवार को कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। जनता देश संगठन (JDS) के बैनर तले बड़ी संख्या में महिलाओं ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। उन्होंने 800 रुपये मासिक मानदेय को "महिलाओं का शोषण" बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की। महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे सड़क से लेकर प्रदेश स्तर तक बड़ा आंदोलन करेंगी। संगठन ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में समूह-सखी महिलाओं के लिए कम से कम 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय,मातृत्व लाभ और स्थायी पहचान की मांग की है। संगठन का आरोप है कि ये महिलाएं गांव-गांव जाकर सरकारी योजनाओं का प्रचार,स्वयं सहायता समूहों का गठन,ऋण वसूली,विभिन्न सर्वेक्षण और सरकारी रैलियों के प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्य करती हैं। इसके बावजूद उन्हें केवल 800 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। समूह-सखी एवं संघर्ष समिति की अध्यक्षा बबीता कश्यप ने कहा,"आज 26 रुपये प्रतिदिन में एक समय की सब्जी भी नहीं आती। सरकार महिला सशक्तिकरण की बात करती है,लेकिन जमीनी स्तर पर महिलाओं का केवल इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि हर राजनीतिक रैली और सरकारी कार्यक्रम में महिलाओं को बुलाया जाता है, लेकिन उनके मानदेय और सम्मान के मुद्दे पर सरकार चुप रहती है। जेडीएस के संस्थापक सुरेश कुमार फौजी ने बताया कि उनका संगठन पिछले दो वर्षों से हर महीने की 14 तारीख को धरना देकर इन महिलाओं की आवाज उठा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि दिसंबर 2023 में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन सौंपा गया था और आश्वासन मिला था,लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संगठन ने दावा किया कि प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति और राज्य सरकार तक सैकड़ों हस्ताक्षरयुक्त पत्र भेजे जा चुके हैं। धरने के दौरान महिलाओं ने सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए कहा कि महंगाई के इस दौर में 800 रुपये का मानदेय अपमानजनक है। उनका कहना था कि गांवों में स्वयं सहायता समूहों का विस्तार,राशन कार्डधारकों का सर्वेक्षण,जल समूह गठन और बैंक ऋण वसूली जैसे तमाम कार्य उनसे कराए जा रहे हैं,लेकिन उन्हें कर्मचारी का दर्जा तक नहीं दिया गया है।
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