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    प्रतीक यादव के विसरे में जहर-ड्रग्स की जांच होगी:मौत की सटीक वजह सामने आएगी; NGO ने कहा- हत्या है

    7 hours ago

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    सपा प्रमुख अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) पहुंच गया है। यूपी के रामपुर के एनजीओ 'डीके फाउंडेशन' ने प्रतीक की मौत को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फाउंडेशन ने मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है। फाउंडेशन के अध्यक्ष दानिश खान ने दैनिक भास्कर से कहा कि प्रतीक यादव की प्राकृतिक मृत्यु नहीं हुई है। हमें हत्या की आशंका है। हमारी संस्था ने इस प्रकरण में स्वत: संज्ञान लिया है। हमने न्यायिक जांच की मांग की है। अब जानिए फाउंडेशन की 3 मांगें- 1- मामले की जांच के लिए तत्काल SIT (विशेष जांच दल) बने। 2- लखनऊ के सिविल अस्पताल और संबंधित रूट के सीसीटीवी फुटेज को न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाए। 3- फोरेंसिक जांच को राज्य के प्रभाव से मुक्त रखकर केंद्रीय प्रयोगशाला (CFSL) से कराया जाए। इससे पहले सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा था- यह सामान्य मौत नहीं है। उन्हें जहर भी दिया जा सकता है। प्रतीक यादव की मौत की जांच हाईकोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से करानी चाहिए। जानिए पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में क्या वजह बताई गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में प्रतीक की मौत की वजह दिल और फेफड़ों का अचानक काम करना बंद होना बताई गई है। मेडिकल भाषा में इसे ‘कार्डियो-रेस्पिरेटरी कोलैप्स’ कहते हैं। ऐसा फेफड़ों तक खून पहुंचाने वाली मुख्य नस में थक्का जमने की वजह से हुआ। इसे ‘मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म’ कहा जाता है। यह स्थिति तब बनती है, जब शरीर के किसी हिस्से, खासकर पैरों में बना खून का थक्का बहकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है। फिर वहां ब्लड सर्कुलेशन रोक देता है। हालांकि, प्रतीक के शरीर में थक्के बनने की वजह क्या थी, यह जानने के लिए विसरा सुरक्षित रखा गया है। लखनऊ की फोरेंसिक लैब में इसकी जांच होगी। आइए जानते हैं कि प्रतीक की मौत में विसरा क्यों अहम है, ये क्या होता है? विसरा मतलब, अंदरूनी अंगों के सैंपल सुरक्षित करना फोरेंसिक एक्सपर्ट आयुष बसेर बताते हैं- पोस्टमॉर्टम के बाद गहन जांच के लिए शव के अंदरूनी अंगों के नमूनों को सुरक्षित रख लिया जाता है। इन्हीं सुरक्षित नमूनों को ‘विसरा’ कहा जाता है। इसमें मुख्य रूप से पेट, आंत, लीवर, किडनी, दिल और पेट के हिस्सों को रखा जाता है। इसे रेक्टिफाइड स्प्रिट, नमक के सैचुरेटेड घोल, सोडियम फ्लोराइड, ग्लिसरॉल, फॉर्मेलिन जैसे केमिकल में रखा जाता है, जिससे अंग खराब न हों। पोस्टमॉर्टम के बाद जब मौत की वजह (जैसे बीमारी, चोट या जहर) पूरी तरह से साफ नहीं हो पाती, तो विसरा, केमिकल एनालिसिस के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाता है। वह कहते हैं- इस टेस्टिंग में फोरेंसिक एक्सपर्ट मृत व्यक्ति के अंगों में छिपे जहर, ड्रग्स, अल्कोहल या केमिकल की सटीक पहचान करते हैं। अगर विसरा रिपोर्ट नेगेटिव आती है, तो मौत अन्य कारण यानी बीमारी या चोट को माना जाता है। किसी अपराध के मामले में यह रिपोर्ट कानूनी सबूत के तौर पर बेहद अहम मानी जाती है। 6 महीने से 1 साल में आ सकती है विसरा रिपोर्ट आयुष कहते हैं- इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है। कभी-कभी 6 महीने से एक साल या उससे ज्यादा भी लग सकते हैं। इसकी वजह यूपी की फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) में भारी बैकलॉग (बकाया काम) है। संवेदनशील या विशेष अनुरोध वाले मामलों में 8 से 10 दिन में रिपोर्ट आ सकती है। यूपी पुलिस की टेक्निकल सर्विसेज यूनिट के मुताबिक, साल-2025 तक राज्य की फोरेंसिक लैबों में 15 हजार से ज्यादा विसरा की रिपोर्ट लंबित हैं। फरवरी, 2026 में सरकार ने FSL को अपग्रेड करने और बैकलॉग कम करने की योजना घोषित की है। प्रतीक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से क्या पता चला मौत की वजह- 1. मैसिव पल्मोनरी थ्रोम्बोएंबोलिज्म: इसका मतलब है फेफड़ों तक खून ले जाने वाली मुख्य नस में थक्के जम जाना। यह तब होता है, जब शरीर के किसी हिस्से (अक्सर पैरों) से खून का थक्का बहकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है और ब्लड सर्कुलेशन रोक देता है। शव के फेफड़ों में लाल-भूरे रंग के थक्के दिखाई देते हैं, जो सांस और ब्लड सर्कुलेशन को तुरंत रोक देते हैं। 2. कार्डियो-रेस्पिरेटरी कोलैप्स: यह दिल और श्वसन प्रणाली के अचानक बंद कर देने की स्थिति है। जब दिल धड़कना बंद कर देता है और फेफड़े ऑक्सीजन लेना बंद कर देते हैं, तो इसे कोलैप्स कहा जाता है। प्रतीक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक, फेफड़ों में थक्के की वजह से शरीर को ऑक्सीजन नहीं मिली। इससे हार्ट ने काम करना बंद कर दिया और प्रतीक की मौत हो गई। प्रतीक के शव पर पाए गए अन्य लक्षण 1. एंटीमॉर्टम इंजरी: ये वे चोटें होती हैं, जो व्यक्ति को मौत से पहले यानी जीवित रहते हुए लगी होती हैं। इन चोटों की पहचान घाव के आसपास खून के जमाव और सूजन से की जाती है। प्रतीक की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में शरीर पर 6 अलग-अलग एंटीमॉर्टम इंजरी मिली हैं, जो 1 से 7 दिन पुरानी हैं। 2. कंट्यूजन और एकाइमोसिस: 'कंट्यूजन' का सामान्य अर्थ 'निशान पड़ना' होता है। यह किसी ठोस वस्तु के वार से स्किन के नीचे रक्त वाहिकाओं के फटने की वजह से होता है। 'एकाइमोसिस' उस जमा हुए खून को कहते हैं, जो त्वचा के नीचे फैल जाता है। रिपोर्ट में छाती और हाथों पर लाल-भूरे और हरे-पीले रंग के ऐसे निशान पाए गए हैं। 3. साइनोसिस: जब ब्लड में ऑक्सीजन की भारी कमी हो जाती है, तो होंठ, नाखून और कान जैसे अंग नीले या बैंगनी दिखाई देने लगते हैं। इसे 'साइनोसिस' कहा जाता है। शव के दोनों हाथों के नाखून, कान और होंठ नीले पाए गए, जो ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत का संकेत है। 4. सब-एरेकनॉइड हैमरेज: इसका मतलब है, दिमाग की परतों (मेनिन्जेस) के बीच खून का रिसाव होना। यह अक्सर सिर पर लगी चोट या झटके के कारण होता है। रिपोर्ट में मस्तिष्क के टेम्पोरो-पैरिएटल हिस्से में इस तरह का रक्तस्राव और नसों में भारीपन पाया गया है । 5. एडीमा: शरीर के टिश्यू में तरल पदार्थ जमा होने की वजह से आने वाली सूजन को एडीमा कहते हैं। रिपोर्ट में प्रतीक के दोनों निचले अंगों (पैरों) में एडीमा पाया गया है। अक्सर दिल या ब्लड सर्कुलेशन की समस्या के कारण पैरों में इस तरह की सूजन दिखाई देती है। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… अखिलेश के भाई प्रतीक को ससुर ने दी मुखाग्नि, सपा प्रमुख ने चिता पर लकड़ी रखी, प्रणाम किया सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक गुरुवार दोपहर पंचतत्व में विलीन हो गए। लखनऊ में पत्नी अपर्णा के पिता यानी प्रतीक के ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने चिता को मुखाग्नि दी। अखिलेश ने भाई की चिता पर लकड़ी रखी और अंतिम प्रणाम किया। पूरी खबर पढ़ें…
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