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    पूर्व विधायक के टूटे दरवाजे पर लगा प्लाई बोर्ड:3 मंजिला मकान में हुआ था विस्फोट, पुलिस फोर्स तैनात

    2 hours ago

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    फर्रुखाबाद शहर में मंगलवार देर शाम पूर्व विधायक विजय सिंह के आवास पर जोरदार विस्फोट हुआ था। यह धमाका बेसमेंट में हुआ था, जिससे दूसरी मंजिल पर लगे पंखे टूट गए और लिंटर भी क्षतिग्रस्त हो गया था। पुलिस ने पूरे घर को सील कर दिया है। विस्फोट के कारण एक दरवाजा उड़ गया था, जिस पर अब प्लाई बोर्ड लगा दिया गया है। प्रथम और द्वितीय तल पर लटक रहे कांच को भी हटवा दिया गया है। गुरुवार को भी आवास के बाहर पुलिसकर्मी तैनात रहे। समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक विजय सिंह ब्रह्मदत्त हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। मंगलवार को हुए इस विस्फोट में उनके दोनों बेटों सहित चार अन्य लोग घायल हो गए थे। एक घायल का कानपुर में, जबकि अन्य का लखनऊ में इलाज चल रहा है। बुधवार को बम निरोधक दस्ता, एटीएस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से नमूने एकत्र किए। डॉग स्क्वायड भी जांच के लिए पहुंचा था। बाद में लोहिया अस्पताल में भर्ती एक घायल के पास भी डॉग स्क्वायड को ले जाया गया, जहां डॉग स्क्वायड ने उसकी जेब को पकड़ा। उसकी जेब का सैंपल भी लिया गया था। इस मामले में एक दरोगा ने पूर्व विधायक के दोनों बेटों सहित चार अन्य घायलों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। बुधवार को डीआईजी भी मौके पर पहुंचे थे। उन्होंने कहा था कि धमाका किस पदार्थ से हुआ, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही तथ्य सामने आएंगे। वही घर को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। पूर्व विधायक के दरवाजे पर पुलिस बल तैनात है। तीन बार विधायक बने विजय सिंह पूर्व विधायक विजय सिंह तीन बार विधायक रहे। भाजपा नेता ब्रह्म दत्त द्विवेदी की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में हत्या के बाद सियासत के शिकार पर विजय सिंह का राजनीतिक सफर उम्र कैद की सजा होने के बाद खत्म हो गया। तीन बार विधायक बनने से सपा के शासन में विजय सिंह की जिले में तूती बोलती थी। विजय सिंह का शुरुआती दौर में छोटे-छोटे मामलों की वजह से वह चर्चा में आने लगे यहीं से राजनीतिक महत्वाकांक्षा जाग गई थी। उस समय भाजपा में प्रदेश की राजनीति में ब्रह्म दत्त द्विवेदी शिखर पर थे। 10 फरवरी 1997 को ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी गई। इसमें विजय सिंह की संलिप्तता उजागर हुई। इस दौरान सीबीआई ने नामजद कर लिया था। वर्ष 2002 में निर्दलीय चुनाव लड़कर ब्रह्मदत्त द्विवेदी की पत्नी प्रभा द्विवेदी को पराजित किया। वर्ष 2007 में सपा से चुनाव जीतकर विधायक बने। बाद में उन्होंने इस्तीफा देकर बसपा का दामन थामा। वर्ष 2012 में ब्रह्मदत्त द्विवेदी के पुत्र मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को पराजित किया और तीसरी बार विधायक बने। बहिपुर विधायक पर राजनीतिक सफलता के बीच कानूनी संकट गहराता गया। 2003 में सीबीआई कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। प्रांशु दत्त पर फायरिंग में भी बेटों पर दर्ज हुई थी प्राथमिकी भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और एमएलसी प्रांशु दत्त द्विवेदी पर 26 नवंबर 2017 को हमले में शहर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें कहा गया था वह कर्मचारी सचिन मिश्रा के साथ लौट रहे थे। नगर निकाय चुनाव के मतदान के अंतिम समय में पुरानी रंजिश में उन पर फायरिंग कर दी गई। घटना में वह बच गए थे। जबकि सचिन को गोली लग गई थी। मामले में अविनाश और अभिषेक समेत 5 - 6 अज्ञात पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी। विक्की कर रहे थे विधानसभा चुनाव की तैयारी पूर्व विधायक विजय सिंह के बड़े बेटे अविनाश उर्फ विक्की वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने शहर में बैठकों का दौर भी शुरू कर दिया था। समाजवादी पार्टी से वह टिकट की दावेदारी भी कर रहे थे। पुत्रवधू ने लड़ा था पालिकाध्यक्ष का चुनाव पूर्व विधायक विजय सिंह की पुत्रवधू ने वर्ष 2023 में पालिकाध्यक्ष का चुनाव लड़ा था। हालांकि वह पूर्व एमएलसी मनोज अग्रवाल की पत्नी वत्सला अग्रवाल से हार गई थी। मालूम हो कि पूर्व विधायक की पत्नी ने लगातार दो बार पालिकाध्य का चुनाव जीता था।
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