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    प्रयागराज की महिला बड-कियारी सिंड्रोम हुआ इलाज:DIPS तकनीक से टला लिवर ट्रांसप्लांट, नसों में रक्त का थक्का जमा था

    2 hours ago

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    प्रयागराज की 35 वर्षीय प्रेमा यादव को मैक्स हॉस्पिटल, लखनऊ के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया था। उन्हें अत्यधिक कमजोरी, तेजी से बढ़ते पीलिया, पेट और पैरों में सूजन के साथ लगातार उल्टी की शिकायत थी। यह जानकारी अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने प्रयागराज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी। जांच के बाद प्रेमा यादव में तीव्र बड-कियारी सिंड्रोम का निदान हुआ। डॉक्टरों ने बताया कि यह एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें लिवर से रक्त बाहर ले जाने वाली नसों में अचानक रक्त का थक्का जम जाता है। इससे लिवर में दबाव बढ़ता है, जिससे लिवर फेल्योर का खतरा रहता है। गंभीर स्थितियों में लिवर प्रत्यारोपण ही एकमात्र उपचार विकल्प होता है। विशेषज्ञों ने बताया कि मरीज की हालत तेजी से बिगड़ रही थी और उनके शरीर में अत्यधिक द्रव जमा हो रहा था। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, डॉक्टरों की एक बहु-विषयक टीम ने तत्काल निर्णय लिया और उन्नत न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया DIPS (डायरेक्ट इंट्राहेपेटिक पोर्टोसिस्टमिक शंट) को अपनाने का फैसला किया। इस DIPS तकनीक में लिवर के भीतर एक नया रक्त मार्ग बनाया जाता है। यह प्रक्रिया अवरुद्ध नसों पर दबाव को कम करती है और लिवर में रक्त प्रवाह को सामान्य करने में मदद करती है। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर किए गए इस हस्तक्षेप से प्रेमा यादव के लिवर की कार्यक्षमता स्थिर हो गई और उन्हें आपातकालीन लिवर ट्रांसप्लांट की आवश्यकता नहीं पड़ी। उपचार के बाद उनकी स्थिति में तेजी से सुधार हुआ और तीन दिनों के भीतर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि तीव्र बड-कियारी सिंड्रोम के लक्षण अक्सर सामान्य लिवर रोगों के समान हो सकते हैं। इसलिए, समय पर जांच और विशेषज्ञ चिकित्सा केंद्र में उपचार अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मामला दर्शाता है कि उन्नत इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी तकनीकों के माध्यम से जटिल लिवर रोगों का भी सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।
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