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    प्रयागराज में रूस की लोकगाथा का जादू दिखा:'फेसेज़ ऑफ ओलोंखो' नाटक में गूंजी याकूत वीरगाथा

    6 hours ago

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    प्रयागराज में आयोजित भारत रंग महोत्सव के मंच पर शनिवार शाम रूस की लोकगाथा जीवंत हो उठी। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रूसी नाटक ‘फेसेज़ ऑफ ओलोंखो’ प्रस्तुत किया गया। इस नाटक ने दर्शकों को रहस्य, वीरता और लोककथा की दुनिया से परिचित कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि मेजर जनरल धर्मराज राय (कमांडेंट, प्रयागराज) ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय और राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के प्रतिनिधि एस. मलतियार भी उपस्थित रहे। । नाटक ने दर्शकों को याकूत (साखा) के प्राचीन वीर महाकाव्य ओलोंखो की रहस्यमयी दुनिया से रूबरू कराया। इसकी कथा में शांत "मिडिल वर्ल्ड" पर "लोअर वर्ल्ड" के आक्रमण, सुंदर सिरालिमा कुओ के अपहरण और देवता द्वारा भेजी गई महिला योद्धाओं के साहसिक संघर्ष को मंचित किया गया। महिला योद्धाओं का पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ना प्रस्तुति का मुख्य आकर्षण रहा। विश्व-वृक्ष की प्रतीकात्मक ध्वनियों, खोमुस (जॉ हार्प) की गूंज और थ्रोट सिंगिंग की अनूठी शैली ने प्रेक्षागृह में एक अलौकिक वातावरण निर्मित किया। मंच सज्जा, प्रकाश और संगीत का संतुलित संयोजन कथा को अधिक प्रभावी बना रहा था। कलाकारों में ऐकुओ तिखोनोवा, वैलेन्टिना अफानासियेवा, इयाना बाराबानोवा, आर्सेन वासिलियेव, ओलेसिया गाबिशेवा, इउलियाना गोटोवत्सेवा, पोलिना गोरोखोवा, नारियाना दियाकोनोवा और गालिना कार्दाशेव्स्काया शामिल थे। उनके ऊर्जावान अभिनय और प्रभावशाली शारीरिक अभिव्यक्ति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। महोत्सव के अंतर्गत एक विशेष चर्चा का भी आयोजन किया गया। इसमें वरिष्ठ रंगकर्मी अतुल यदुवंशी और फिल्म विभागाध्यक्ष डॉ. यशार्थ मंजुल ने रंगमंच के बदलते स्वरूप, प्रयोगधर्मिता और वैश्विक संवाद की आवश्यकता पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का संचालन अभिजीत मिश्रा ने किया। रूसी लोककथा और भारतीय दर्शकों के बीच बना यह सांस्कृतिक सेतु भारत रंग महोत्सव की वैश्विक पहचान को मजबूत करता है
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