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    प्रयागराज में यूजीसी रेगुलेशन 2026 बहाली की मांग तेज:समता अधिकार अभियान 14 अप्रैल तक, जातिसूचक शब्द प्रयोग अपराध

    2 hours ago

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    प्रयागराज में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर 'समता अधिकार अभियान' चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत यूजीसी रेगुलेशन 2026 को पुनः बहाल करने की मांग जोर-शोर से उठाई जा रही है। यह आंदोलन 'यूजीसी एक्ट 2026 बचाओ समता आंदोलन' के बैनर तले हो रहा है। समता आंदोलन के संयोजक डॉ. कमल उसरी ने एक प्रेस वार्ता में बताया कि यह अभियान 2 अप्रैल को बहुजन एकता दिवस से शुरू हुआ था और 14 अप्रैल तक लगातार जारी रहेगा। अभियान के दौरान गांव, कस्बों, शहरों के चौराहों, छात्रावासों और सार्वजनिक स्थलों पर जाकर लोगों को यूजीसी रेगुलेशन 2026 के महत्व के बारे में जागरूक किया जा रहा है। डॉ. उसरी ने कहा कि खासकर ओबीसी समाज में इस अभियान को लेकर वैसा ही उत्साह देखने को मिल रहा है, जैसा 90 के दशक में मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के समय था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक यूजीसी रेगुलेशन 2026 की बहाली नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने इसे बहुजन समाज के अधिकारों और शैक्षणिक समानता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। इसी अवसर पर इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. विक्रम हरिजन ने जातिसूचक और गैर-संवैधानिक शब्दों के सार्वजनिक प्रयोग को दंडनीय अपराध बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए 1989 का एससी-एसटी कानून प्रभावी रूप से लागू है, लेकिन हाल के वर्षों में कई सार्वजनिक हस्तियों द्वारा इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल देखा गया है। डॉ. हरिजन ने आगे कहा कि संविधान के दायरे में रहकर ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई होना एक सकारात्मक संकेत है। हालांकि, समाज में व्याप्त जातिवादी मानसिकता पर रोक लगाने के लिए और अधिक सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि यह पहल सामाजिक न्याय, समानता और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
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