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    पति की लम्बी उम्र के लिये महिलाओं ने रखा व्रत:बरगद के पेड़ का किया 108 बार परिक्रमा,बोली-पति के दीर्घायु के लिए की है कामना

    5 hours ago

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    आस्था की नगरी काशी में शनिवार की सुबह से ही महिलाओं ने पूजन-अर्चन शुरू कर दिया था। दिन है वट-सावित्री व्रत का। महिलाओ ने व्रत रखने के साथ ही वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ के नीचे कच्चे सूत से 7,11,51 या 108 बार परिक्रमा करने के साथ दीप प्रज्वलित कर सावित्री और सत्यवान की कथा सुनती हुई दिखी। इसके अलावा वट वृक्ष के नीचे पूजा के दौरान मौसमी फल और श्रृंगार के समान चढ़ाने की भी परम्परा है। महिलाओं ने कहा कि हम अपने सुहाग की रक्षा के लिए यह व्रत करते हैं। वट सावित्री व्रत कथा भद्र देश के एक राजा थे, जिनका नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान न थी। उन्होंने संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोच्चारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुतियां दीं। अठारह वर्षों तक यह क्रम जारी रहा। इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर वर दिया कि राजन तुझे एक तेजस्वी कन्या पैदा होगी। सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने की वजह से कन्या का नाम सावित्री रखा गया। सावित्री जब बड़ी हुईं तो अश्वपति ने उन्हें अपने मंत्री के साथ वर को चुनने के लिए भेजा. सावित्री ने जैसे ही सत्यवान को अपने वर के रुप में चुना देवर्षि नारद ने सबको बता दिया कि विवाद के 12 साल बाद सत्यवान की मृत्यु को जाएगी। इसे जानने के बाद अश्वपति ने अपनी पुत्री को दूसरा वर चुनने के लिए कहा, लेकिन सावित्री नहीं मानी। इस व्रत से सावित्री के पति की लौटी थी जान सावित्री को नारद जी से अपने पति के मृत्यु का समय पता चल गया, जिसके बाद वो अपने पति और सास, ससुर के साथ वन में रहने लगीं। सावित्री ने नारद जी के बताए दिन से कुछ समय पहले से व्रत रखना शुरू कर दिया। उसके बाद जब सावित्री के पति को यमराज लेने आए तो वो उनके पीछे चलने लगीं, जिसके बाद यमराज ने सावित्री की निष्ठा से प्रसन्न होकर उन्हें वर मांगने के लिए कहा। सावित्री ने सबसे पहले वर में अपने अंधे सास-ससुर की आंखो की रोशनी मांगते हुए उनके दीर्घायु होने की कामना की। उसके बाद भी सावित्री यमराज के पीछे चलती रहीं दूसरे वर में सावित्री ने यमराज से अपने पति का छूटा राज पाठ मांगा। आखिर में सावित्री ने यमराज से सौ पुत्रों का वरदान मांगा, जिसके बाद यमराज ने उनके पति के प्राण को वापस लौटा दिया।
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