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    पत्रकारिता में विश्वसनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौती:काशी हिंदू विश्वविद्यालय में ‘हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष व चुनौतियां’ विषय पर हो रहा सम्मेलन

    2 hours ago

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    BHU स्थित कला संकाय के अंतर्गत पत्रकारिता एवं जनसम्प्रेषण विभाग “हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष: इतिहास, परंपरा और चुनौतियां” विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा है। सम्मेलन में अलग अलग शहरों के विद्वान, पत्रकार, शोधार्थी एवं विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं। वैदिक विज्ञान केंद्र में आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने संबोधित किया। उन्होंने कहा, हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होना अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण अवसर है। पत्रकारिता के उदय ने समाज की चेतना को एक नया रूप दिया और विचारों को व्यापक स्तर तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम प्रदान किया। उन्होंने पत्रकारिता और साहित्य के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि दोनों समाज के दर्पण हैं। उन्होंने वर्तमान समय में हेडलाइंस के बढ़ते महत्व, पाठकों के घटते धैर्य और पत्रकारिता के समाज पर प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि पत्रकारिता केवल दर्पण ही नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति भी है। मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष शुक्ल ने पत्रकारिता में उभरती चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के समय की एकजुटता की तुलना में आज सामाजिक, राजनीतिक और तकनीकी दबाव अधिक जटिल हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को समाज में रहते हुए भी उससे प्रभावित हुए बिना अपनी सत्यनिष्ठा बनाए रखनी चाहिए। उन्होंने टेलीविजन और सोशल मीडिया के प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इन माध्यमों ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदल दिया है, लेकिन इसके बावजूद पत्रकारों की जिम्मेदारी और नैतिकता सर्वोपरि रहनी चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉ. ओम जी उपाध्याय, भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) के निदेशक ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास पर विस्तार से चर्चा करते हुए हुए बताया कि 30 मई 1826 को युगल किशोर शुक्ल द्वारा ‘उदंत मार्तंड’ का प्रकाशन अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का प्रारंभिक बीज था। उस समय साहित्यकार और पत्रकार एक ही व्यक्ति होते थे। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में पत्रकारिता की भूमिका को रेखांकित करते हुए वर्तमान समय में बाजारीकरण, टीआरपी और मूल्यों के क्षरण जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की तथा युवा पत्रकारों से अपनी जिम्मेदारी को समझने का आह्वान किया। आयोजन सचिव तथा पत्रकारिता एवं जनसम्प्रेषण विभाग के अध्यक्ष प्रो. ज्ञान प्रकाश मिश्र ने भारतीय पत्रकारिता के 200 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित किया। कला संकाय की प्रमुख प्रो. सुषमा घिल्डियाल ने सह-आचार्य डॉ. बाला लखेंद्र व अन्य रहे। संचालन डॉ. प्रभात कुमार ने किया।
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