Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    PoJK Rawalakot Violence: JAAC ने मीडिया के दावों को नकारा, कहा Pakistani Army ने की निहत्थे नागरिकों पर फायरिंग

    14 hours ago

    1

    0

    पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुई हिंसा के बाद रावलकोट में हुई जानलेवा घटनाओं को मीडिया के कुछ हिस्सों ने गलत तरीके से पेश किया है, ऐसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का आरोप है। एक्स पर कई पोस्ट में कमेटी ने उन खबरों को गलत बताया जिनमें कहा गया था कि प्रदर्शनकारियों ने जबरन शहर में घुसने की कोशिश की थी। ग्रुप ने लिखा, बेशर्म मीडिया कह रहा है कि जॉइंट एक्शन कमेटी ने रावलकोट में जबरन घुसने की कोशिश की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि रावलकोट वहां के लोगों का है और आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने कार्रवाई के दौरान गोलाबारी और फायरिंग करके शांतिपूर्ण, निहत्थे नागरिकों की जान ले ली।इसे भी पढ़ें: आंदोलन संस्थापक के छोटे भाई को पाकिस्तानी सेना ने मारी गोली, हालात बेकाबू? शहबाज के हाथ से निकल रहा PoJKएक और पोस्ट में JAAC ने दावा किया कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 67 हो गई है। मारे गए लोगों को "शहीद" बताते हुए कमेटी ने अपनी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेते हुए एक कविता शेयर की। उन्होंने कहा कि खून-खराबे के बावजूद उन्होंने अपनी मातृभूमि की "रक्षा करने की कसम" खाई है। बताई गई मौतों की संख्या की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। कमेटी ने हिंसा के असर पर भावुक विचार भी पोस्ट किए। उन्होंने कहा कि ऐसे नुकसान को खुद झेलने के बाद ही लोग उन परिवारों का दर्द समझ पाए हैं जिन्होंने अतीत में ऐसी ही त्रासदियां झेली थीं। पोस्ट में बचे हुए लोगों पर पड़ने वाले भावनात्मक और मानसिक असर का ज़िक्र किया गया। इसमें कहा गया कि भले ही वे शारीरिक रूप से जीवित हैं, लेकिन वे हुए नुकसान के बड़े पैमाने को समझने और उससे उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने अधिकारियों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को दबाने और कथित चुनावी गड़बड़ियों के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमज़ोर करने का आरोप लगाया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने कमेटी के सोशल मीडिया पर लगाए गए हालिया आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। इस आंदोलन ने पाकिस्तान के कब्ज़े वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली, राजनीतिक दखलअंदाज़ी और लोकतांत्रिक अधिकारों को व्यवस्थित रूप से दबाने का आरोप लगाया है। विरोध प्रदर्शन के नेताओं का दावा है कि चुनावी नतीजों को प्रभावित करने के लिए चुनावी प्रक्रिया में हेरफेर की गई है, जिससे लोगों की इच्छा का अनादर हुआ है और लोकतांत्रिक संस्थाएं कमज़ोर हुई हैं। उन्होंने अधिकारियों पर गिरफ़्तारियों, डराने-धमकाने और भारी सुरक्षा बल तैनात करके राजनीतिक असहमति को दबाने का भी आरोप लगाया है। हालिया प्रदर्शनों, खासकर रावलकोट में स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 'अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च' में शामिल हज़ारों प्रदर्शनकारियों ने मुज़फ़्फ़राबाद की ओर अपना मार्च जारी रखने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए अंधाधुंध गोलीबारी की और अत्यधिक बल का प्रयोग किया, जिसके परिणामस्वरूप कई लोग हताहत और घायल हुए। इस हिंसा ने PoJK में असहमति से निपटने के इस्लामाबाद के तरीके की आलोचना को और बढ़ा दिया है; कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अधिकारी राजनीतिक मांगों का जवाब बातचीत के बजाय बल प्रयोग से दे रहे हैं। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
    Click here to Read more
    Prev Article
    अमेरिका के दो सांसदों ने पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर से की मुलाकात, द्विपक्षीय संबंधों पर हुई चर्चा
    Next Article
    US के साथ समझौते से Iran का साफ इनकार, Strait of Hormuz को बताया अपनी ताकत का 'विराट शिखर'

    Related विदेश Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment