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    रेबीज से शून्य मृत्यु लक्ष्य, स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया:बहराइच में डॉक्टरों, फार्मासिस्टों और नर्सों को किया गया प्रशिक्षित

    9 hours ago

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    सरकार ने वर्ष 2030 तक रेबीज से होने वाली मौतों को पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में बहराइच में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार की अध्यक्षता में एक रिफ्रेशर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण सीएमओ सभागार में जिले के मेडिकल कॉलेज, ट्रॉमा सेंटर, सभी सीएचसी और पीएचसी पर तैनात डॉक्टरों, फार्मासिस्टों तथा स्टाफ नर्सों के लिए था। अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (एसीएमओ) डॉ. संतोष राना ने बताया कि नए वर्ष से राज्य सरकार ने सीएचसी और पीएचसी स्तर तक एंटी रेबीज़ सीरम एवं रेबीज़ रोग प्रतिरोधी ग्लोब्युलिन की उपलब्धता सुनिश्चित कर दी है। अब यह संपूर्ण उपचार पीएचसी और सीएचसी स्तर तक पूरी तरह निःशुल्क प्रदान किया जा रहा है। प्रशिक्षक एवं जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. निर्मेष श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि यदि चिकित्सक घाव को श्रेणी-3 घोषित करते हैं या जंगली जानवर द्वारा काटने की स्थिति होती है, तो पहले ही दिन एंटी रेबीज़ सीरम और एंटी रेबीज़ टीका लगाए जाने से रेबीज़ से मृत्यु का खतरा लगभग शत-प्रतिशत समाप्त हो जाता है। इसके लिए जानवर के काटने के बाद उसी दिन उपचार प्रारंभ करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि किसी भी जानवर के काटने के तुरंत बाद घाव को नल के बहते साफ पानी से 10 से 15 मिनट तक धोना चाहिए। इसके बाद बेटाडाइन या सोफ्रामाइसिन जैसी एंटीसेप्टिक क्रीम लगानी चाहिए। घाव पर मिर्च, हल्दी, चूना, मिट्टी या अन्य घरेलू पदार्थ लगाना अत्यंत घातक होता है, क्योंकि इससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और वायरस तेजी से शरीर में फैल सकता है। घाव पर पट्टी भी नहीं बाँधनी चाहिए और बिना विलंब नज़दीकी स्वास्थ्य इकाई पर पहुँचकर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने आम जनमानस से अपील की है कि किसी भी जानवर के काटने की स्थिति में घरेलू उपचार न करें और तुरंत नज़दीकी स्वास्थ्य केंद्र पर पहुँचें। उन्होंने बताया कि अब पीएचसी स्तर तक निशुल्क एंटी रैबीज उपचार उपलब्ध है, जिसका लाभ लेकर जान बचाई जा सकती है।
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