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    राजनीति में कितना कमाल करेगी अलंकार की RAM:बताया- फंड कहां से लाएंगे, पहले भी अफसरों ने बनाई पार्टी, लेकिन फ्लॉप रहे

    2 hours ago

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    यूपी में पीसीएस की नौकरी छोड़ने वाले अलंकार अग्निहोत्री ने नया राजनीतिक दल “राष्ट्रीय अधिकार मोर्चा” (राम) बनाया है। उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान और यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर पद से इस्तीफा दिया था। शुरुआती दौर में अलंकार और उनके राजनीतिक दल को मीडिया में सुर्खियां मिल रही हैं। लोगों का समर्थन भी मिल रहा है। लेकिन, पिछले अनुभवों के आधार पर यह चर्चा भी है कि अलंकार की “राम” कितना कमाल दिखा पाएगी। “राम” जैसे दल कहां टिक पाएंगे राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि राजनीतिक दल चलाने के लिए जरूरी आर्थिक संसाधन कहां से आएंगे? भाजपा-सपा के बीच सीधी चुनावी राजनीति में बसपा जैसे जनाधार वाले राजनीतिक दल भी अस्तित्व बचाने को जूझ रहे हैं। ऐसे में “राम” जैसे दल कहां टिक पाएंगे? क्या अलंकार अग्निहोत्री राजनीति में कमाल दिखा पाएंगे? अलंकार अग्निहोत्री ने एक वर्ग और समाज का खातिर PCS की नौकरी छोड़कर राजनीति में कदम रखा है। अगर वह नौकरी नहीं छोड़ते, तो 2041 में सचिव या मंडलायुक्त पद से रिटायर होते। लेकिन, उन्होंने रिटायरमेंट से करीब 16 साल पहले नौकरी छोड़ दी। यही वजह है कि उन्हें जगह-जगह समर्थन मिल रहा, लोग उनके साथ जुड़ रहे हैं। संसाधन भी मुहैया करा रहे हैं। लेकिन, क्या यह समर्थन और संसाधन लंबे समय तक जारी रहेंगे। अलंकार अग्निहोत्री से पहले भी आईएएस और आईपीएस अफसरों ने राजनीतिक दल बनाया था। लेकिन, चुनावी राजनीति में कोई कमाल नहीं दिखा पाए। अब पढ़िए अलंकार अग्निहोत्री की भास्कर से हुई बातचीत सवाल: आपके राजनीतिक दल की क्या चुनावी तैयारी है? जवाब: यह मेरा नहीं, आपका भी दल है, हम सबका दल है। हमारी चुनावी तैयारी शुरू हो गई है। हम 2027 में सरकार बनाने जा रहे हैं। देश में जनतंत्र खत्म हो चुका है। विदेशी जनता पार्टी ने लोकतंत्र को खत्म कर दिया है। उनका कोर वोटर हमारे साथ है। सवर्ण समाज की बात करने वाला कोई नहीं है। सवर्ण समाज हमारा कोर वोटर है। राजनीतिक रूप से सनातन समाज को विकल्प की जरूरत थी। हम विकल्प के रूप में आगे आकर काम कर रहे हैं। जल्द ही प्रदेश में अपनी सरकार बनाएंगे। सवाल: भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस जैसे दलों को आप चुनौती दे पाएंगे? जवाब: हमारे सामने कोई चुनौती नहीं है। पूरा देश चाहता है कि जिस तरह देशद्रोही और सनातन द्रोही पार्टी है, इससे आगे निकलकर अच्छे स्तर पर अपनी पार्टी लेकर आएं। सवाल: आपसे पहले भी कई अफसरों ने राजनीति दल बनाया? जवाब: आप इंतजार कीजिए, आपको परिणाम दिखेगा। हम सरकार बनाकर दिखाएंगे। सवाल: राजनीतिक दल चलाने के लिए जो संसाधन चाहिए, वो कहां से आएंगे? जवाब: जनता हमारे साथ है, जनता मदद करेगी। हम जनता से फंडिंग का आह्वान करेंगे, उसका डेटा भी जारी करेंगे। सवाल: आपके साथ केवल ब्राह्मण समाज है या पूरा सवर्ण समाज? जवाब: पूरा सनातन समाज हमारे साथ है। संवैधानिक व्यवस्था में जितने समाज हैं, हमारे साथ हैं। सवाल: जाति की राजनीति के दौर में, आप एक समाज के भरोसे कैसे टक्कर आएंगे? जवाब: एक विकास पुरुष महानुभाव तो कहते हैं कि यूपी में विकास के नाम पर राजनीति होती है। सवाल: शंकाराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर क्या कहेंगे? जवाब: यह एक सोची-समझी साजिश है। 25 हजार रुपए का इनामी बदमाश रहा, कई थानों में उसकी हिस्ट्रीशीट दर्ज है। गो तस्करी का आरोपी रहा है। उसकी एक शिकायत पर इस तरह की कार्रवाई करना साजिश है। मैं माननीय हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से इसका स्वत: संज्ञान लेने का आग्रह करूंगा। जिससे सनातन संस्कृति पर ये जो छद्म सनातनी सरकार है, उसकी ओर से जो साजिश कराई जा रही है, वह साफ हो जाएगा। सवाल: यूपी में ब्राह्मणों की स्थिति पर क्या कहेंगे? जवाब: ये ब्राह्मणों की बात नहीं है, सनातन संस्कृति की बात है। ब्राह्मणों ने तो पूरे विश्व की हर संस्कृति को बनाया है। तुलसीदासजी ने रामचरिसमानस लिखने के बाद पूरे विश्व में उसका प्रचार-प्रसार किया। योगीजी रामजी को मानते हैं। रामजी की कथा में तुलसीदासजी का कितना योगदान है? ब्राह्मणों का काम है, रचना करते रहना और सकारात्मकता की ओर लेकर जाना। लेकिन, जो राक्षसी प्रवृत्ति के लोग होते हैं वो सनातन का विरोध करते हैं। यह सूर्य भगवान का वर्ष है। सूर्य भगवान बता रहे हैं कि शंकराचार्य पर मुकदमा दर्ज कराने वाला किस प्रवृत्ति का है? उसे कौन लोग संरक्षण दे रहे हैं? इन अफसरों ने भी बनाई थी पार्टी चंद्रपाल सिंह: आईएएस चंद्रपाल सिंह ने रिटायरमेंट के बाद आदर्श समाज पार्टी बनाई। क्यों बनाई: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिवर्तन के लिए। नतीजा क्या: यह पार्टी राजनीति के मैदान में खास प्रभाव नहीं छोड़ सकी। साल- 2009 में चंद्रपाल सिंह ने आगरा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। सुलखान सिंह: योगी सरकार 1.0 (नवंबर 2023) में यूपी के DGP रहे सुलखान सिंह ने बुंदेलखंड लोकतांत्रिक पार्टी बनाई। क्यों बनाई: बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर। नतीजा क्या: सुलखान सिंह ने लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन मैदान में नहीं उतरे। एसआर दारापुरी: 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे एसआर दारापुरी ने रिटायरमेंट के बाद ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट बनाया। क्यों बनाया: शुरुआत में यह एक सामाजिक संगठन था, बाद में इसे राजनीतिक संगठन का रूप दिया गया। नतीजा क्या: दारापुरी ने अपनी पार्टी के सिंबल पर साल- 2019 में रॉबर्ट्सगंज से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। अमिताभ ठाकुर: 1972 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे अमिताभ ठाकुर ने साल- 2022 में आजाद अधिकार सेना बनाई। अभी भारत निर्वाचन आयोग में इसके रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया चल रही है। क्यों बनाया: अमिताभ ठाकुर समय-समय पर राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करते रहे हैं। नतीजा क्या: हाल ही में अमिताभ ठाकुर को एक मामले में गिरफ्तार कर देवरिया जेल भेजा गया था। जस्टिस चंद्रभूषण पांडेय: इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज चंद्रभूषण पांडेय ने भी रिटायरमेंट के बाद नैतिक पार्टी बनाई थी। क्यों बनाई: सवर्ण समाज को मजबूती देने के लिए। नतीजा क्या: राजनीति के मैदान में चंद्रभूषण पांडेय को कोई खास सफलता नहीं मिली। विजयशंकर पांडेय: पूर्व आईएएस विजय शंकर पांडेय ने रिटायरमेंट के बाद लोक गठबंधन पार्टी बनाई। नतीजा क्या: पांडेय ने 2019 और 2024 में अयोध्या (फैजाबाद) सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। उदित राज: भारतीय राजस्व सेवा के अफसर रहे उदित राज रामनगर के रहने वाले हैं। 24 नवंबर, 2003 को नौकरी से इस्तीफा देकर उन्होंने भारतीय न्याय पार्टी बनाई। नतीजा क्या: 23 फरवरी, 2014 को उन्होंने अपनी पार्टी का भाजपा में विलय कर दिया। 2014 में पश्चिमी दिल्ली से भाजपा के सांसद चुने गए। फिर 24 अप्रैल, 2019 को कांग्रेस में शामिल हो गए। राजनीतिक दल से जुड़े तो कामयाब रहे राजनीतिक जानकार आनंद राय कहते हैं- नौकरशाहों ने रिटायरमेंट के बाद खुद का राजनीतिक दल बनाने की जगह किसी राजनीतिक दल से जुड़कर चुनाव लड़ा, तो कामयाब रहे हैं। पूर्व आईएएस पीएल पूनिया रिटायरमेंट के बाद कांग्रेस में शामिल हुए। यूपीए सरकार में एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष रहे, सांसद भी रहे। पूर्व डीजीपी बृजलाल भी रिटायमेंट के बाद भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें यूपी में एससी आयोग का अध्यक्ष बनाया, फिर राज्यसभा भेजा। आईपीएस अधिकारी रहे असीम अरुण ने कानपुर पुलिस कमिश्नर रहते आईपीएस की नौकरी से त्यागपत्र दिया। फिर कन्नौज से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर योगी सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बने। ईडी के पूर्व संयुक्त निदेशक राजेश्वर सिंह भी नौकरी छोड़कर लखनऊ की सरोजनीनगर सीट से चुनाव लड़े और विधायक बने। उनकी गिनती सबसे सक्रिय विधायकों में होती है। -------------------- ये खबर भी पढ़ें… शंकराचार्य बोले- हिंदुत्व खतरे में है, सिर्फ ड्रेस पहनकर खुद को हिंदू बता रहे; प्रयागराज पुलिस ने काशी में डेरा जमाया शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों के यौन शोषण मामले में FIR दर्ज होने के बाद प्रयागराज पुलिस पिछले 3 दिन से वाराणसी में डेरा डाले है। पुलिस उनसे पूछताछ कर सकती है, लेकिन अभी तक आश्रम नहीं पहुंची है। सूत्रों के मुताबिक, प्रयागराज पुलिस फिलहाल शंकराचार्य से जुड़े सबूत जुटाने में लगी है। पढ़िए पूरी खबर…
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