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    राजधानी में 'कविता की ज़मीन' का आठवां संस्करण:राजस्थान के कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया

    4 hours ago

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    राजधानी लखनऊ में रविवार को 'कविता की ज़मीन' के आठवें संस्करण का आयोजन किया गया।यह कार्यक्रम जनवादी लेखक संघ, उत्तर प्रदेश की ओर से कैफी आज़मी अकादमी में आयोजित किया।इस कार्यक्रम में राजस्थान से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया, जिससे साहित्यिक संवाद को नई ऊर्जा मिली। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष राय ने की। वरिष्ठ आलोचक प्रो. नलिन रंजन सिंह ने स्वागत वक्तव्य दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सुप्रसिद्ध विद्वान और मार्क्सवादी चिंतक जनार्दन प्रसाद सिंह के निधन पर दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। कवियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी कविताएं सुनाईं इस अवसर पर वरिष्ठ साहित्यकार जीवन सिंह ने 'हिंदी कविता में राजस्थान' विषय पर अपना विचारपूर्ण वक्तव्य प्रस्तुत किया।राजस्थान से आए कवियों ने विभिन्न विषयों पर अपनी कविताएं सुनाईं। नागेंद्र कुमावत ने अपनी पुस्तक "मौत और कच्ची बस्ती" पर चर्चा की। राघवेंद्र रावत ने "लौट आना" और महाभारत से जुड़े प्रसंगों पर आधारित कविताएं प्रस्तुत कीं। शैलेन्द्र चौहान ने "परकोटे के भीतर" कविता का पाठ किया। सिंधी भाषा में भी अपनी रचना पढ़ी योगमाया सैनी ने बरसाती नदी और सोनी सोरी पर केंद्रित कविता 'महुआ फिर उगेगा तुम्हारे रक्तबीज से' सुनाई। हरिश करमचंदानी ने युद्ध की विभीषिका पर कविता पढ़ी और सिंधी भाषा में भी अपनी रचना प्रस्तुत की। कवि योगेंद्रमणि कौशिक ने अपनी व्यंग्य कविताओं से श्रोताओं को प्रभावित किया। सिंधी और हिंदी दोनों भाषाओं में लेखन करने वाली वीणा करमचंदानी ने अपराध और युद्ध से संबंधित विषयों पर कविताएं सुनाकर सराहना बटोरी। इनके साथही , मदन मोहन, हंसराज चौधरी, नवनीत पांडे और भरत मीणा सहित कई कवियों ने समकालीन सामाजिक यथार्थ, जनजीवन और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े विषयों पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।
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